Chhattisgarh News: सुबह का कोयलीबेड़ा का खेल मैदान। कहीं 100 मीटर की दौड़ के लिए युवा अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, कहीं 1500 मीटर की तैयारी चल रही है। कोई गोला फेंकने का अभ्यास कर रहा है तो कोई लंबी और ऊंची कूद की तकनीक सीख रहा है। लेकिन इस मैदान की सबसे अलग तस्वीर उन बेटियों की है, जो लड़कों से करीब दोगुनी संख्या में भर्ती की तैयारी के लिए पहुंच रही हैं।
बस्तर के अंदरूनी क्षेत्र कोयलीबेड़ा में यह केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि युवाओं की बदलती आकांक्षाओं की तस्वीर है। 18 पंचायतों के 360 युवक-युवतियों ने अब तक इस निःशुल्क प्रशिक्षण के लिए पंजीयन कराया है।
पुलिस के ‘मिशन रक्षक’ के तहत चल रहे इस शिविर में युवाओं को छत्तीसगढ़ जिला पुलिस बल, बस्तर फाइटर्स, सीएएफ, सीआरपीएफ, बीएसएफ और अग्निवीर भर्ती की शारीरिक तथा लिखित परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है।
मैदान में बन रही वर्दी तक पहुंचने की राह
प्रशिक्षण शिविर में युवाओं को भर्ती की शारीरिक दक्षता के लिए नियमित अभ्यास कराया जा रहा है। इसमें 100 मीटर और 1500 मीटर दौड़, लंबी कूद, ऊंची कूद और गोला फेंक जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इसके साथ भर्ती प्रक्रिया से संबंधित लिखित परीक्षा की तैयारी भी कराई जा रही है।
इस पहल की खासियत यह है कि दूर-दराज के गांवों से आने वाले युवाओं को तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा। 18 पंचायतों के युवाओं को उनके अपने क्षेत्र में प्रशिक्षण और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
बेटियों ने दिखाई सबसे बड़ी भागीदारी
शिविर की सबसे उल्लेखनीय तस्वीर लड़कियों की भागीदारी है। लड़कों की तुलना में करीब दोगुनी संख्या में बेटियां प्रशिक्षण के लिए मैदान में पहुंच रही हैं। वे दौड़ से लेकर कूद और अन्य शारीरिक दक्षताओं का अभ्यास कर रही हैं।
यह भागीदारी बस्तर के ग्रामीण और अंदरूनी क्षेत्रों की युवा पीढ़ी में बढ़ती करियर आकांक्षाओं और आत्मविश्वास की तस्वीर पेश करती है। सुरक्षा बलों में भर्ती अब स्थानीय युवाओं के लिए केवल रोजगार का विकल्प नहीं, बल्कि आगे बढ़ने और नई पहचान बनाने का अवसर भी बन रही है।
छत्तीसगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि,यहां दौड़ सिर्फ मैदान की लंबाई तय नहीं कर रही। इन युवाओं के लिए यह दौड़ अपने गांव से अवसर तक और सपने से एक नई पहचान तक पहुंचने की कोशिश है।
