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फ्लैट मिलने के बाद भी घटिया कंस्ट्रक्शन सुधार कर देगा बिल्डर, रेरा का यह नियम आप भी जानें

RERA Rules: रेरा धारा 14(3) के तहत कब्जा मिलने के 5 साल तक फ्लैट में किसी भी निर्माण दोष को 30 दिनों में मुफ्त ठीक करना बिल्डर की जिम्मेदारी है, अन्यथा खरीदार मुआवजा पा सकता है।

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नए फ्लैट में सीलन या दरारें? RERA के तहत 30 दिनों में बिल्डर को करनी होगी मुफ्त मरम्मत, जानें अपने अधिकार

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RERA Rules : नया घर या फ्लैट खरीदना हर किसी के जीवन का एक बड़ा सपना होता है। लेकिन क्या हो अगर कब्जा (Possession) मिलने के कुछ ही हफ्तों बाद फ्लैट की छत से पानी टपकने लगे या दीवारों में दरारें आ जाएं? इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में बाचुपल्ली (तेलंगाना) के एक घर खरीदार के साथ ऐसा ही हुआ। फ्लैट मिलने के तुरंत बाद ही बाथरूम की छत से पानी रिसने लगा, जिससे बेडरूम की दीवारों में भारी सीलन आ गई और खिड़कियों की ग्रिल में जंग लग गया। खरीदार ने थर्मल स्कैन करवाकर इस रिसाव की पुष्टि की और तेलंगाना रेरा (TNRERA) में शिकायत दर्ज कराई। ऑथरिटी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिल्डर को सख्त आदेश दिया कि वह अपने खर्चे पर छत की दोबारा ढलाई और वॉटरप्रूफिंग कराए, साथ ही इसकी कम से कम 5 साल की गारंटी का सर्टिफिकेट भी सौंपे।

क्या है रेरा एक्ट सेक्शन 14(3) और यह कैसे काम करती है?

कानूनी एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस फैसले का मुख्य आधार रियल एस्टेट (नियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (RERA Act) का सेक्शन 14(3) है। यह सेक्सन घर खरीदारों को कब्जा मिलने की तारीख से अगले 5 वर्षों तक एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान (homebuyer rights) करती है। इस 5 साल की अवधि को 'डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड' कहा जाता है। इस नियम के तहत, अगर फ्लैट के स्ट्रक्चर (ढांचे), निर्माण की गुणवत्ता, फिनिशिंग या किसी भी अन्य काम में कोई कमी पाई जाती है, तो उसे ठीक करने की पूरी जिम्मेदारी बिल्डर की होती है। नियम यह कहता है कि खरीदार द्वारा लिखित शिकायत मिलने के बाद, बिल्डर को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के 30 दिनों के भीतर उस खराबी को दुरुस्त करना अनिवार्य है।

अगर बिल्डर मरम्मत करने से मना करे, तो क्या करें?

अगर बिल्डर नोटिस मिलने के 30 दिनों के भीतर खराबी को ठीक नहीं करता है, तो कानूनन खरीदार मुआवजे का हकदार हो जाता है। ऐसे में खरीदारों के पास निम्नलिखित विकल्प होते हैं।

  • स्वयं मरम्मत कराकर रिफंड मांगें:- खरीदार पेशेवर एजेंसियों से काम करवा सकते हैं, उनके बिल और रसीदें सुरक्षित रख सकते हैं, और बिल्डर को नोटिस भेजकर खर्च की गई रकम वापस मांग सकते हैं। अगर बिल्डर भुगतान से इनकार करता है, तो इस राशि को रेरा शिकायत में शामिल किया जा सकता है। ऑथरिटी बिल्डर को ब्याज और मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे के साथ भुगतान करने का आदेश दे सकता है।
  • रेरा द्वारा मुआवजा निर्धारण:- रेरा के एडजुडिकेटिंग अधिकारी नुकसान की गंभीरता के आधार पर मुआवजा तय करते हैं। इसके लिए वे कुछ बातों पर गौर करते हैं, जैसे, मरम्मत का वास्तविक अनुमानित खर्च कितना है, खराबी कितनी गंभीर है (उदाहरण के लिए, छोटी सी दरार बनाम छत से पानी टपकना), क्या उस खराबी के कारण घर का कोई हिस्सा रहने लायक नहीं बचा है, और क्या बिल्डर ने बार-बार शिकायतों को नजरअंदाज किया।

बिल्डर की लापरवाही साबित करने के लिए कैसे जुटाएं सबूत?

रेरा कोर्ट में अपना पक्ष मजबूत करने के लिए घर खरीदारों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए।

दस्तावेज सुरक्षित रखें:- अपना सेल एग्रीमेंट, पजेशन लेटर और मालिकाना हक के सभी दस्तावेज संभालकर रखें।

तस्वीरें और वीडियो लें:- जहां भी रिसाव, सीलन या खराब प्लास्टर की समस्या हो, उसकी तारीख के साथ फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कर लें।

लिखित शिकायत का रिकॉर्ड:- बिल्डर को हमेशा आधिकारिक ईमेल, स्पीड पोस्ट या लिखित नोटिस भेजकर शिकायत दर्ज कराएं और उसकी रसीद संभालकर रखें।

टेक्निकल एक्सपर्ट की रिपोर्ट लें:- सीलन या स्ट्रक्चरल खराबी के मामलों में किसी स्वतंत्र इंजीनियर या स्ट्रक्चरल ऑडिटर से थर्मल स्कैन या तकनीकी जांच रिपोर्ट तैयार करवाएं। यह तकनीकी सबूत रेरा की सुनवाई में सबसे ठोस आधार बनता है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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