मुंबई : भिवंडी में गुरुवार देर रात एक चार मंजिला आवासीय इमारत (कोहिनूर बिल्डिंग) के ढहने से बड़ा हादसा हो गया। इस त्रासदी में कम से कम 10 लोगों की जान चली गई। शुक्रवार शाम तक बचाव दल ने मलबे से सभी 10 शव बरामद कर लिए, जिसके बाद राहत और बचाव अभियान समाप्त कर दिया गया है। हादसे में छह लोग घायल भी हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात है कि इस इमारत को साल 2020 में ही खतरनाक घोषित कर दिया गया था। लेकिन प्रशासन ने इसको नजर अंदाज किया, जिसका हश्र 10 लोगों की जान है।
इस पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि अधिकारियों को ’खतरनाक’ इमारतों से लोगों को समझा-बुझाकर बाहर निकालना चाहिए और जरूरत पड़ने पर जान बचाने के लिए बल का इस्तेमाल करना चाहिए। फडणवीस ने यहां संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि भिवंडी की इमारत को सी 1 श्रेणी की इमारत के तौर पर वर्गीकृत किया गया था, जिसका मतलब है कि यह रहने के लिए सुरक्षित नहीं थी।
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फडणवीस ने दी हादसे की जांच
उन्होंने कहा कि यह बहुत दुखद है। यह सी 1 श्रेणी की इमारत थी। स्थानीय नगर आयुक्त ने मुझे बताया कि लगभग 25 लोगों को पहले ही बाहर निकाल लिया गया था। इसके बावजूद ठेकेदार ने मरम्मत का काम जारी रखा, जिसके बाद यह घटना हुई। फडणवीस ने इस हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और कहा कि राज्य सरकार मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देगी।
उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त को ठेकेदार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है। वर्गीकरण के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सी 1 श्रेणी की इमारत को खतरनाक और रहने के लिए अनुपयुक्त माना जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन महत्वपूर्ण है। जान बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सी 1 श्रेणी की इमारतों में रहने वाले लोगों को समझा-बुझाकर और सख्ती के साथ बाहर निकाला जाना चाहिए। अगर जरूरत हो, तो ऐसी जर्जर इमारतों से उन्हें बाहर निकालने के लिए कुछ बल का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, अदालत के आदेशों के अनुसार कुछ प्रतिबंध हैं। फिर भी मुझे लगता है कि जान बचाना भी महत्वपूर्ण है।
