हम सभी को कभी न कभी घर शिफ्ट करने की जरूरत पड़ती ही है। घर शिफ्ट करना कितने बड़े सिरदर्द का काम है, यह तो वही जानते हैं, जिन्होंने कभी यह काम किया होगा। लेकिन एक शख्स है जो खुशी-खुशी इस सिरदर्द के काम को करता है। इस काम के लिए उस शख्स ने बकायदा एक पूरी कंपनी ही खड़ी कर दी है। आज जब भी आपको घर शिफ्ट करने की जरूरत होती है तो आपको सबसे पहले वही याद आते हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स लिमिटेड की और इस कंपनी के संस्थापक रमेश अग्रवाल की। तो फिर देर किस बात की चलिए जानते हैं रमेश अग्रवाल और उनके अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स लिमिटेड की सफलता की कहानी।
हिसार से दुनिया का सफर
रमेश अग्रवाल का जन्म 6 सितंबर 1962 को हरियाणा में हिसार जिले (District Hissar in Haryana) के नलवा गांव में हुआ था। नलवा के ही सरकारी स्कूल से उन्होंने अपनी प्राइमरी और सेकेंड्री की पढ़ाई की और फिर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने MIT-चेन्नई से डिपलोमा किया। साल 1980 में उन्होंने भारतीय वायु सेना (IAF) में एयरमैन के तौर पर करियर की शुरुआत की।
4 बार के लिमका बुक रिकॉर्ड होल्डर
6 साल IAF में बिताने के बाद उन्होंने 1987 में अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स लिमिटेड की शुरुआत की। इस इंडस्ट्री में कदम रखने के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर तरह के एक्सपेरिमेंट किए। इतने वर्षों में उन्होंने सफलता के आसमान को छुआ और अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स लिमिटेड बिना टेंशन घर शिफ्ट करने का दूसरा नाम बन गया। आज रमेश अग्रवाल की यह कंपनी पैकर्स एंड मूवर्स इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम है। उनके नेतृत्व में कंपनी का नाम लार्जेस्ट मूवर्स ऑफ हाउसहोल्ड गुड्स के लिए चार बार लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। रमेश अग्रवाल और उनकी कंपनी को बिजनेस स्फेयर अवॉर्ड (Business Sphere Award 2005), An Innovative of Logistics Industry by AITWA, ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स बिजनेस ऑफ द ईयर अवॉर्ड (Transport & Logistics Business of the Year Award 2010) और कई अन्य अवॉर्ड मिले हैं।
182 देशों में फैला कारोबार
अग्रवाल पैकर्स एंड मूवर्स लिमिटेड देश के सबसे बड़े और मोस्ट अवॉर्डेड मूवर्स हैं। APML को आज दुनियाभर में जाना जाता है और 182 देशों में यह कंपनी अपनी सुविधाएं देती है। कंपनी की शुरुआत अग्रवाल हाउहोल्ड कैरियर के रूप में हुई। पहला दफ्तर हैदराबाद में खोला गया, उस समय उनके पास धन भी कम ही था। जितनी साधारण तरीके से कंपनी की शुरुआत हुई थी, उतनी ही तेजी से APML ने करोड़ों का साम्राज्य भी फैला लिया।
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एक इंटरव्यू में रमेश अग्रवाल ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब 1994-95 में सैमसंग और LG का 25 फीसद तक सामान ट्रांस्पोर्टेशन के दौरान टूट जाता था। बाद में उन्होंने APML से संपर्क करके पैकेजिंग करने को कहा, हमने उनके लिए यह काम किया तो अब उनका डैमेज 2 फीसद पर आ गया है।
