Vande Bharat Train: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 अगस्त को कटरा और अमृतसर को जोड़ने वाली नई वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाएंगे। उत्तर भारत में रेल संपर्क को बढ़ावा देने के लिए कटरा-अमृतसर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुबह 9 बजे कटरा रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाई जाएगी। यह ट्रेन देश के दो धार्मिक नगरों कटरा से माता वैष्णो देवी और अमृतसर स्वर्ण मंदिर को एक साथ जोड़ेगी। दोनों स्थानों के बीच यात्रा के समय में कमी आएगी, जिससे लोगों को काफी लाभ होगा और उनकी यात्रा भी आसान होगी।
बता दें कि इसके अलावा 10 अगस्त को दो और वंदे भारत चेयर कार का उद्घाटन किया जाएगा। इसमें एक वंदे भारत नागपुर को पुणे को जोड़ेगी और दूसरी वंदे भारत ट्रेन बेलगाम-बेंगलुरु को जोड़ेगी। यानी कुल मिलाकर 10 अगस्त को तीन वंदे भारत ट्रेन देश को समर्पित की जाएगी।
नागपुर से पुणे की दूरी वेदं भारत से कितनी घंटे में होगी पूरी
बता दें कि नागपुर-पुणे मार्ग पर वर्तमान में सबसे तेज ट्रेन दुरंतो एक्सप्रेस है। यह नागपुर से पुणे की दूरी सो 13 घंटे में पूरा करती है। लेकिन एक बार वंदे भारत के इस मार्ग पर शुरू होने के बाद 13 घंटे की यह दूरी केवल 10 घंटे में पूरी हो जाएगी। यानी वंदे भारत के शुरू होने के बाद यात्री 13 घंटे की बजाए 10 घंटे में अपने गंतव्य पर पहुंच पाएंगे।
सफल साबित हो रही हैं चेयर कार सेवा
वंदे भारत चेयर कार सेवाएं देश भर में बहुत लोकप्रिय हैं, जिनमें 144 से ज्यादा रूटों पर लगभग 100% सीटें भरी रहती हैं। इनकी सफलता को देखते हुए, भारतीय रेलवे अब वंदे भारत का स्लीपर संस्करण भी शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इन ट्रेनों में एसी की तीन श्रेणियां होंगी। जिसमें फर्स्ट क्लास एसी कोच, सेकंड क्लास एसी और थर्ड क्लास एसी होगा। इस ट्रेन की कुल यात्री क्षमता 1,128 होगी। हालांकि, स्लीपर ट्रेनों को 10 अगस्त को लॉन्च करने की शुरुआती योजना पर अभी पुनर्विचार किया जा रहा है। बता दें कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यालय में कई अनुरोध आए हैं। इसमें चुनावी राज्य बिहार और पश्चिम बंगाल भी शामिल है, जहां से वंदे भारत स्पीलर ट्रेनों की भारी मांग आई है।
स्लीपर ट्रेन का एक सेट तैयार
चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में निर्मित पहला स्लीपर रेक सफलतापूर्वक परीक्षण पास कर चुका है। जानकारी के अनुसार, इसे फरवरी में उत्तरी क्षेत्र को आवंटित किया गया था। बताया जा रहा है कि शुरुआत में दिसंबर तक 10 स्लीपर ट्रेनें तैयार करने की योजना थी, लेकिन 31 जुलाई तक केवल एक ही सेट का निर्माण हो पाया। इन नई और आधुनिक ट्रेनों से लाखों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और ज्यादा आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। इससे भारतीय रेलवे में यात्रा की सुविधा और आराम का स्तर भी बेहतर होगा।
