नौकरी बदलने या लंबे समय तक काम से ब्रेक लेने के दौरान कई कर्मचारियों का पैसा पुराने प्रोविडेंट फंड (PF) खाते में छूट जाता है। ऐसे खातों में छोटी रकम होने पर लोग उसे निकालने की प्रक्रिया टाल देते हैं। अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने ऐसी रकम तक पहुंच आसान बनाने के लिए नई सुविधा शुरू की है। इसके तहत पात्र निष्क्रिय और पुराने पीएफ खातों में 1,000 रुपये तक की राशि का सेटलमेंट अपने आप किया जाएगा। यानी योग्य खाताधारकों को अलग से क्लेम दाखिल नहीं करना होगा।
किन खातों को मिलेगा फायदा?
इस पहल का लाभ उन्हीं इनऑपरेटिव खातों को मिलेगा, जिनमें 1,000 रुपये या उससे कम बैलेंस है और जो आधार से वेरिफाइड हैं। सेटलमेंट से पहले EPFO जरूरी पहचान और बैंक खाते का वेरिफिकेशन करेगा। जांच पूरी होने के बाद पात्र सदस्य या लाभार्थी के खाते में रकम ट्रांसफर की जाएगी। श्रम मंत्रालय के मुताबिक, इससे करीब एक लाख खातों में जमा लगभग 5 करोड़ रुपये लोगों तक पहुंचने की उम्मीद है।
ध्यान रहे कि 1,000 रुपये की सीमा सिर्फ ऑटोमैटिक सेटलमेंट सुविधा के लिए है। इससे अधिक रकम वाले पुराने PF खाते इसके दायरे में नहीं आते। ऐसे खातों के लिए सामान्य निकासी या ट्रांसफर की प्रक्रिया अपनानी होगी। हालांकि नौकरी बदलने के बाद पुराने खाते में योगदान बंद हो जाना भर उसे इनऑपरेटिव नहीं बनाता।
कब इनऑपरेटिव होता है PF खाता?
EPF स्कीम, 1952 के तहत आम तौर पर सदस्य के 55 साल की उम्र पूरी करने या रिटायर होने (जो भी बाद में हो) के बाद लगातार तीन साल तक योगदान नहीं आने पर खाता इनऑपरेटिव माना जाता है। इसलिए नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों को पुराने PF खाते का पैसा नए खाते में ट्रांसफर कराने की सलाह दी जाती है, ताकि रकम अलग-अलग खातों में न पड़ी रहे।
WhatsApp पर भी मिलेगी PF की जानकारी
इसके अलावा, EPFO ने एक और सुविधा शुरू की है। अब सदस्य ईपीएफओ की वेरिफाइड वॉट्सऐप सर्विस से पीएफ बैलेंस, पिछले पांच ट्रांजैक्शन और पासबुक की जानकारी देख सकेंगे। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) से जुड़ी जरूरतों के लिए गाइड भी किया जाएगा। हालांकि, वॉट्सऐप पर निकासी, ट्रांसफर या क्लेम दाखिल करने जैसी सभी सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
दोनों सुविधाओं की शुरुआत 1 नवंबर को EPFO के 74वें स्थापना दिवस पर श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने की। मंत्रालय के अनुसार, EPFO के पास 8 करोड़ से अधिक सदस्यों का करीब 32 लाख करोड़ रुपये का फंड है।
