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Ceuta Crisis Explained: स्पेन के छोटे से शहर ने क्यों बढ़ा दी यूरोप की चिंता, मोरक्को से हजारों लोगों की एंट्री के पीछे क्या है कहानी?

आखिर सियूटा में ऐसा क्या है कि हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर वहां पहुंचना चाहते हैं? यह छोटा-सा शहर बार-बार यूरोप के सबसे बड़े माइग्रेशन संकट का केंद्र क्यों बन जाता है? और इस पूरे घटनाक्रम का पश्चिमी सहारा विवाद, यूरोपीय राजनीति से क्या संबंध है? आज हम आपको इन्हीं सब मुद्दों के बारे में विस्तार से बताएंगे...

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सियूटा में अभूतपूर्व प्रवासी संकट (फोटो- AI)

यूरोप और अफ्रीका के बीच सिर्फ 14 किलोमीटर चौड़ा जिब्राल्टर जलडमरूमध्य (Strait of Gibraltar) दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में गिना जाता है। इसी जलडमरूमध्य के किनारे अफ्रीकी महाद्वीप में बसा एक छोटा-सा शहर है- सियूटा (Ceuta)। इस शहर की आबादी महज 85 हजार के आसपास है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इसकी अहमियत इतनी ज्यादा है कि यहां होने वाली हर हलचल पूरे यूरोप की सुरक्षा, प्रवासन नीति और कूटनीति को प्रभावित करती है। इसी शहर में पिछले 24 घंटो में कुछ ऐसा हुआ है, जिसने इसे वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। ये तब हुआ जब मोरक्को की ओर से हजारों लोग अचानक इसकी सीमा की ओर बढ़ने लगे। कुछ लोग समुद्र के रास्ते तैरकर स्पेनिश क्षेत्र में पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, जबकि कई समूहों ने सीमा पर लगी ऊंची बाड़ को पार करने का प्रयास किया। हालात इतने तेजी से बिगड़े कि स्पेन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े और यूरोपीय संघ (EU) ने इसे पूरे यूरोप की बाहरी सीमा पर पैदा हुआ गंभीर संकट बताया।

ऐसे में सवाल यह है कि आखिर सियूटा में ऐसा क्या है कि हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर वहां पहुंचना चाहते हैं? यह छोटा-सा शहर बार-बार यूरोप के सबसे बड़े माइग्रेशन संकट का केंद्र क्यों बन जाता है? और इस पूरे घटनाक्रम का पश्चिमी सहारा विवाद, यूरोपीय राजनीति से क्या संबंध है? आज हम आपको इन्हीं सब मुद्दों के बारे में विस्तार से बताएंगे...

सबसे पहले बात ताजा मामले की?

स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी स्वायत्त शहर सियूटा में पिछले 24 घंटे के दौरान अभूतपूर्व प्रवासी संकट देखने को मिला। क्षेत्रीय सरकार के प्रमुख जुआन जेसुस विवास के अनुसार, करीब 60,000 प्रवासी मोरक्को से सीमा पार कर सियूटा में दाखिल हो गए, जो शहर की कुल आबादी का लगभग 70 प्रतिशत है। इस अफरातफरी के दौरान कम से कम 34 प्रवासियों की मौत हो गई। इनमें कई लोग समुद्र पार करते समय डूब गए, जबकि कुछ की मौत सीमा पर लगी बैरिकेड पार करने की कोशिश में मची भगदड़ में हुई। बड़ी संख्या में घायल होने की भी खबर है। जुआन जेसुस विवास ने इसे पूरी तरह से असहनीय करार दिया है। उन्होंने कहा कि शहर के संसाधन इतने बड़े पैमाने पर आए लोगों को संभालने में सक्षम नहीं हैं। वहीं, स्पेन ने इस घुसपैठ को सीमा उल्लंघन ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला करार दिया। साथ ही स्पेन ने घुसपैठियों को रोकने के लिए सेना, गार्डिया सिविल (Guardia Civil) तथा अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिए हैं। इसके साथ ही यूरोपीय आयोग ने भी इसकी निंदा की है। संघ ने साफ कहा कि सेउटा केवल स्पेन की सीमा नहीं बल्कि पूरे यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा है। वहीं, इस घटना के बाद स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज भी सियूटा पहुंचे। उन्होंने इस तरह की घुसपैठ को 'स्पेन की क्षेत्रीय संप्रभुता का उल्लंघन' करार दिया है।

अब बात इस घुसपैठ की वजह की

सियूटा में मोरक्को की ओर से ये घुसपैठ अचानक नहीं हुई है। स्पेन और सियूटा प्रशासन का मानना है कि इस संकट की बड़ी वजह हाल में स्पेन का सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला है। अदालत ने कहा था कि समुद्र के रास्ते सियूटा पहुंचने वाले प्रवासियों को तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता, जबकि जमीन या सीमा बाड़ पार करने वालों को तत्काल वापस भेजने का प्रावधान लागू रहता है।

