US Tariffs : अमेरिकी सरकार द्वारा भारत से आयात होने वाली वस्तुओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का बिल पास करने के बाद भारतीय उद्योग जगत में गहरी चिंता फैल गई है। दिल्ली और देशभर के व्यापारियों एवं उद्यमियों के शीर्ष संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। CTI का मानना है कि इस नीति से भारत के निर्यात को भारी झटका लगेगा और देश में करीब 10 लाख लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो सकता है। CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस गंभीर मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से ठोस कदम उठाने और आवश्यकता पड़ने पर जवाबी कार्रवाई करने की अपील की है।
प्रमुख सेक्टरों पर भारी मार और 50 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, अमेरिका के इस कदम का सबसे बुरा प्रभाव भारत के टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, ऑटो कंपोनेंट, केमिकल, फार्मा, सीफूड और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे मुख्य क्षेत्रों पर पड़ेगा। नए टैरिफ के लागू होने से अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में करीब 40 प्रतिशत तक महंगा हो जाएगा। इसके परिणामस्वरूप वहां के खरीदार भारतीय सामान के बजाय अन्य देशों के उत्पादों को तरजीह देंगे। आंकड़ों के मुताबिक, इससे भारत का 50 अरब डॉलर (लगभग 4.15 लाख करोड़ रुपये) से अधिक का निर्यात सीधे तौर पर प्रभावित हो सकता है। CTI के पदाधिकारियों का कहना है कि भारत अमेरिका को फार्मास्युटिकल का 53%, वस्त्र एवं परिधान का 53%, रत्न एवं आभूषण का 37%, ऑटो कंपोनेंट का 28% और सीफूड का 22% निर्यात करता है।
उत्पादों की कीमतें दोगुनी होने से बाजार में मंदी का खतरा
टैरिफ में इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी से अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं के दाम रातों-रात दोगुने हो जाएंगे। उदाहरण के लिए, इंजीनियरिंग गुड्स पर पहले 10% टैरिफ लगता था, जिससे 100 डॉलर का सामान 110 डॉलर में बिकता था, लेकिन अब 100% टैरिफ के बाद वही सामान 200 डॉलर का हो जाएगा। इससे इंजीनियरिंग निर्यात में 30 से 40 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। इसी प्रकार, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान पर अब तक महज 0.41% टैरिफ लगता था, जिससे 100 डॉलर का स्मार्टफोन 100.41 डॉलर में मिलता था, जो अब बढ़कर सीधे 200 डॉलर का हो जाएगा।
फार्मा सेक्टर में भी स्थितियां बेहद नाजुक हो सकती हैं। भारत से अमेरिका जाने वाली 92 हजार करोड़ रुपये की दवाओं पर पहले शून्य प्रतिशत टैरिफ था। 100% टैरिफ लागू होने से वियतनाम जैसे अन्य निर्यातक देश भारतीय कारोबारियों को कड़ी चुनौती देंगे और भारतीय दवा उद्योग की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। इसके अतिरिक्त, व्यापारियों में इस बात को लेकर भी भारी भ्रम है कि जो ऑर्डर पहले ही लिए जा चुके हैं या जो माल रास्ते में है, उनका क्या होगा।
नए बाजारों की तलाश और अमेरिका पर निर्भरता घटाने का सुझाव
CTI ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में सुझाव दिया है कि भारत सरकार को तुरंत अन्य वैश्विक बाजारों की ओर रुख करना चाहिए। ब्रिटेन, जर्मनी, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भारतीय इंजीनियरिंग गुड्स और अन्य उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसलिए भारत को इन देशों में निर्यात के नए अवसर तलाशने चाहिए। साथ ही, अमेरिका से भारत आने वाले सामान जैसे - महंगे रत्न, मिनरल्स, मेटल्स, हवाई जहाज के उपकरण, इलेक्ट्रिकल और ऑप्टिकल उपकरण, प्लास्टिक, केमिकल और ड्राईफ्रूट्स आदि के लिए वैकल्पिक देशों की पहचान की जानी चाहिए, ताकि अमेरिका पर निर्भरता कम की जा सके।
अमेरिका को सिखाएं सबक: 100% जवाबी टैरिफ की मांग
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल, महासचिव गुरमीत अरोड़ा और रमेश आहूजा ने स्पष्ट कहा है कि भारत को अमेरिकी दबाव या धमकी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है। CTI ने मांग की है कि यदि अमेरिका भारत से जाने वाले सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू करता है, तो भारत सरकार को भी अमेरिकी आयात पर तुरंत 100 प्रतिशत जवाबी (रिएक्टिव) टैरिफ लगाना चाहिए। व्यापारिक संगठन का मानना है कि भारतीय उद्योगों के हितों की रक्षा और अमेरिकी मनमानी का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए कड़ा रुख अपनाना बेहद जरूरी है।
