दिल्ली

पॉल्यूशन कंट्रोल को लेकर MCD और DMRC आमने-सामने, नगर निगम ने काट दिया 3 लाख का चालान

दिल्ली में मेहरौली–बदरपुर रोड पर निर्माण नियमों को लेकर नगर निगम दिल्ली (MCD) और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) आमने-सामने हैं। MCD ने DMRC पर प्रदूषण से जु़ड़े मानकों को ना मानने को कारण 3 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगा दिया है। वहीं, DMRC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है। दोनों संस्थाएं अपने-अपने पक्ष पर अड़ी हुई हैं।

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DMRC के खिलाफ 3 लाख से अधिक के कुल 24 चालान जारी (सांकेतिक तस्वीर: PTI)

Photo : PTI

Delhi News: दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के बीच मेहरौली–बदरपुर रोड पर निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन को लेकर नगर निगम दिल्ली (MCD) और दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) आमने सामने आ गए हैं। MCD ने शुक्रवार को DMRC के खिलाफ 3 लाख रुपयों से अधिक के कुल 24 चालान जारी कर दिए, जबकि DMRC ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उसके कंस्ट्रक्शन साइट्स पर सभी जरूरी एंटी-पॉल्यूशन उपायों का पालन किया जा रहा है।

MCD का दावा, NGT के निर्देशों का हो रहा उल्लंघन

MCD अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण और केंद्रीय जोन की संयुक्त कार्रवाई में MB रोड पर मेट्रो कंस्ट्रक्शन साइट्स पर कई खामियां पाई गईं। जांच के दौरान एंटी-स्मॉग गन, वॉटर स्प्रिंक्लर, धूल-नियंत्रण उपाय, ढकी हुई निर्माण सामग्री और उचित बैरिकेडिंग जैसे मानकों का पालन नहीं मिलने पर चालान जारी किए गए। नगर निगम का कहना है कि ये उल्लंघन NGT के निर्देशों और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों का खुला उल्लंघन हैं। MCD ने बताया कि शिकायतों की पुष्टि और स्थल निरीक्षण के बाद ही कार्रवाई की गई है।

DMRC का पलटवार, नियमों का हो रहा पालन

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक DMRC ने एक विस्तृत बयान जारी कर MCD के दावों को गलत बताया। मेट्रो कॉर्पोरेशन के अनुसार, MB रोड का केवल 6.58 किलोमीटर हिस्सा, जो साकेत G-ब्लॉक से बत्रा अस्पताल तक और मां आनंदमयी मार्ग टी-प्वाइंट से पुल प्रहलादपुर तक जाता है, उतना ही उसके एयरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर के कार्यक्षेत्र में आता है। DMRC के अनुसार, इस हिस्से में फुटपाथ नहीं है और पक्की सड़क के बाहर का इलाका कच्चा है, जबकि उसका निर्माण कार्य बैरिकेडिंग के अंदर मध्य भाग में सीमित है।

DMRC ने MCD पर उठाए सवाल

DMRC का तर्क है कि MCD के चालानों में जिन तस्वीरों का जिक्र है, उनमें से ज्यादातर मलबा सड़क किनारे का है, जिसका मेट्रो के निर्माण से कोई संबंध नहीं है। DMRC ने यह भी कहा कि स्थानीय निवासी और राहगीर सड़क किनारे मलबा फेंकते हैं, क्योंकि नगर निगम ने डस्टबिन उपलब्ध नहीं कराए हैं। निगम के अनुसार, यह कचरा समय पर साफ नहीं किया जाता, जिससे क्षेत्र में गंदगी जमा होती रहती है। DMRC ने कहा, “यह मलबे हमारे नहीं हैं, लेकिन हम एक जिम्मेदार संस्था होने के नाते सड़क किनारे जमा कचरा समय-समय पर हटाते हैं।”

एंटी-पॉल्यूशन उपायों पर क्या कहती है DMRC

निर्माण संस्था ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि GRAP, NGT और पर्यावरणीय मानकों के तहत सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत निर्माण स्थल पर नियमित वॉटर स्प्रिंकलिंग की जा रही है, C&D वेस्ट को अधिकृत प्लांटों तक निस्तारित किया जा रहा है, एंटी-स्मॉग गन और पोर्टेबल मिस्ट गन चलवाया जा रहा है, बैरिकेड के किनारों की नियमित सफाई की जा रही है और कंस्ट्रक्शन सामग्री को ढककर रखने की व्यवस्था की गई है। DMRC ने कहा कि MCD की गई टिप्पणियों को संज्ञान में लिया गया है और आगे सुधार किए जाएंगे।

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Nishant Tiwari
निशांत तिवारीauthor

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृष्टि उन्हें इस बीट का एक भरोसेमंद और प्रभावी कंटेंट राइटर बनाती है। वे जटिल लोकल इश्यूज को सहज, स्पष्ट और असरदार अंदाज में पेश करने में दक्ष हैं और अबतक 2,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट लिख चुके हैं। उनकी लेखन शैली शहर की नब्ज पकड़ते हुए ऐसे कंटेंट पर केंद्रित रहती है, जो सीधे पाठकों के जीवन और उनकी रोजमर्रा की चिंताओं से जुड़ा होता है।

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