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देश में ही बनेगी Bullet Train, BEML दो तीन महीने में शुरू करेगा काम; डेढ़ साल में होगी तैयार!

देश को अपनी पहली बुलेट ट्रेन के चलने का बड़ी ही बेसब्री से इंतजार है। अभी अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना पर काम चल रहा है। BEML को हाईस्पीड ट्रेनसेट बनाने का ऑर्डर दिया गया है, जो एक डिफेंस PSU है। BEML का कहना है कि सितंबर में कोच बनाने का काम शुरू हो जाएगा।

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BEML भारत में ही बनाएगा बुलेट ट्रेन

अहमदाबाद और मुंबई के बीच देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है। माना जा रहा है कि साल 2028 में बुलेट ट्रेन का सफर शुरू हो जाएगा और शुरुआत में यह गुजरात सेक्शन में ही चलेगी। इसके बाद साल 2030 में अहमदाबाद और मुंबई के पूरे 508 किमी के ट्रैक पर Bullet Train दौड़ने लगेगी। इस ट्रैक पर मेक इन इंडिया बुलेट ट्रेन दौड़ेगी। देश की सरकारी कंपनी BEML देश में ही बुलेट ट्रेन बनाएगी। इसी साल सितंबर में कंपनी बुलेट ट्रेन के प्रोटोटाइप का निर्माण शुरू कर देगी।

BEML बुलेट ट्रेन का निर्माण अपनी मौजूदा बेंगलुरु फैसिलिटी में करेगी। बता दें कि BEML ही देश में वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का भी निर्माण करती है। फाइलेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार BEML के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शांतनू रॉय ने उन्हें बताया कि BEML को दो हाई-स्पीड ट्रेनसेट्स के डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और कमीश्निंग का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है। पहली बुलेट ट्रेनसेट की टेस्टिंग अगले साल दिसंबर में हो सकती है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल हाई-स्पीड ट्रेनसेट के डिजाइन पर काम किया जा रहा है। डिजाइन का हिस्सा अगले दो-तीन महीने में पूरा हो जाएगा और इसके बाद सितंबर से इन ट्रेन सेट के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। इसमें बहुत सारी नई चीजों पर काम होगा और यात्रियों की सुरक्षा शीट मेटल वर्क, वेल्डिंग, सिग्नलिंग और ट्रेन कंट्रोल मैनेजमेंट सिस्टम (TCMS) के लिए नेक्स्ट लेवल की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होगा।

पिछले साल अक्टूबर में ही इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) ने BEML को दो हाई-स्पीड ट्रेन सेट बनाने का काम सौंपा था। भारत में ही बनने वाली यह दोनों ट्रेन सेट में 8-8 कोच होंगे और इन्हें 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल चल सकेंगी। हालांकि, ट्रेनों को 280 KMPL पर टेस्ट किया जाएगा, लेकिन इनकी ऑपरेशनल स्पीड 249 किमी प्रति घंटा ही रहेगी। BEML को मिले इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 866.87 करोड़ रुपये है और इस तरह से हर कोच की लागत करीब 27.86 करोड़ रुपये आएगी। जबकि जापान की शिंकनसेन बुलेट ट्रेन के एक कोच की कीमत 46-48 कोरोड़ रुपये होती है।

बेंगलुरु के इस डिफेंस PSU का दावा है कि उनकी हाई-स्पीड ट्रेनें अन्य सभी प्रतिस्पर्धियों से सस्ती हैं। स्थानीय उत्पादों और कंपोनेंट की वजह से ऐसा संभव हुआ है, जिसमें ट्रेन बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला स्टेनलेस स्टील भी शामिल है। रॉय ने बताया कि BEML हाई-स्पीड ट्रेन का पहला कोच वित्त वर्ष 2026 के अंत तक तैयार कर लेगा। जिसे इसके बाद कठिन टेस्ट से गुजारा जाएगा। उन्होंने कहा कि हाई-स्पीड ट्रेन में उसका वजह काफी अहम भूमिका निभाता है, इसे हल्का होना ही चाहिए। अलग-अलग हालात में कोट की ड्यूरेब्लिटी को टेस्ट करने के लिए कई टेस्ट किए जाएंगे। एक बार इस कोच को मान्यता मिल गई तो 15 कोच बनने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

दिसंबर 2026 तक पहला बुलेट ट्रेन प्रोटोटाइप ओसिलेशन टेस्ट और स्पीड टेस्ट के लिए तैयार हो जाएगी। जिसे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर असली हालात में टेस्ट किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चरल पाइपलाइन (NIP) के तहहत रेलवे मंत्रालय ने सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की पहचान की है, जिन पर आगे काम होगा। इसमें 813 किमी लंबा दिल्ली-वाराणसी, 872 किमी लंबा दिल्ली-अहमदाबाद, 767 किमी लंबा मुंबई-नागपुर, 671 किमी लंबा मुंबई-हैदराबाद, 464 किमी लंबा चेन्नई-बेंगलुरू-मैसूरू, 476 किमी लंबा दिल्ली-चंडीगढ़-अमृतसर और 752 किमी लंबा वाराणसी-हावड़ा रूट शामिल हैं। इनमें से कम से कम 4 के लिए DPR भी जमा हो चुकी है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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