इस फैसले को लेकर प्रधानमंत्री सांचेज ने कहा कि मानव तस्करों ने इस फैसले को गलत तरीके से प्रचारित किया और यह अफवाह फैला दी कि समुद्र के रास्ते पहुंचने वाले लोगों को स्पेन में रहने दिया जाएगा। इसी गलतफहमी के कारण हजारों लोग एक साथ सीमा की ओर बढ़ गए। हालांकि, मोरक्को के कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अधिकांश प्रवासियों को अदालत के इस फैसले की जानकारी ही नहीं थी, इसलिए इसके पीछे अन्य सामाजिक और आर्थिक कारण भी हो सकते हैं।

सियुटा में मोरक्को से जबरन घुसे हजारों लोग।

सियुटा में मोरक्को से जबरन घुसे हजारों लोग। (फोटो- PTI)

यूरोप में भी बढ़ा राजनीतिक विवाद

इस घटना के बाद स्पेन की प्रवासन नीति पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार की उदार नीतियों ने अवैध प्रवास को बढ़ावा दिया है। वहीं, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भी इस संकट पर चिंता जताते हुए सीमा सुरक्षा कड़ी करने की बात कही। फ्रांस ने भी स्पेन से लगने वाली अपनी सीमा पर जांच बढ़ाने की घोषणा की है।हालांकि, स्पेन सरकार ने साफ किया कि यह संकट प्रवासियों को वैध दर्जा देने की उसकी नीति की वजह से नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या और मानव तस्करों द्वारा फैलाई गई अफवाहों के कारण पैदा हुआ है।

अब बात सियूटा की, आखिर अफ्रीका का शहर कैसे है यूरोप का हिस्सा?

अगर कोई पहली बार सियूटा के बारे में सुने तो उसे यह बात अजीब लग सकती है कि अफ्रीका में स्थित कोई शहर यूरोप का हिस्सा कैसे हो सकता है। लेकिन यही इस पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह है। भौगोलिक रूप से देखें को सियूटा उत्तरी अफ्रीका में स्थित है और इसकी सीमा सीधे मोरक्को से लगती है, लेकिन प्रशासनिक रूप से यह स्पेन का स्वायत्त शहर है। यहां स्पेन का संविधान लागू होता है, यूरो मुद्रा चलती है और यहां के नागरिक यूरोपीय संघ के नागरिक माने जाते हैं। स्पेन के पास अफ्रीका में ऐसे दो शहर हैं, सेउटा और मेलिला (Melilla)। यही दोनों शहर यूरोप और अफ्रीका के बीच सबसे संवेदनशील सीमाएं माने जाते हैं। इनकी वजह से स्पेन की सीमा सीधे अफ्रीका से जुड़ती है और यही कारण है कि ये शहर अवैध प्रवासन के सबसे बड़े एंट्री प्वाइंट बन चुके हैं।

दुनिया की सबसे सुरक्षित सीमाओं में से एक

सियुटा की सीमा पर छह से दस मीटर ऊंची दोहरी स्टील फेंस, थर्मल कैमरे, ड्रोन, मोशन सेंसर और चौबीसों घंटे सुरक्षा बल तैनात रहते हैं। इसके बावजूद लोग कभी समुद्र के रास्ते, कभी रबर बोट से और कभी सामूहिक रूप से बाड़ पार करने की कोशिश करते हैं।

स्पेन में हजारों अवैध प्रवासियों की घुसपैठ

स्पेन में हजारों अवैध प्रवासियों की घुसपैठ (फोटो- PTI)

600 साल पुराना है सियुटा का इतिहास

सियुटा का इतिहास आधुनिक यूरोप से भी पुराना है। वर्ष 1415 में पुर्तगाल ने इस शहर पर कब्जा किया था। उस समय यह उत्तरी अफ्रीका में व्यापार और सैन्य गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र था। बाद में 1580 में स्पेन और पुर्तगाल एक ही राजवंश के अधीन आ गए। जब 1640 में पुर्तगाल दोबारा स्वतंत्र हुआ, तब सियुटा के स्थानीय लोगों ने स्पेन के साथ बने रहने का फैसला किया। 1668 की लिस्बन संधि (Treaty of Lisbon) के बाद आधिकारिक रूप से यह शहर स्पेन का हिस्सा बन गया। यानी पिछले साढ़े तीन सौ वर्षों से इस शहर का प्रशासन स्पेन के हाथों में है। यही कारण है कि स्पेन इसे अपना अभिन्न हिस्सा मानता है।

...तो फिर मोरक्को आखिर सियुटा पर दावा क्यों करता है?

