Rajasthan Politial Crisis, Ashok Gehlot vs Sachin Pilot: राजस्थान में कांग्रेस के कद्दावर नेता और पार्टी के विधायक सचिन पायलट ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। हालांकि, उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जंग जारी रखने के साफ संकेत भी दिए। मंगलवार (11 अप्रैल, 2023) को सूबे की राजधानी जयपुर में उन्होंने अपना एक दिन का अनशन खत्म करने के बाद मीडिया से कहा- भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान वह बोले, "सुखजिंदर सिंह रंधावा कुछ रोज पहले प्रभारी बने थे। मैंने उनसे पहले के इंचार्ज से भी बात की थी, पर भ्रष्टाचार का मसला अभी भी है। हमें करप्शन के खिलाफ बोलना ही होगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी जंग जारी रहेगी।"
वैसे, पायलट के इस अनशन से जुड़ी सबसे रोचक बात यह रही कि जिस जगह वे लोग बैठे थे, वहां पर मंच पर बड़े-बड़े बैनर्स में कांग्रेस का पार्टी सिंबल गायब रहा। यही नहीं, कांग्रेस चीफ मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा गांधी परिवार के सोनिया गांधी, राहुल गांधी या फिर प्रियंका गांधी वाड्रा की तस्वीरें भी वहां कहीं नजर नहीं आई, जबकि बैनर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और ज्योतिबा फुले के चित्र थे।
अनशन के लिए जहां मंच बना था उसके पास गांधी और फुले की तस्वीरें रखी गई थी, जबकि मंच के पीछे केवल गांधी के फोटो के साथ ‘वसुंधरा सरकार में हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध अनशन’ लिखा है। लाउडस्पीकर पर अलग अलग देशभक्ति गाने बजाए गए। कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी रंधावा की ओर से मिली चेतावनी से विचलित हुए बिना पायलट मंगलवार सुबह 11 बजे शहीद स्मारक के पास धरने पर बैठे, जहां बड़ी संख्या में पायलट समर्थक मौजूद रहे। हालांकि, पार्टी का कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आया। पायलट ने मौजूदा विधायकों से इस कार्यक्रम में नहीं आने को कहा था।
इस बीच, सियासी गलियारों में चर्चा का बाजार काफी गर्म रहा और यह सवाल उठता नजर आया कि आखिरकार पायलट इसके जरिए पार्टी नेतृत्व को क्या पैगाम देना चाहते हैं। दरअसल, सूबे के पूर्व डिप्टी-सीएम पायलट ने कांग्रेस की ओर से दी गई चेतावनी को दरकिनार करते हुए मंगलवार को पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की मांग को लेकर यह अनशन किया था।
उन्होंने इसके साथ सीएम अशोक गहलोत के खिलाफ भी फिर से मोर्चा खोला। दिसंबर 2018 में राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से ही इन दोनों नेताओं में खींचतान फिलहाल जारी है, जबकि कांग्रेस के सत्ता में आने के समय पायलट राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष थे।
