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गैस सिलेंडर की पट्टी पर लिखे A, B, C, D कोड का क्या है असली मतलब? नजरअंदाज किया तो हो सकता है बड़ा हादसा!

गैस सिलेंडर पर लिखे A, B, C, D जैसे कोड उसकी एक्सपायरी या री-testing की तारीख बताते हैं। इन्हें नजरअंदाज करने पर गैस लीकेज या सिलेंडर ब्लास्ट जैसा बड़ा हादसा हो सकता है, इसलिए नया सिलेंडर लेते समय इसे जरूर चेक करें।

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LPG Cylinder

हमारे घरों की रसोई में इस्तेमाल होने वाला एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर दैनिक जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है। चाय बनाने से लेकर पूरे परिवार का खाना पकाने तक, हर घर में इसका रोज इस्तेमाल होता है। लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि सिलेंडर के ऊपरी हिस्से में, जहां रेगुलेटर लगाया जाता है, उसके पास लोहे की तीन पट्टियां (गार्ड रिंग) होती हैं? इनमें से किसी एक पट्टी के अंदरूनी हिस्से पर बड़े अक्षरों में A-26, B-27, C-28 या D-29 जैसे कुछ कोड लिखे होते हैं। ज्यादातर लोग इसे कोई साधारण सीरियल नंबर या मैन्युफैक्चरिंग कोड समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह कोई मामूली नंबर नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण सीक्रेट कोड है? अगर आप इस कोड को बिना देखे या समझे रसोई में गैस सिलेंडर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आप अनजाने में एक बड़े हादसे को दावत दे रहे हैं। आइए जानते हैं कि गैस सिलेंडर पर लिखे इन कोड्स का असली मतलब क्या होता है और यह आपकी सुरक्षा के लिए क्यों जरूरी है।

क्या है इन कोड्स का मतलब?

गैस सिलेंडर पर लिखा यह कोड उसकी एक्सपायरी डेट (Expiry Date) या री-टेस्टिंग की समयसीमा (Due Date for Testing) को दर्शाता है। जिस तरह खाने-पीने की चीजों या दवाइयों की एक निश्चित एक्सपायरी डेट होती है, ठीक उसी तरह गैस सिलेंडर की भी एक मियाद होती है। सिलेंडर लोहे के बने होते हैं और लगातार गैस के भारी दबाव (Pressure) को झेलते हैं। समय के साथ इनमें जंग लगने या वाल्व के कमजोर होने का खतरा रहता है। इसीलिए तेल और गैस कंपनियां (जैसे Indane, HP, Bharat Gas) एक निश्चित समय के बाद हर सिलेंडर की कड़ाई से जांच करती हैं कि वह आगे इस्तेमाल के लिए सुरक्षित है या नहीं। सिलेंडर पर लिखे कोड में मौजूद अंग्रेजी के अक्षर (Letters) 'महीने' को बताते हैं और उसके आगे लिखे अंक (Digits) 'साल' को दर्शाते हैं।

सिलेंडर की सेफ्टी को समझने के लिए साल के 12 महीनों को चार हिस्सों (तिमाहियों) में बांटा गया है, जिसके लिए A, B, C और D अक्षरों का इस्तेमाल किया जाता है

  • 'A' का मतलब: साल की पहली तिमाही, यानी जनवरी, फरवरी और मार्च।
  • 'B' का मतलब: साल की दूसरी तिमाही, यानी अप्रैल, मई और जून।
  • 'C' का मतलब: साल की तीसरी तिमाही, यानी जुलाई, अगस्त और सितंबर।
  • 'D' का मतलब: साल की चौथी तिमाही, यानी अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर।

अक्षरों के ठीक बाद लिखे दो अंक उस वर्ष (Year) को दर्शाते हैं जिसमें उस सिलेंडर की टेस्टिंग होनी अनिवार्य है। उदाहरण के लिए, यदि आपके घर में मौजूद गैस सिलेंडर पर A-26 लिखा है, तो इसका सीधा मतलब यह हुआ कि उस सिलेंडर की लाइफ या टेस्टिंग की अंतिम तारीख साल 2026 के मार्च महीने तक ही थी। इसी तरह यदि किसी सिलेंडर पर D-28 लिखा है, तो उसका मतलब है कि उस सिलेंडर की जांच साल 2028 के दिसंबर महीने में की जानी है।

नजरअंदाज किया तो होगा नुकसान

अब सवाल उठता है कि इस कोड को नजरअंदाज करने से क्या नुकसान हो सकता है? यदि आप अपने घर में ऐसा सिलेंडर ले आते हैं जिसकी री-टेस्टिंग की तारीख निकल चुकी है (जैसे वर्तमान में साल 2026 चल रहा है और सिलेंडर पर A-25 या D-25 लिखा हो), तो वह सिलेंडर तकनीकी रूप से 'एक्सपायर्ड' या असुरक्षित माना जाएगा। ऐसे सिलेंडरों में अत्यधिक दबाव के कारण गैस लीकेज (Gas Leakage) होने या वाल्व खराब होने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। रेगुलेटर फिट करते समय या खाना बनाते समय जरा सी लापरवाही से गैस लीक होकर आग पकड़ सकती है और सिलेंडर ब्लास्ट जैसा भयंकर हादसा भी हो सकता है।

पब्लिक सेफ्टी के लिए यह जानना भी जरूरी है कि जब किसी सिलेंडर की टेस्टिंग का समय आता है, तो गैस कंपनियां उसे वापस प्लांट में ले जाती हैं। वहां उसकी हाइड्रो-टेस्टिंग की जाती है, पांच गुना ज्यादा प्रेशर डालकर लीकेज चेक की जाती है और सब कुछ सही पाए जाने पर उस पर आगे का नया कोड लिखकर दोबारा मार्केट में भेजा जाता है। यदि कोई सिलेंडर टेस्ट में फेल हो जाता है, तो उसे तुरंत नष्ट (Scrap) कर दिया जाता है। इसलिए, एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, जब भी आपके घर में नया गैस सिलेंडर डिलीवर हो, तो डिलीवरी बॉय के सामने ही सबसे पहले उसकी लोहे की पट्टी पर लिखे इस सुरक्षा कोड को जरूर चेक करें। यदि वह एक्सपायर्ड हो या उसकी तारीख नजदीक हो, तो उसे लेने से तुरंत मना कर दें और गैस एजेंसी को इसकी शिकायत करें। आपकी सजगता ही आपके परिवार को सुरक्षित रख सकती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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