Agra News: प्रदेश के आगरा शहर ताज नगरी में एक ऐसी इमारत का निर्माण चल रहा है, जिसे 100 सालों में भी पूरा नहीं किया जा सका। बात अगर सुंदरता की जाए तो इसकी नक्काशी इतनी खूबसूरत है कि आप देखकर राजाओं के महल भी भूल जाएंगे। बताया गया कि दयालबाग के नाम से इसकी स्थापना बसंत पंचमी के दिन 20 जनवरी 1915 को शहतूत का पौधा लगाकर की गई थी। दयालबाग राधा स्वामी सत्संग का हेडक्वार्टर है और राधा स्वामी सत्संग के आठवें संत सतगुरु परम गुरु हुजूर सत्संगी साहब का निवास भी है।बता दें कि स्वामी बाग समाधि हुजूर स्वामी महाराज (सेठ शिवदयाल सिंह महाराज) का स्मारक है। यह आगरा के बाहरी क्षेत्र में स्थित है और इसे स्वामीबाग कहते हैं। बताया गया कि वे राधास्वामी मत के संस्थापक थे।
अनुयायियों के लिए पवित्र है समाधि
इस इमारत का निर्माण 1908 में शुरू हुआ था। खास बात यह है कि इसमें श्वेत संगमरमर का प्रयोग किया गया है। इसके अलावा नक्काशी व बेलबूटों के लिए रंगीन संगमरमर व कुछ अन्य रंगीन पत्थरों का प्रयोग किया गया है। इससे भी ज्यादा खास बात तो यह है कि ये नक्काशी व बेलबूट देखने में एकदम जीवंत लगते हैं। बताया जाता है कि इस इमारत का निर्माण कभी समाप्त नहीं होगा। इस इमारत को अनुयायी पवित्र भी मानते हैं। अनुयायी इस इमारत की खूबसुरती की चर्चा अपने सोशल मीडिया पर अकाउंट पर भी करते रहते हैं। अनुयायियों का कहना है कि जब भी इस इमारत का निर्माण पूरा होगा तो यह किसी जन्नत से कम नहीं होगी।
अभी कहां जा सकता है दूसरा ताज
अनुयायियों का कहना है कि ऐसे नक्काशियों का प्रयोग भारत भर में कहीं देखने को नहीं मिलता है। उनका कहना है कि इस इमारत का निर्माण पूरा होने पर एक नक्काशी कृत गुंबद शिखर के साथ एक महाद्वार होगा। अनुयायियों का यह भी कहना है कि इसे दूसरा ताज भी कहा जा सकता है। इस इमारत का निर्माण इतनी धीमी गति से चल रहा है कि इसमें कोई भी कमी नहीं छोड़ी जा रही है। छोटी-छोटी कमियों को सुधार कर भी इसे बेहद खूबसूरत इमारत बनाया जा रहा है। वहीं इस इमारत को देखने वालों का दिल खुश हो जाता है। अब आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि जब यह इमारत पूरी तरह तैयार हो जाएगी तो कितनी खूबसूरत लगेगी।
