उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे Ganga Expressway को अब हरिद्वार तक ले जाने का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में मेरठ से हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार को मंजूरी दे दी गई है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद प्रयागराज से हरिद्वार तक एक्सप्रेसवे के जरिए सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी।
प्रस्तावित विस्तार में करीब 117 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में होगा, जबकि लगभग 30 किलोमीटर का हिस्सा उत्तराखंड में बनाया जाएगा। छह लेन का यह ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे भविष्य की जरूरतों के मुताबिक आठ लेन तक विस्तार योग्य बनाया जा सकता है।
741 किलोमीटर का हो जाएगा गंगा एक्सप्रेसवे
मेरठ से प्रयागराज तक मौजूदा गंगा एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 594 किलोमीटर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को इसके उद्घाटन के दौरान एक्सप्रेसवे को हरिद्वार तक विस्तार देने की घोषणा की थी। नया लिंक बनने के बाद पूरे गंगा एक्सप्रेसवे नेटवर्क की लंबाई करीब 741 किलोमीटर तक पहुंच सकती है।
परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 10 हजार, 760 करोड़ रुपये बताई गई है। नए एक्सप्रेसवे का अलाइनमेंट अमरोहा के रिखालू गांव से शुरू होकर बिजनौर के रास्ते उत्तराखंड में हरिद्वार तक पहुंचाने का प्रस्ताव है।
अमरोहा और बिजनौर को भी मिलेगा फायदा
इस परियोजना से अमरोहा, बिजनौर और हरिद्वार के अलावा मेरठ और आसपास के कई क्षेत्रों को बेहतर एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी मिलेगी। प्रस्तावित मार्ग बिजौली, खड़खौदा, मवाना और हस्तिनापुर के आसपास के इलाकों से होकर आगे बढ़ सकता है। इसके बाद मुजफ्फरनगर-बिजनौर सीमा, मंडावर, नांगल सोती और कीरतपुर क्षेत्र होते हुए उत्तराखंड सीमा तक पहुंचाने की योजना है। हरिद्वार में यह एक्सप्रेसवे लक्सर, रुड़की के बाहरी क्षेत्रों और बहादराबाद-ज्वालापुर के आसपास के इलाकों को भी बेहतर कनेक्टिविटी दे सकता है।
100 गांवों में होगा भूमि-अधिग्रहण
परियोजना के लिए अलाइनमेंट सर्वे और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी तैयारियां पहले से चल रही हैं। मंजूरी के बाद लगभग 100 गांवों से संबंधित जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। एक्सप्रेसवे के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच आवागमन तेज होने के साथ धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होने की उम्मीद है।
