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Peter Wilson Exclusive: आधे दिन की ट्रेनिंग से ही नीरू ने जीत लिया गोल्ड, कोच पीटर ने साझा की सफलता के पीछे की कहानी

Peter Wilson Exclusive: ट्रैप कोच पीटर विल्सन जिन्होंने गोल्डन गर्ल नीरू को ट्रेनिंग दी, उन्होंने स्पोर्ट्स नाउ से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने सफलता के पीछे की कहानी बताई कि कैसे नीरू को ट्रेनिंग करने तक का वक्त भी नहीं मिला।

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पीटर विल्सन (साभार-X)

Peter Wilson Exclusive: भाई को देखकर उससे प्रेरित होकर शूटिंग शुरू करने वाली नीरू ढांडा ने मंगलवार को महिला ट्रैप स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। वह एशियन गेम्स में ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। किसी ने कल्पना नहीं की थी कि कुछ दिन पहले अस्पताल की बेड पर रहने वाली नीरू एशियन गेम्स में मेडल जीतेगी वो भी गोल्ड। इस सफलता के पीछे उसकी मेहनत पर ट्रैप कोच पीटर विल्सन ने बात की है। उन्होंने स्पोर्ट्स नाउ से खास बातचीत में बताया कि कैसे विपरीत परिस्थतियों में भी नीरू ने अपना जुझारूपन बरकरार रखा और सफलता को गले लगाया। उन्हें ठीक से ट्रेनिंग का भी समय नहीं मिला था। यह एक दिन की मेहनत नहीं थी।

केवल आधे दिन की ट्रेनिंग मिली थी

नीरू के कोच ने कहा कि बेहद खुश हूं। सबसेअहम बात यही है कि तैयारी बेहद कठिन और जटिल रही। 10 दिन पहले वह दिल्ली के अस्पताल में भर्ती थीं और इस बात की गंभीर चिंता थी कि क्या वह यहाँ आ भी पाएगी या नहीं। उन्होंने कोई ट्रेनिंग नहीं की थी, वह बहुत बीमार थीं। यहां आने के बाद हमें सिर्फ आधे दिन की ट्रेनिंग मिली। इसके बावजूद शुरुआत से ही बढ़त बनाना और विपरीत मौसम के बाद टॉप पर फिनिश करना उनके चरित्र, जुझारूपन, कार्यकुशलता का प्रमाण है। वह इस सफलता की पूरी हकदार हैं।

नीरू की खूबियों पर कोच पीटर

पीटर विल्सन ने नीरू की खूबियों पर बात करते हुए कहा 'वह चीज़ों को अलग-अलग बाँटने और एक बार में एक ही टारगेट पर ध्यान केंद्रित करने में बहुत माहिर हैं। हमारा ध्यान भटकता है, लेकिन वह इसे तुरंत वर्तमान समय में वापस लाने में सक्षम हैं। उनका वर्क-रेट कमाल का है। पिछले 12 महीनों में जो सबसे प्रमुख गुण उनमें विकसित हुआ है, वह यह है कि वह खुद को बहुत अच्छी तरह समझने लगी हैं। उन्हें पता है कि कितना अभ्यास करना है, कब ट्रेनिंग करनी है। यह किसी के लिए भी आसान नहीं होता।

सोशल मीडिया से दूरी

पीटर विल्सन ने कहा कि आपको सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। जब बात सोशल मीडिया और परफॉरमेंस की आती है, तो दोनों साथ नहीं चलते।

उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा 'जब मैं लंदन ओलंपिक्स की तैयारी कर रहा था, तब मुझ पर घरेलू दबाव बहुत था और मैंने सोशल मीडिया तथा मीडिया से दूर रहने का फैसला किया था, जिसका फायदा मुझे हुआ। नीरू ने भी यह काम बहुत खूबसूरती से किया है। ट्रैप कोच के तौर पर मैं बहुत खुश हूं। एक कोच के रूप में मुझे सफलता मिली है।

Karishma Singh
करिश्मा सिंहauthor

करिश्मा सिंह TIMES NOW में न्यूज एडिटर हैं। 14 वर्षों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने 5 क्रिकेट विश्व कप कवर किए हैं, जिनमें 2024 और 2026 में भारत द्वारा जीते गए दो विश्व कप भी शामिल हैं। उन्होंने 2 ओलंपिक खेलों को भी कवर किया है और सभी प्रमुख खेल विधाओं की रिपोर्टिंग में विशेषज्ञता रखती हैं।

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