Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित 126 मेगावाट की लारजी जलविद्युत परियोजना (Larji Hydel Project) में रविवार सुबह 6 बजे से प्री-मानसून फ्लशिंग का काम शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, गाद (सिल्ट) निकालने का यह अभियान सोमवार सुबह तक जारी रहेगा। इस प्रक्रिया के दौरान बांध में जमा हुई गाद को ब्यास नदी में बहाया जा रहा है, जिसके चलते नदी के निचले इलाकों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने की संभावना है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर ब्यास नदी के तटीय क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है।
सभी 5 गेटों को नियंत्रित तरीके से खोला गया
हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEB) के सराबई सर्कल के अधीक्षण अभियंता नरिंदर ठाकुर ने बताया कि रविवार तड़के से ही प्री-मानसून फ्लशिंग का काम बेहद सतर्कता के साथ शुरू किया गया है। बांध में जमा सिल्ट को साफ करने के लिए लारजी डैम के सभी पांचों गेटों को नियंत्रित तरीके से खोल दिया गया है। इस दौरान पानी को पावर हाउस के अंदर जाने से पूरी तरह रोक दिया गया है, जिसके कारण बिजली का उत्पादन अस्थाई रूप से ठप रहेगा। पावर हाउस को दोबारा पूरी क्षमता से चालू करने और बिजली उत्पादन बहाल करने में करीब 24 घंटे का समय लगेगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और 2000 क्यूसेक पानी की निकासी
अधीक्षण अभियंता नरिंदर ठाकुर के अनुसार, निर्बाध बिजली उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए मानसून से पहले की जाने वाली यह फ्लशिंग प्रक्रिया बेहद अनिवार्य हिस्सा है। सुरक्षा उपायों को पुख्ता करते हुए बांध से करीब 2000 क्यूसेक पानी ब्यास नदी में छोड़ा जा रहा है। लारजी से लेकर पंडोह तक फैले ब्यास नदी के लगभग 10 किलोमीटर लंबे निचले हिस्से में पानी का स्तर काफी बढ़ जाएगा। इसके बाद, पंडोह से इस पानी को एक टनल के जरिए सुंदरनगर की ओर मोड़ दिया जाएगा, जिसका उपयोग 990 मेगावाट की 'ब्यास-सतलुज लिंक परियोजना' में किया जाना है।
सायरन और मोबाइल वैन से लोगों को किया गया अलर्ट
ब्यास नदी के बहाव क्षेत्र और निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने पूरी सावधानी बरती है। बांध से पानी छोड़े जाने के करीब एक घंटे पहले ही पूरे प्रभावित क्षेत्र में मोबाइल वैन और सायरन का इस्तेमाल कर लोगों को नदी के किनारे न जाने की सख्त चेतावनी दी गई। लाउडस्पीकर के माध्यम से भी स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को ब्यास नदी से दूरी बनाए रखने की हिदायत दी जा रही है।
अभियान का पूरा शेड्यूल और कर्मचारियों की मुस्तैदी
इस पूरे ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए लारजी पावर हाउस के शिफ्ट कर्मचारियों के अलावा लगभग 15 से 20 विशेष तकनीशियनों और कर्मियों की टीम को तैनात किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआत के पहले चार से पांच घंटों में गाद को बहाने का मुख्य कार्य पूरा किया जाएगा, जबकि उसके बाद के अगले आठ घंटों में पूरे बांध की गहन सफाई की जाएगी। सफाई का यह चरण पूरा होने के बाद जलाशय में पानी भरने का काम दोबारा शुरू होगा, ताकि प्लांट के तीनों जनरेटरों को चालू कर फिर से बिजली का उत्पादन शुरू किया जा सके।
