Lucknow News: उत्तर प्रदेश में भाजपा आज यानी मंगलवार 3 नवंबर से ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा की शुरुआत करने जा रही है। पहले दिन राजधानी लखनऊ और बरेली में पदयात्राएं निकाली जाएंगी। इनमें केंद्रीय मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ संगठनात्मक पदाधिकारियों तक की भागीदारी प्रस्तावित है। भाजपा इन पदयात्राओं के जरिए सड़कों पर उतरकर विपक्ष के नैरेटिव का जवाब देने की तैयारी में है।
पार्टी की ओर से तय कार्यक्रम के मुताबिक, आज लखनऊ और बरेली से इस अभियान का आगाज होगा। इसके बाद कल यानी बुधवार 4 और गुरुवार 5 नवंबर को राज्य के दूसरे प्रमुख शहरों में भी पदयात्राएं निकाली जाएंगी। इन कार्यक्रमों में पार्टी के राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के नेता शामिल होंगे।
तीन दिन में छह शहरों में होंगी पदयात्राएं
भाजपा के कार्यक्रम के मुताबिक, लखनऊ में पदयात्रा लोकभवन से शुरू होकर परिवर्तन चौक तक पहुंचेगी। इसमें केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह शामिल होंगे। पार्टी ने लखनऊ में 30 हजार से ज्यादा लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा है।
वहीं, बरेली में केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। यहां कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है।
कल तीन शहरों में कार्यक्रम
पदयात्रा के दूसरे दिन यानी बुधवार 4 नवंबर को गोरखपुर, प्रयागराज और कानपुर में भाजपा नेता सड़कों पर उतरेंगे। गोरखपुर में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, CM Yogi Adityanath और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी पदयात्रा में शामिल होंगे। प्रयागराज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और कानपुर में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक नेतृत्व करेंगे।
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गुरुवार को गाजियाबाद में पदयात्रा
अभियान के अंतिम दिन 5 नवंबर को पश्चिम क्षेत्र की पदयात्रा गाजियाबाद में आयोजित होगी। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल होंगे। इसके साथ ही प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में भाजपा का यह तीन दिवसीय अभियान पूरा होगा।
राजनीतिक लिहाज से इन पदयात्राओं को भाजपा के जनसंपर्क अभियान के साथ विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। पार्टी का कहना है कि अभियान के जरिए वह विपक्ष के राजनीतिक एजेंडे और कथित दोहरे मापदंड को जनता के बीच रखेगी। वहीं, अलग-अलग शहरों में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी से संगठन की सक्रियता और कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।
