Delhi Demolition Drive: दिल्ली के यमुना बाजार स्थित निगम बोध घाट इलाके में गुरुवार को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई (Demolition Drive) शुरू की। इसृके तहत यमुना के डूब क्षेत्र (Flood Plains) में बने अवैध निर्माणों और झुग्गियों को हटाया जा रहा है। गुरुवार को कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी सुरक्षा बल को तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पहले ही दिया गया था 15 दिनों का नोटिस
अधिकारियों के मुताबिक, इस अभियान के तहत करीब 310 घरों को हटाने की तैयारी की गई है, जहां लगभग 1100 लोगों के परिवार रह रहे थे। प्रशासन के अनुसार, यह कार्रवाई अचानक नहीं की जा रही है। इससे पहले 8 मई को दिल्ली सरकार ने पुरानी दिल्ली में यमुना बाढ़ क्षेत्र में रहने वाले लोगों को मकान खाली करने का नोटिस जारी किया था। सरकार ने इस कार्रवाई के पीछे बाढ़ का खतरा और लोगों की सुरक्षा को वजह बताया था। पुरानी दिल्ली के एडिशनल डीएम की ओर से जारी नोटिस में कहा गया था कि इन 310 घरों का निर्माण डीडीए की जमीन पर अवैध कब्जा करके हुआ है। यहां से लोगों को अपना सामान समेटने और जगह खाली करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था।
क्यों जरूरी है यह कार्रवाई?
प्रशासन के मुताबिक, यमुना का फ्लडप्लेन पर्यावरण की नजर से बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता है और इसे जोन-ओ (Zone-O) के तहत रखा गया है। मानसून के दौरान हर साल यमुना का जलस्तर बढ़ने पर यह इलाका बाढ़ की चपेट में आ जाता है, जिससे यहां रहने वाले लोगों, उनके मवेशियों और संपत्ति को भारी खतरा रहता है। इसी कारण प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा और बाढ़ के जोखिम को देखते हुए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत अवैध बस्तियों को हटाने का फैसला किया।
दिल्ली को बाढ़ से बचाने के लिए बनेगी 'सुरक्षा दीवार'
इस बीच, दिल्ली सरकार मानसून में यमुना में आने वाल बाढ़ से राजधानी को सुरक्षित रखने के लिए स्थायी समाधान पर भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मई की शुरुआत में रिंग रोड के संवेदनशील इलाके के साथ एक 'बाढ़ सुरक्षा दीवार' (Flood Protection Wall) के निर्माण को मंजूरी दी थी। इसके तहत मजनू का टीला से ओल्ड रेलवे ब्रिज तक 4.72 किलोमीटर लंबी दीवार बनाई जाएगी।
इस परियोजना का मकसद यमुना के पानी को रिहायशी इलाकों में घुसने से रोकना है। इस प्रोजेक्ट को अगले मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मजबूत दीवार से सिविल लाइंस, कश्मीरी गेट, यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे बाढ़ प्रभावित इलाकों को मानसून में सुरक्षा मिल सकेगी।
