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भारतीय रेलवे का 'बुलेट' अवतार; मुंबई-अहमदाबाद के बाद अब इन शहरों के बीच दौड़ेगी हाई-स्पीड ट्रेन, बनेंगे 7 कॉरिडोर

भारतीय रेल के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 ऐतिहासिक साबित हुआ है। सरकार ने रेलवे को आधुनिक बनाने के लिए 2,78,000 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन किया है और सात नए बुलेट ट्रेनों के लिए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की है। लगभग 4,000 किलोमीटर लंबे इन कॉरिडोर पर करीब 16 लाख करोड़ का निवेश होगा। आइए जानते हैं इन कॉरिडोर के बारे में।

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नए हाई स्पीड कॉरिडोर से जुड़ेंगे 8 शहर (सांकेतिक तस्वीर)

Photo : Times Now Digital

Bullet Trains in India: भारतीय रेल अब एक नए युग की दहलीज पर है। दशकों तक देश की धड़कन रहने के बाद, यह नेटवर्क अब दुनिया की सबसे आधुनिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के साथ खड़ा होने के लिए तैयार है। केंद्रीय बजट 2026-27 ने इस बदलाव को एक ठोस दिशा दी है, जिसमें सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है। यह पहल न केवल यात्रियों के अनुभव को बदलेगी, बल्कि देश के आर्थिक विकास की गति को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगी।

रेलवे के लिए ऐतिहासिक बजट और विजन

भारत सरकार ने रेल बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए 2,78,000 करोड़ का रिकॉर्ड आवंटन किया है, जो इस क्षेत्र के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। इस भारी-भरकम बजट का मुख्य उद्देश्य क्षमता विस्तार के साथ-साथ सेवाओं की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और गति में सुधार करना है। सात हाई-स्पीड कॉरिडोर का विकास इसी रणनीतिक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जो लगभग 4,000 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करेगा। इन परियोजनाओं में करीब ₹16 लाख करोड़ के निवेश की उम्मीद है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

हाई-स्पीड रेल

हाई-स्पीड रेल (HSR) केवल तेज दौड़ने वाली ट्रेनें नहीं हैं, बल्कि यह एक अत्याधुनिक परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र है। इन्हें 250 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति के लिए डिज़ाइन किया गया है। पारंपरिक रेलवे के विपरीत, ये ट्रेनें समर्पित गलियारों पर चलती हैं, जिससे मालगाड़ियों या धीमी यात्री ट्रेनों के कारण होने वाली देरी की समस्या समाप्त हो जाती है। यह प्रणाली उन्नत सिग्नलिंग, संचार और सुरक्षा तकनीकों पर आधारित है, जो इसे सुरक्षित और अत्यधिक कुशल बनाती है। भारत के लिए ये कॉरिडोर प्रमुख शहरों को जोड़ने और मौजूदा बुनियादी ढांचे पर बोझ कम करने के लिए कारगर साबित होने वाले हैं।

उत्तर से दक्षिण तक फैलेगा नेटवर्क

नियोजित गलियारों को देश के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार किया गया है। उत्तर और पूर्वी भारत में दिल्ली से वाराणसी के बीच हाई-स्पीड कॉरिडोर यात्रा के समय को घटा देगा। इसी तरह, वाराणसी से पटना होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक जाने वाला लिंक क्षेत्रीय संपर्क को और मजबूत करेगा। सरकार ने करीब 16 लाख करोड़ के निवेश के साथ लगभग 4,000 किलोमीटर लंबे सात कॉरिडोर की योजना बनाई है। आइए जानते हैं सभी प्रोजेक्ट्स के बारे में।

उत्तर और पूर्वी भारत

  • दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर: यह कॉरिडोर देश की राजधानी को उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक केंद्र से जोड़ेगा। इससे दिल्ली से वाराणसी के बीच का सफर घटकर करीब 3 घंटे 50 मिनट रह जाने का अनुमान है।
  • वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर: यह दिल्ली-वाराणसी लिंक का विस्तार होगा, जो बिहार (पटना) होते हुए पश्चिम बंगाल (सिलीगुड़ी) तक जाएगा। इस रूट पर यात्रा का समय लगभग 2 घंटे 55 मिनट रहने की उम्मीद है।

दक्षिण और पश्चिम भारत

  • चेन्नई-बेंगलुरु कॉरिडोर: यह दक्षिण भारत के दो प्रमुख औद्योगिक और तकनीकी केंद्रों को जोड़ेगा। इसके शुरू होने पर दोनों शहरों के बीच का सफर महज 1 घंटा 13 मिनट का रह जाएगा।
  • बेंगलुरु-हैदराबाद कॉरिडोर: यह दो बड़े आईटी हब के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, जिससे यात्रा का समय घटकर लगभग 2 घंटे होने की संभावना है।
  • चेन्नई-हैदराबाद कॉरिडोर: इस कॉरिडोर का उद्देश्य दक्षिणी राज्यों के बीच क्षेत्रीय विकास को गति देना है, जिससे यात्रा का समय लगभग 2 घंटे 55 मिनट हो जाएगा।
  • मुंबई-पुणे कॉरिडोर: पश्चिमी भारत में भीड़भाड़ कम करने के लिए यह सबसे छोटा लेकिन महत्वपूर्ण रूट होगा, जहां यात्रा का अनुमानित समय केवल 48 मिनट है।
  • पुणे-हैदराबाद कॉरिडोर: यह कॉरिडोर पश्चिमी और दक्षिणी हब को आपस में जोड़ेगा, जिससे यात्रियों के लिए इंटर-रीजनल सफर आसान होगा। इसमें लगभग 1 घंटा 55 मिनट का समय लगने का अनुमान है।

मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर

भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना, जो मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ती है, इस पूरे मिशन के लिए एक सीखने के मॉडल के रूप में काम कर रही है। 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए तैयार किया जा रहा है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा कार्यान्वित यह परियोजना न केवल यात्रा के समय को घटाकर 2 घंटे 7 मिनट कर देगी, बल्कि इसने भारत में भूमि अधिग्रहण, तकनीकी अनुकूलन और परियोजना प्रबंधन की नई क्षमताएं भी विकसित की हैं। यह अनुभव भविष्य के अन्य सात कॉरिडोर के सफल कार्यान्वयन के लिए एक ठोस ब्लूप्रिंट प्रदान कर रहा है।

Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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