दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में दो अहम फैसले लिए गए। सरकार ने छोटी सड़कों पर मशीनीकृत सफाई व्यवस्था बढ़ाने और आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर पीएम2.5 और पीएम10 के प्रदूषण स्रोतों की रियल-टाइम निगरानी करने का फैसला किया है।
सरकार का कहना है कि प्रदूषण के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ सर्दियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे साल अलग-अलग स्रोतों पर काम किया जाएगा।
छोटी सड़कों पर तैनात होंगी 30 इलेक्ट्रिक स्वीपिंग मशीनें
कैबिनेट के फैसले के मुताबिक 10 मीटर से कम चौड़ाई वाली सड़कों पर मशीनीकृत सफाई व्यवस्था को बढ़ाया जाएगा। इसके लिए करीब 609 किलोमीटर लंबी 854 सड़कों की पहचान की गई है, जो 250 वार्डों में हैं। दिल्ली सरकार इन सड़कों की सफाई के लिए एमसीडी को 30 इलेक्ट्रिक वाहन आधारित मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें उपलब्ध कराने के लिए अनुदान देगी। इन मशीनों की तैनाती और संचालन एमसीडी करेगी। इस पूरी व्यवस्था पर 10 साल में करीब 393.73 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
TIMES NOW Navbharat पर यह भी पढ़ें:दिल्ली में PUC के बिना नहीं मिलेगा फ्यूल! जानें क्या होता है पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट
अब पता चलेगा प्रदूषण का स्रोत कहां है
सरकार ने प्रदूषण के स्रोतों की वैज्ञानिक और लगातार निगरानी के लिए आईआईटी दिल्ली के साथ पांच साल की साझेदारी को भी मंजूरी दी है। इसके तहत पीएम2.5 और पीएम10 के स्रोतों की 24 घंटे रियल-टाइम निगरानी और विश्लेषण किया जाएगा। वाहनों से होने वाला प्रदूषण, सड़क की धूल और बायोमास जलाने जैसे स्रोतों की पहचान कर उनका आकलन किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 19.22 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सुपर साइट और मोबाइल लैब फिर होंगी सक्रिय
इस योजना के तहत राउज एवेन्यू स्थित मौजूदा सुपर साइट को दोबारा वैज्ञानिक संचालन के लिए सक्रिय किया जाएगा। साथ ही मोबाइल प्रयोगशाला भी फिर से शुरू होगी, जिससे प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट और स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के स्रोतों का अध्ययन किया जा सकेगा। रियल-टाइम डैशबोर्ड और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के साथ डीपीसीसी अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी काम किया जाएगा।
दिल्ली सरकार प्रदूषण को सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं मानती
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण को सिर्फ सर्दियों की समस्या नहीं मानती। सड़क की धूल, वाहनों का उत्सर्जन, निर्माण और विध्वंस से निकलने वाली धूल, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा और बायोमास जलाने जैसे सभी प्रमुख स्रोतों पर सालभर काम किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य वैज्ञानिक तकनीक, पर्याप्त संसाधन, विभिन्न एजेंसियों के तालमेल और जनभागीदारी के जरिए दिल्लीवासियों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना है।
