पंजाब में चौथा मेगा पीटीएम; लाखों अभिभावकों और शिक्षकों की साझेदारी से संवर रहा बच्चों का भविष्य
- Edited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Dec 21, 2025, 03:59 PM IST
पंजाब में बच्चों के सर्वांगीण विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित चौथी मेगा अभिभावक–शिक्षक बैठक को राज्यभर में जबरदस्त समर्थन मिला। इस पहल ने अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद को मजबूत करने के साथ शिक्षा में साझेदारी की भावना को बढ़ावा दिया। बड़ी संख्या में अभिभावकों की भागीदारी ने सरकार की इस पहल को सफल और प्रभावी बनाया।
पंजाब के स्कूलों में चौथा मेगा पीटीएम (फोटो: ट्विटर - @harjotbains)
Punjab Mega PTM: बच्चों के समग्र विकास को मजबूत आधार देने और अभिभावकों व शिक्षकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने के लक्ष्य से पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित चौथे मेगा पीटीएम को राज्यभर में उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। इस पहल के तहत 23.30 लाख से अधिक अभिभावकों ने सक्रिय रूप से भागीदारी की। राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान पंजाब के स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने श्री आनंदपुर साहिब स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल (बालिकाएं) में आयोजित पीटीएम की अध्यक्षता की। वहीं आम आदमी पार्टी के पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने जिला होशियारपुर के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल पददी सूरा सिंह में मेगा पीटीएम में शिरकत कर अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद किया। इस मौके पर कई विधायकों के साथ-साथ स्कूल शिक्षा सचिव अनिंदिता मित्रा, एससीईआरटी की निदेशक किरण शर्मा, उपायुक्तों और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी राज्यभर के 7,500 से अधिक सरकारी स्कूलों का दौरा कर बैठकों की समीक्षा की और शैक्षणिक गतिविधियों का जायजा लिया।
मां–पिता की भागीदारी
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब का स्कूल शिक्षा विभाग निरंतर प्रगति के नए मुकाम हासिल कर रहा है। राज्य सरकार ऐसे कार्यक्रमों के जरिए “मां–पिता की भागीदारी” की अवधारणा को मजबूत कर अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल विकसित कर रही है। यह व्यापक पहल इस बात को रेखांकित करती है कि सरकार अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा प्रक्रिया में सक्रिय सहभागी बनाकर विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस उद्देश्य को साकार करने के लिए 40 हजार से अधिक शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया है। इनमें प्रत्येक सरकारी स्कूल से कम से कम एक शिक्षक शामिल है, जिन्हें ब्लॉक और क्लस्टर स्तर पर संरचित प्रशिक्षण देकर अभिभावक कार्यशालाएं आयोजित करने के लिए तैयार किया गया है।
बच्चों का शैक्षणिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास
शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षित शिक्षक संवाद सत्रों का नेतृत्व करते हैं, जबकि स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) के सदस्य अभिभावकों के साथ समन्वय, उन्हें जोड़ने और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। इस संयुक्त प्रयास से अभिभावकों को यह समझने में मदद मिलती है कि वे अपने बच्चों के शैक्षणिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास में किस प्रकार प्रभावी योगदान दे सकते हैं। यह पहल सभी शैक्षणिक स्तरों को समाहित करती है, जिसमें प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी तक के विद्यार्थियों के अभिभावक सक्रिय रूप से कार्यक्रम में भाग लेते हैं। इससे घर और स्कूल के बीच बेहतर तालमेल स्थापित हो रहा है, जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लाभकारी साबित हो रहा है।
1 से 1.5 घंटे की अभिभावक कार्यशाला
बैंस ने जानकारी दी कि इस पहल के तहत पहले 1 से 1.5 घंटे की अभिभावक कार्यशाला आयोजित की जाती है, जिसके बाद साझा कार्यशाला मॉडल और एसएमसी के नेतृत्व वाली बैठक योजनाओं के माध्यम से मेगा पीटीएम का आयोजन किया जाता है। उन्होंने बताया कि अभिभावकों को आवश्यक जानकारी देने के लिए विशेष हैंडआउट्स भी वितरित किए जाते हैं। इन कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई में अभिभावकों की भूमिका को और मजबूत करना, घर और स्कूल दोनों स्तरों पर सकारात्मक एवं सक्रिय सहभागिता को बढ़ावा देना तथा समग्र बाल विकास के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन समितियों के बीच सशक्त समन्वय स्थापित करना है।
अभिभावकों और विद्यालयों के बीच बेहतर संबंध
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह पहल बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र कल्याण को लेकर अभिभावकों और विद्यालयों के बीच जिम्मेदारियों की साझा समझ विकसित करने में सहायक सिद्ध हो रही है। इससे दोनों के बीच मजबूत और भरोसेमंद संबंध स्थापित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि घर और स्कूल के बीच बेहतर समन्वय पर केंद्रित इस प्रयास से विद्यार्थियों के शैक्षणिक परिणामों में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है। इसके तहत पढ़ाई में सुधार, स्कूल में नियमित उपस्थिति और बच्चों के भावनात्मक स्वास्थ्य को मजबूती मिलने जैसे लाभ सामने आने की संभावना है।
कैसे हो पीटीएम की शुरुआत?
बैंस ने बताया कि पीटीएम के दौरान संवाद की शुरुआत विद्यार्थियों के प्रयासों और अभिभावकों के सहयोग की सराहना से की जाती है, ताकि बातचीत का माहौल सकारात्मक और सम्मानजनक बना रहे। इससे बच्चों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलती है, क्योंकि चर्चा के दौरान शिक्षक और अभिभावक विद्यार्थियों की रुचियों, भविष्य की आकांक्षाओं और शैक्षणिक प्रगति पर विस्तार से विचार-विमर्श करते हैं और आपसी फीडबैक साझा करते हैं। बैंस ने इसे पंजाब के शिक्षा क्षेत्र में एक अभिनव कदम बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से अभिभावकों को न केवल शैक्षणिक लक्ष्यों की स्पष्ट जानकारी दी जाती है, बल्कि शिक्षा विभाग की आगामी योजनाओं से भी अवगत कराया जाता है। साथ ही अभिभावकों को यह मार्गदर्शन भी दिया जाता है कि वे घर पर बच्चों की पढ़ाई के लिए अनुकूल और सहायक वातावरण कैसे तैयार कर सकते हैं।
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