अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित अनियमितताओं के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान चढ़ावे की रकम के प्रबंधन और गणना प्रक्रिया में गंभीर खामियों के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि SIT जल्द ही अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने ट्रस्ट के पदाधिकारी के अयोध्या छोड़ने पर रोक लगाई है।
सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने की आशंका
बताया जा रहा है कि SIT ने 6 दिनों में करीब 150 लोगों से पूछताछ की। जिनमें ट्रस्ट के पदाधिकारी, प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी, SBI और TCS के कर्मचारी भी शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच में ट्रस्ट प्रबंधन से जुड़े 20 से 25 लोगों की संभावित लापरवाही या संलिप्तता की बात सामने आई है। जांच के दौरान कुछ सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की रकम के साथ छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं। वहीं कुछ फुटेज के डिलीट किए जाने की भी आशंका जताई गई है। SIT ने इस मामले में लापरवाही और संभावित साजिश इन दोनों पहलुओं से जांच की है।
चंपत राय भी सवालों के घेरे में
सूत्रों के अनुसार, जांच में ट्रस्ट के पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। महासचिव चंपत राय भी सवालों के घेरे में बताए जा रहे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। कुछ कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और बैंक कर्मियों के खिलाफ FIR भी दर्ज की जा सकती है। वहीं जांच पूरी होने तक कुछ पदाधिकारियों के अयोध्या छोड़ने पर रोक लगाने की बात भी सामने आई है।
SIT अपनी जांच रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन में बड़े बदलावों का सुझाव दे सकती है। जिसके तहत ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति की जाए। चढ़ावे का नियमित ऑडिट किया जाए। कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शी बनाया जाए और सिफारिश के आधार पर भर्तियां न हों। साथ ही बैंक गणना कार्यों में अपने नियमित कर्मचारियों को लगाए। इसके अलावा निगरानी तंत्र को मजबूत करने जैसे सुझाव शामिल हो सकते हैं।