वहीं, 1956 में स्वतंत्रता मिलने के बाद से ही मोरक्को यह कहता रहा है कि सियुटा और मेलिला उसकी ऐतिहासिक तथा भौगोलिक भूमि हैं। उसका तर्क है कि अफ्रीकी महाद्वीप में स्थित इन शहरों पर किसी यूरोपीय देश का अधिकार नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर स्पेन का कहना है कि ये दोनों शहर उसके संवैधानिक ढांचे का हिस्सा हैं और यहां रहने वाले नागरिक लोकतांत्रिक तरीके से स्पेन के साथ रहना चाहते हैं। यही वजह है कि यह विवाद कभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ और समय-समय पर दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा करता रहा है।

स्पेन में प्रवासियों का सैलाब

स्पेन ने उतारी सेना

यूरोप में घुसने का सबसे आसान दरवाजा क्यों है सियुटा?

दरअसल, अफ्रीका के कई देशों में गरीबी, बेरोजगारी, गृहयुद्ध, राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है। ऐसे में लाखों लोग बेहतर जीवन की तलाश में यूरोप जाना चाहते हैं, लेकिन यूरोप की सीमाएं बेहद सख्त हैं। ऐसे में सियुटा और मेलिला उनके लिए उम्मीद का सबसे बड़ा रास्ता बन जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति इन शहरों में प्रवेश कर जाता है तो वह तकनीकी रूप से यूरोपीय संघ की सीमा के भीतर पहुंच जाता है। इसी वजह से हर साल हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इन सीमाओं को पार करने की कोशिश करते हैं।

माइग्रेशन का मामला या राजनीति भी जुड़ी है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि सेउटा का संकट केवल मानवीय नहीं बल्कि राजनीतिक भी है। पिछले कुछ वर्षों में "Migration Diplomacy" शब्द काफी चर्चा में आया है। इसका मतलब है कि प्रवासन और सीमा नियंत्रण को कूटनीतिक दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल करना। 2021 में भी ऐसा ही संकट देखने को मिला था। उस समय स्पेन ने पश्चिमी सहारा के स्वतंत्रता समर्थक नेता ब्राहिम गाली को इलाज के लिए अपने यहां आने दिया था। इससे नाराज मोरक्को ने सीमा नियंत्रण कमजोर कर दिया और कुछ ही घंटों में करीब दस हजार लोग सियुटा पहुंच गए। उस घटना ने पूरे यूरोप को हिला दिया था।

पश्चिमी सहारा विवाद क्यों बार-बार सामने आता है?

मोरक्को और स्पेन के रिश्तों की सबसे संवेदनशील कड़ी पश्चिमी सहारा (Western Sahara) है। यह क्षेत्र कभी स्पेन का उपनिवेश था। 1975 में स्पेन के हटने के बाद मोरक्को ने इस पर नियंत्रण स्थापित कर लिया, लेकिन पोलिसारियो फ्रंट इसे स्वतंत्र देश बनाने की मांग करता है। संयुक्त राष्ट्र दशकों से इस विवाद का समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अब तक कोई स्थायी रास्ता नहीं निकल पाया है।

सियुटा में घुसपैठ यूरोपीय संघ के लिए इतना बड़ा संकट क्यों?

दरअसल, सियुटा केवल स्पेन की सीमा नहीं है, बल्कि यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा भी है। यहां अगर बड़ी संख्या में लोग यहां प्रवेश कर जाते हैं तो बाद में वे फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम, नीदरलैंड और अन्य यूरोपीय देशों तक पहुंच सकते हैं। 2015 के शरणार्थी संकट के बाद यूरोप पहले ही प्रवासन के मुद्दे पर राजनीतिक दबाव झेल चुका है। कई देशों में दक्षिणपंथी दलों का उभार भी इसी मुद्दे से जुड़ा रहा है। इसलिए यूरोपीय संघ किसी भी नए माइग्रेशन संकट को लेकर बेहद सतर्क रहता है। यही वजह है कि ब्रसेल्स लगातार स्पेन और मोरक्को दोनों के साथ सीमा सुरक्षा और प्रवासन प्रबंधन पर काम करता है।

Shiv Shukla
शिव शुक्लाauthor

शिव शुक्ला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में कार्यरत एक अनुभवी न्यूज राइटर हैं। छह वर्षों के पेशेवर अनुभव के साथ वे डिजिटल पत्रकारिता में तेज, सटीक और प्रभावी कंटेंट तैयार करने के लिए पहचाने जाते हैं। वह राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों, राजनीतिक घटनाक्रमों और गहन विश्लेषण पर विशेष पकड़ रखते हैं। ब्रेकिंग न्यूज कवरेज, लाइव ब्लॉग, एक्सप्लेनर और एनालिसिस आर्टिकल तैयार करने में उन्हें विशेषज्ञता हासिल है। शिव शुक्ला 8,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित कर चुके हैं। मजबूत न्यूज सेंस, विश्लेषण क्षमता और स्पष्ट लेखन शैली उनकी खासियत है। उन्हें नए स्थानों की यात्रा करना और किताबें पढ़ने का शौक है, जो उनकी लेखन शैली एवं दृष्टिकोण को और समृद्ध बनाता है।

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