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मई में महंगाई ने तोड़ा रिकॉर्ड! 44 महीने के शीर्ष पर थोक मूल्य सूचकांक, 9.68% पहुंचा WPI

सोमवार 15 जून को केंद्र सरकार ने थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए। इन आंकड़ों के मुताबिक मई 2026 में महंगाई ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। WPI सितंबर 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।

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लगातार बढ़ती जा रही महंगाई

देश में थोक महंगाई मई 2026 में बढ़कर 9.68 फीसदी हो गई है। इससे पहले अप्रैल में यह 8.26 फीसदी रही थी। सोमवार 15 अप्रैल को केंद्र सरकार ने महंगाई के आंकड़े जारी किए। इन आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक (WPI) सिंतबर 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक

ईंधन व बिजली, विनिर्मित उत्पादों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेज वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने आधार वर्ष को 2011-12 से संशोधित कर 2022-23 करने के बाद थोक मूल्य सूचकांक (डूब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े सोमवार को जारी किए।

ईंधन और बिजली 30.33 फीसदी महंगे

ईंधन और बिजली श्रेणी में थोक मुद्रास्फीति मई में बढ़कर 30.33 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 24.89 प्रतिशत थी। कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई दर मई में 61.51 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल में यह 56.31 प्रतिशत थी। थोक मुद्रास्फीति में यह तेज वृद्धि पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी अवरोध के कारण हुई जहां से भारत अपने अधिकतर कच्चे तेल का आयात करता है। इसका असर खाद्य कीमतों पर भी पड़ा। खाद्य वस्तुओं में मुद्रास्फीति मई में 3.60 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 2.43 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों में महंगाई दर बढ़कर 7.48 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 6.68 प्रतिशत थी।

RBI ने भी बढ़ाया अनुमान

खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई भी मई में पिछले 16 महीन के उच्च स्तर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई। अप्रैल में यह 3.48 प्रतिशत थी।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। सरकार ने कुल महंगाई दर को दोनों ओर दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत बनाए रखने का लक्ष्य दिया है।

इस महीने की शुरुआत में आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से कच्चे माल की लागत में बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह बताई गई जिसका असर खुदरा पेट्रोल और डीजल कीमतों पर पड़ा। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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