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बक्सर में सुलझी 131 फीट ऊंचे मोबाइल टावर की चोरी की गुत्थी, पुलिस जांच में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

बक्सर के डुमरांव में 131 फीट ऊंचे मोबाइल टावर की कथित चोरी का मामला जांच में नया मोड़ ले आया है। पुलिस के अनुसार, टावर को अज्ञात चोरों ने नहीं बल्कि जमीन मालिक ने अनुबंध समाप्त होने के बाद कथित रूप से कबाड़ में बेच दिया था। मामले में जनरेटर बरामद कर लिया गया है, जबकि अन्य हिस्सों की तलाश और कानूनी कार्रवाई जारी है।

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सुलझ गया मोबाइल टावर की चोरी का मामला (प्रतीकात्मक फोटो)

Buxar Mobile Tower Theft Case: बिहार के बक्सर के डुमरांव नगर में 131 फीट ऊंचे मोबाइल टावर के कथित चोरी मामले में पुलिस ने जांच के बाद चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, यह मामला सामान्य चोरी का नहीं बल्कि जमीन के मालिक द्वारा टावर को कबाड़ के रूप में बेचने से जुड़ा है। दरअसल, जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के भूमि एवं संचालन पदाधिकारी बैद्यनाथ ओझा ने डुमरांव थाना में शिकायत दर्ज कराई थी कि लाखों रुपये मूल्य का मोबाइल टावर, 15 केवीए क्षमता का डीजल जनरेटर और अन्य तकनीकी उपकरण स्थल से गायब हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामने आया कि जिस जमीन पर टावर स्थापित था, उसके मालिक ने कथित रूप से टावर और उससे जुड़े सामान को एक कबाड़ी को बेच दिया था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामले से जुड़े कई अहम तथ्यों का खुलासा किया और बरामदगी अभियान चलाकर जनरेटर सहित अन्य सामान को भी अपने कब्जे में ले लिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की कानूनी जांच आगे बढ़ा रही है।

2010 में लगा था मोबाइल टावर

शिकायत में दावा किया गया था कि डुमरांव नगर के वार्ड संख्या-18 में स्थित कंपनी का 131 फीट ऊंचा मोबाइल टावर संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो गया है। इस मामले में जमीन के मालिक हरेनाथ यादव ने बताया कि उनकी जमीन पर साल 2010 में मोबाइल टावर लगाया गया था। कंपनी के साथ हुआ अनुबंध वर्ष 2022 तक प्रभावी था, लेकिन उन्हें वर्ष 2017 के बाद से किराए का भुगतान नहीं मिला।

SIT का गठन कर मामले की जांच के निर्देश

वहीं, स्थानीय निवासी विनोद कुमार के अनुसार करीब 20 दिन पहले कुछ लोग दिन के समय टावर को खोलकर ले जा रहे थे। जब उनसे इस बारे में पूछताछ की गई तो उन्होंने खुद को कंपनी का कर्मचारी बताया। हालांकि बाद में जानकारी मिली कि टावर को अवैध रूप से हटाया गया था और उसके गायब होने की बात सामने आई। मामले की संवेदनशीलता और करोड़ों रुपये के उपकरणों के कथित रूप से गायब होने को देखते हुए पुलिस अधीक्षक शुभम आर्य ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर पूरे प्रकरण की गहन जांच के निर्देश दिए थे।

कंपनी की ओर से नहीं लिया गया कोई ठोस कदम

डुमरांव के एसडीपीओ पोलस्त कुमार ने बताया कि मामले की जांच के दौरान जमीन मालिक की भूमिका संदिग्ध पाई गई। पूछताछ में सामने आया कि मोबाइल टावर लगाने को लेकर कंपनी और भूस्वामी के बीच हुआ अनुबंध वर्ष 2022 में समाप्त हो चुका था। इसके बाद भूस्वामी लगातार कंपनी को जमीन खाली करने के लिए नोटिस भेज रहा था, लेकिन कंपनी की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पुलिस जांच में यह भी पता चला कि कंपनी द्वारा जमीन खाली नहीं किए जाने से नाराज भूस्वामी ने अपने स्तर पर टावर को हटवाने का फैसला किया। आरोप है कि उसने टावर को खुलवाकर उसके हिस्सों को एक कबाड़ी को बेच दिया, ताकि जमीन का उपयोग अन्य कार्यों के लिए किया जा सके।

कबाड़ी की तलाश भी जारी

एसडीपीओ के मुताबिक, जमीन के मालिक की निशानदेही पर पुलिस ने टावर से जुड़ा 15 केवीए क्षमता का जनरेटर ब्लॉक क्षेत्र के पास एक रेस्टोरेंट के सामने से बरामद कर लिया है। वहीं, टावर के बाकी उपकरणों और ढांचे की बरामदगी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस संबंधित कबाड़ी की तलाश में भी जुटी हुई है। उन्होंने बताया कि मामले में आरोपी भूस्वामी को रिमांड पर लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और जल्द ही पूरे घटनाक्रम से जुड़े सभी तथ्यों का खुलासा कर दिया जाएगा।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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