कुत्तों की ड्यूटी पर सियासी घमासान: शिक्षा मंत्री ने AAP के दावों को बताया झूठा और भ्रामक
- Authored by: varsha kushwaha
- Updated Dec 30, 2025, 02:40 PM IST
Delhi News: दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में स्कूल टीचर की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों और खबरों को खारीज करते हुए बताया कि इस संबंध में किसी प्रकार का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। इस मामले में शिक्षकों की कोई भूमिका नहीं है। आप द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही खबरे पूरी तरह के निराधार हैं।
शिक्षा मंत्री ने AAP के दावों को बताया झूठा और भ्रामक (Photo - Ashish Sood X)
Delhi News: दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों को सुलझाने की जिम्मेदारी स्कूल टीचर को सौंपे जाने वाली सभी खबरों और दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार ने ऐसा कोई भी आदेश जारी नहीं किया है, जिससे टीचरों को उनके शैक्षणिक कार्य से हटाकर गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में लगाया गया हो। शिक्षा मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट तौर पर कहा कि टीचरों की प्राथमिकता केवल छात्रों को शिक्षा देना है। उन्होंने यह भी कहा की सोशल मीडिया पर चल रही खबरें पूरी तरह से निराधार और भ्रामक हैं।
AAP को आधिकारिक आदेश सार्वजनिक करने की चुनौती
आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में टीचरों की भूमिका के इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं पर सोशल मीडिया के माध्यम से गलत जानकारी फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। सूद ने कहा कि विपक्षी दल जनता और शिक्षकों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने 'आप' को चुनौती दी और कहा कि यदि उनके पास शिक्षकों को कुत्ता पकड़ने की ड्यूटी पर लगाने का कोई भी आधिकारिक सरकारी आदेश या परिपत्र है, तो उसे सार्वजनिक करें। मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर जानबूझकर झूठ फैलाया जा रहा है ताकि दिल्ली की सरकार की छवि धूमिल की जा सके।
नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का सच
विवाद की जड़ शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी किया गया वह वह निर्देश है, जिसमें स्कूलों के आसपास आवारा कुत्तों की समस्या को देखने और उसे सुलझाने के लिए 'नोडल अधिकारी' नियुक्त करने की बात कही गई थी। निदेशालय ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में उठाया गया है। विभाग ने साफ किया है कि इन नोडल अधिकारियों का काम समन्वय बनाना है और इसके लिए किसी भी शिक्षक को कोई प्रकार का शारीरिक कार्य या 'कुत्ता प्रबंधन' जैसी जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। सरकार का कहना है कि यह एक प्रशासनिक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ डालना।
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