UP News: उत्तर प्रदेश में नए यूजीसी (UGC) नियमों को लेकर असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। पहले प्रशासनिक स्तर पर इसका विरोध सामने आया और अब सत्तारूढ़ दल के संगठन से भी नाराजगी की आवाज उठने लगी है। इसी कड़ी में रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट से बीजेपी किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
बीजेपी किसान मोर्चा नेता का इस्तीफा
रायबरेली जिले की सलोन विधानसभा सीट से भाजपा किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने यह इस्तीफा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सौंपा। अपने पत्र में त्रिपाठी ने नई यूजीसी नीतियों को “काला कानून” बताते हुए कहा कि यह कानून समाज को बांटने वाला और खतरनाक है। उन्होंने लिखा कि सामान्य वर्ग के बच्चों के खिलाफ लाए गए इस तरह के आरक्षण प्रावधान उनके आत्मसम्मान और विचारधारा के खिलाफ हैं, इसलिए वह इस बिल का समर्थन नहीं कर सकते।
सिटी मजिस्ट्रेट के आरोपों पर प्रशासन का पलटवार
श्याम सुंदर त्रिपाठी का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब हाल ही में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट आलंकार अग्निहोत्री ने भी यूजीसी के नए नियमों का विरोध करते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने 26 जनवरी को अपने पद से इस्तीफा देते हुए उत्तर प्रदेश में “ब्राह्मण विरोधी अभियान” चलने का आरोप लगाया था। हालांकि, बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। डीएम सिंह ने कहा कि सिटी मजिस्ट्रेट के आरोप तथ्यों के गलत प्रस्तुतीकरण पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संवाद को सनसनीखेज आरोपों में बदलना उचित नहीं है।

श्याम सुंदर त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दिया था इस्तीफा (ANI)
अग्निहोत्री पर कार्रवाई
उत्तर प्रदेश सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। उन्हें फिलहाल शामली जिले के जिलाधिकारी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
विशेष सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जांच पूरी होने तक अग्निहोत्री वहीं अटैच रहेंगे और विभागीय कार्रवाई के तहत अलग से चार्जशीट भी जारी की जाएगी।
क्यों विवादों में हैं नई यूजीसी गाइडलाइंस
13 जनवरी को जारी की गई यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की नई नियमावली का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना बताया गया है। इसके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में विशेष शिकायत समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग सिस्टम बनाने का प्रावधान किया गया है, खासकर एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतों के लिए। हालांकि, सामान्य वर्ग के छात्रों और संगठनों का आरोप है कि यह ढांचा उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकता है, जिससे शैक्षणिक माहौल खराब होगा।
