Bihar News: बिहार में चोरों के अतरंगी कारनामों की फेहरिस्त में एक और हैरान कर देने वाला मामला जुड़ गया है। बक्सर जिले के डुमरांव कस्बे से एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन से लेकर आम लोगों तक का सिर चकरा दिया है। यहां चोरों ने किसी घर या दुकान में नहीं चोरी की, बल्कि 40 मीटर यानी करीब 130 फीट ऊंचे पूरे मोबाइल टावर को ही गायब कर दिया। चोर सिर्फ टावर ही नहीं, बल्कि उसके साथ लगा 15 KVA का भारी-भरकम डीजल जेनरेटर और अन्य जरूरी टेलीकॉम उपकरण भी उखाड़ ले गए। इस अजीबोगरीब चोरी का खुलासा तब हुआ जब टेलीकॉम कंपनी की टीम बंद पड़े टावर को दोबारा सक्रिय करने के लिए मौके पर मुआयना करने पहुंची।
जब टावर की जगह मिला सिर्फ 'खाली प्लॉट'
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब जीटीएल (GTL) इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के अधिकारी और तकनीकी टीम वार्ड नंबर 18 स्थित परसमनिया क्षेत्र के पास साइट निरीक्षण करने पहुंचे। यह टावर पिछले कुछ सालों से तकनीकी कारणों की वजह से गैर-ऑपरेटिव यानी बंद पड़ा था। कंपनी की टीम जब मौके पर पहुंची, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जहां एक विशालकाय मोबाइल टावर खड़ा होना चाहिए था, वहां केवल एक खाली प्लॉट नजर आ रहा था। कंपनी के लैंड एंड ऑपरेशंस ऑफिसर बैजनाथ ओझा ने तुरंत इस मामले की शिकायत डुमरांव थाने में दर्ज कराई।
भू-मालिक और कंपनी के बीच विवाद
पुलिस शिकायत के अनुसार, यह टावर वार्ड नंबर 18 के निवासी हरिनाथ यादव की निजी जमीन पर लगाया गया था। इस हाई-प्रोफाइल चोरी में जब जमीन मालिक से पूछताछ की गई, तो एक अलग ही कहानी सामने आई। जमीन मालिक हरिनाथ यादव ने बताया कि कंपनी के साथ उनका एग्रीमेंट साल 2022 में ही खत्म हो चुका है। इसके अलावा, कंपनी ने साल 2017 के बाद से उन्हें जमीन का कोई भुगतान नहीं किया था। बकौल हरिनाथ, उन्होंने एग्रीमेंट खत्म होने के बाद कंपनी को कई कानूनी नोटिस भी भेजे, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
हालांकि, हरिनाथ यादव ने टावर के गायब होने में अपनी किसी भी भूमिका से साफ इनकार किया है। कंपनी के मुताबिक, 2 जून को जब उनकी टीम ने शुरुआती तौर पर क्षेत्र का दौरा किया था, तब तक टावर चोरी होने की बात पूरी तरह साफ हो चुकी थी।
बैटरी-केबल नहीं, पूरा टावर गायब; संगठित गिरोह का हाथ होने की आशंका
इस घटना से स्थानीय लोग भी बेहद अचंभित हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मोबाइल टावरों से बैटरी, कीमती उपकरण या केबल चोरी होना तो आम बात है, लेकिन इतने बड़े ढांचे का नामोनिशान मिट जाना किसी आम चोर के बस की बात नहीं है। शुरुआती जांच और विशेषज्ञों के मुताबिक, 40 मीटर ऊंचे लोहे के टावर को काटने, उसे क्रेन की मदद से ढहाने और ट्रकों में लादकर ले जाने के लिए भारी मशीनों, दर्जनों मजदूरों की जरूरत पड़ी होगी। यह काम बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया है और इसे अंजाम देने में कई दिनों का समय लगा होगा। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि इतना बड़ा कंक्रीट और लोहे का ढांचा हटाने के दौरान किसी की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी?
आवेदन मिला है, मामला संदेहास्पद: डुमरांव डीएसपी
शुक्रवार को मामले की पुष्टि करते हुए डुमरांव के अनुमंडल पुलिस अधिकारी (SDPO/DSP) पोलस्त कुमार ने बताया कि कंपनी की तरफ से लिखित आवेदन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि पहली नजर में यह पूरा मामला बेहद संदेहास्पद और पेचीदा प्रतीत हो रहा है। पुलिस जमीन मालिक और कंपनी के पुराने विवाद के एंगल सहित सभी संभावित पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है, ताकि सच सामने आ सके और दोषियों की पहचान की जा सके।
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