मनाली-लेह हाईवे के रूप पर जम्मू-कश्मीर में पड़ने वाले गाटा लूप में 15000 फीट की ऊंचाई पर 10 किमी में फैले कुल 21 हेयरपिन बैंड हैं। छोटे-छोटे पत्थर, हल्की हवा, धूल भरी आंधी इस रूट को काफी कठिन बना देते हैं। यह लेह को जोड़ने वाला अहम रास्ता है। एडवेंचर के शौकीन बाइकर्स अक्सर इस रोड पर दिखते हैं।
हिमाचल प्रदेश की सतलुज वैली में मौजूद NH22 अस्थिर किनारों, ऊपर से गिरते पत्थरों और एवलांच के खतरे के लिए मशहूर है। यह सड़क स्पीति वैली और किन्नौर कैलाश के लिए जाती है। शानदार बगीचों और पुरानी मॉनेस्ट्री को देखने के लिए लोग अक्सर इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।
जम्मू-कश्मीर की इस सड़क को क्लिफहैंडर नाम से भी जाना जाता है। 114 किमी लंबा खड़ी चट्टानों के बीच से निकला यह रास्ता शानदार है। नीचे 1000 फीट गहरी खाई यहां आने वालों की परीक्षा लेती है। पांगी वैली के दूर-दराज के गांवों को जोड़ने के लिए यह अहम रास्ता है। थ्रिल के शौकीन इस रास्ते पर जाते हैं।
हिमाचल प्रदेश में समुद्र तल से 13,051 फीट की ऊंचाई पर यह दर्रा मनाली को लाहौल व स्पीति से जोड़ता है। खड़ी सड़क, भारी बर्फबारी और फॉग इस रास्ते को और भी डरावना बनाते हैं। यहां की खूबसूरती देखकर पर्यटक खिंचे चले आते हैं। यहां पर स्कीईंग जैसी एडवेंचर एक्टीविटीज भी होती हैं।
समुद्रतल से 11575 फीट की ऊंचाई पर जोजी-ला पास श्रीनगर को लेह से जोड़ता है। इस सिंगल लेन रोड में कई तीखे मोड और खड़ी चढ़ाई हैं। यहां अक्सर लैंडस्लाइड होता रहता है और सर्दियों में यह सड़क बर्फ से पूरी तरह से ढक जाती है। एडवेंचर के शौकीन और हाई-ऑल्टीट्यूड चैलेंज के शौकीन इस यहां आते हैं।
समुद्र तल से 17,688 फीट की ऊंचाई पर मौजूद चांग ला पास दुनिया की सबसे ऊंची मोटरेबल रोड्स में से एक है। यह रोड लेह को पैंगोंग लेक से जोड़ता है। पहाड़ी रास्ता, रास्ते भर जहां-तहां बर्फ, ऑक्सीजन की कमी और कठोर मौसम इसे एडवेंचर पसंद लोगों के लिए खास बनाता है।
यह दुबली-पतली सड़क तीखे मोडों पर खड़ी चढ़ाई लेते हुए महाराष्ट्र के माथेरन हिल स्टेशन तक जाती है। मानसून के दौरान यहां फिसल होती है और मडस्लाइड भी होता है। घने कोहरे के कारण विजिब्लिटी काफी कम हो जाती है। माथेरन में सड़क मार्ग से बाहरी गाड़ियां नहीं जा सकती। हालांकि, स्थानीय लोग मार्केट जाने के लिए इस रोड पर निर्भर हैं।