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Mutual Fund: म्यूचुअल फंड में क्या होता है एग्जिट लोड, जान लीजिए कितना और कब लगता है ये चार्ज

Mutual Fund Exit Load: म्यूचुअल फंड स्कीमों में लॉक-इन पीरियड नहीं होता। आप ऐसी स्कीमों से जब मर्जी पैसा निकाल सकते हैं। मगर ऐसे फंड एक अवधि तय कर देते हैं कि यदि आपने इस अवधि से पहले म्यूचुअल फंड यूनिट बेची या रिडीम कीं, तो आपको एग्जिट लोड का भुगतान करना होगा।

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म्यूचुअल फंड में क्या होता है एग्जिट लोड

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • म्यूचुअल फंड में लगता है एग्जिट लोड
  • अधिकतर स्कीमों में होता है 1 फीसदी
  • 1 साल से पहले पैसा निकालने पर लगता है ये चार्ज

Mutual Fund Exit Load: अकसर म्यूचुअल फंड निवेशकों को एग्जिट लोड की जानकारी नहीं होती। ये एक तरह का चार्ज होता है। एग्जिट लोड म्यूचुअल फंड द्वारा तब लगाया जाता है जब कोई निवेशक एक निश्चित अवधि पूरी होने से पहले अपनी म्यूचुअल फंड यूनिट बेचता या रिडीम करता है। यह आमतौर पर निवेशकों द्वारा रखी गई म्यूचुअल फंड यूनिट्स की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) का एक प्रतिशत होता है। जिन म्यूचुअल फंड में कोई लॉक-इन अवधि नहीं होती वे म्यूचुअल फंड एग्जिट लोड लेते हैं। इसलिए म्यूचुअल फंड चुनते समय उसके एक्सपेंस रेशियो के साथ-साथ एग्जिट लोड पर भी विचार करें।

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उदाहरण से समझिए

आम तौर पर म्यूचुअल फंड स्कीमों में लॉक-इन पीरियड नहीं होता। आप ऐसी स्कीमों से जब मर्जी पैसा निकाल सकते हैं। मगर ऐसे फंड एक अवधि तय कर देते हैं कि यदि आपने इस अवधि से पहले म्यूचुअल फंड यूनिट बेची या रिडीम कीं, तो आपको एग्जिट लोड का भुगतान करना होगा।

सभी फंड एग्जिट चार्ज नहीं लगाते हैं। इसलिए निवेश करते समय ऐसे प्लान चुनना ज्यादा बेहतर है जिनमें एग्जिट लोड नहीं होता।

कितना लगता है चार्ज

आम तौर पर म्यूचुअल फंड एक साल का समय तय करते हैं और इससे पहले पैसा निकालने पर चार्ज लगाते हैं। वहीं अधिकतर स्कीमों में एग्जिट लोड 1 फीसदी होता है। कुछ म्यूचुअल फंड योजनाओं के नियमों और शर्तों के आधार पर एक वर्ष के बाद भी एग्जिट लोड लागू हो सकता है।

1 फीसदी चार्ज का गणित समझिए

एग्जिट लोड आमतौर पर निवेशकों की म्यूचुअल फंड यूनिट्स की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) का एक प्रतिशत होता है। यदि आप तय समय से पहले म्यूचुअल फंड यूनिट बेचते समय घाटे पर भी बेच रहे हैं तो भी आपको एग्जिट लोड का भुगतान करना होगा।

Kashid Hussain
काशिद हुसैन author

<p>काशिद हुसैन अप्रैल 2023 से Timesnowhindi.Com (टाइम्स नाउ नवभारत) के साथ काम कर रहे हैं। यहां पर वे सीनियर कॉरेस्पोंडेंट हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की बिजनेस टीम में वह शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड और आर्थिक जगत से जुड़ी सभी तरह की स्टोरी और वेब स्टोरी करते हैं। रिसर्च आधारित स्टोरी के लिए नए एंगल तलाश करना और रीडर्स की रुचि के अनुसार कॉपी लिखने पर फोकस रहता है। शेयर बाजार में खास रुचि है और इससे जुड़ी रियल टाइम खबरें कम समय में लगाने में विशेषज्ञता है। मीडिया में काम करने का 8 वर्षों का अनुभव है, जिसमें गुडरिटर्न्स और शेयर मंथन वेबसाइटों के अलावा निवेश मंथन पत्रिका में भी काम किया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में ग्रेजुएशन के बाद आईआईएमसी, नई दिल्ली से रेडियो एंव टेलीविजन में पोस्ट ग्रेजुएशन की है। ग्रेजुएशन के दौरान सहारा समय और सिटी न्यूज में इंटर्नशिप के साथ-साथ अखबार और वेबसाइट के लिए लिखना शुरू कर दिया था। काशिद को किताबें पढ़ना, फिल्में देखना और क्रिकेट में रुचि है। बिजनेस के अलावा खेल जगत और इंटरनेशनल खबरों में भी रुचि है।<br></p>

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