मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक धार्मिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को जोड़ने वाले सबसे बड़े प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन सनातन ध्वज के शिव शंभू महादेव मंदिर पर आरोहण का ऐतिहासिक और पवित्र अवसर है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने राम जन्मभूमि आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज से लगभग 298 वर्ष पहले वह “काली रात्रि” आई थी, जब अयोध्या की राम जन्मभूमि पर प्रभु श्रीराम के मंदिर को अपवित्र कर एक विवादित ढांचा खड़ा किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1528 से लेकर अब तक ऐसा कोई दिन नहीं रहा होगा, जब सनातन धर्मावलंबियों ने राम जन्मभूमि के लिए संघर्ष और मंदिर निर्माण का संकल्प न लिया हो।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का संकल्प पूरा
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वर्ष 1983 में इस आंदोलन को संगठित रूप से आगे बढ़ाया और करोड़ों रामभक्तों ने “रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे” के संकल्प को जन-आंदोलन बना दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग उस समय इस संकल्प पर हंसते थे, लेकिन 5 अगस्त 2020 को पूरी दुनिया ने अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन का ऐतिहासिक क्षण देखा। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के कठिन दौर में भी भगवान राम के भव्य मंदिर निर्माण का कार्य आगे बढ़ा और यह तिथि भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई।
मुख्यमंत्री ने 22 जनवरी 2024 को श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र करते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री के करकमलों से यह ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसके साक्षी करोड़ों श्रद्धालु बने। उन्होंने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के अगले दिन अयोध्या में लाखों रामभक्त उमड़े थे। कोई मंदिर के स्तंभों को पकड़कर भावुक हो रहा था तो कोई भूमि पर दंडवत होकर अपनी आस्था व्यक्त कर रहा था।
उन्होंने कहा कि भगवान राम पूरी दुनिया को जोड़ने वाले आदर्श हैं। पश्चिम बंगाल के चुनाव प्रचार का अनुभव साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां दूर-दराज के गांवों में भी लोग “जय श्रीराम” के उद्घोष के साथ उनका स्वागत करते थे। उन्होंने कहा कि “जो रामद्रोही और शिवद्रोही होता है, उसके लिए कहीं कोई ठौर-ठिकाना नहीं होता।”
