कोविड के इन मामलों की ये खबरें इसलिए भी हमें चौकन्ना कर देती हैं, क्योंकि हमारी लगभग 70 फीसदी आबादी ने कोरोना की बूस्टर डोज नहीं ली है। उन्होंने बताया था कि देश की केवल 27-28 फीसदी आबादी ने ऐहतियाती खुराक ली है। ऐसे में जिन्होंने बूस्टर डोज नहीं है, उनके लिए क्या, कितना और कैसा खतरा है? आइए, समझते हैं एक्सपर्ट्स से:
डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स का साफ मानना है कि संक्रमण के मद्देनजर बूस्टर डोज एक बेनेफिट है। खासकर तब जब आप सीनियर सिटिजन (बुजुर्ग) वाली श्रेणी में आते हों या को-मोरबिडिटी (विभिन्न प्रकार की गंभीर बीमारियां) से ग्रसित हों। अधिक शराब पीने वालों को भी बिना बूस्टर डोज के खतरा रहेगा।
अधिक जोखिम वाली श्रेणी (हाई रिस्क कैटेगरी) में आते हों। मसलन आप फ्रंटलाइन वर्कर (डॉक्टर, नर्स, पुलिसकर्मी, सफाई कर्मचारी और पत्रकार) हैं, तब यह आपके बचाव के लिए खासा कारगर साबित हो सकती है।
चूंकि, फ्रंट लाइन वर्कर्स फील्ड पर रहते हैं और वे इस दौरान तरह-तरह के लोगों कें संपर्क में आते हैं। नतीजतन इस स्थिति में हो सकता है कि आप समझ ही न पाएं कि संक्रमण कहां से और कैसे आया...लिहाजा बूस्टर डोज लगवा लें। सीधे तौर पर समझें कि बूस्टर डोज एक एडिश्नल सेफ गार्ड या ढाल है।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। शहर (Delhi News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।
