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90% तक सस्ते हुए हीरे! आखिर क्यों फीकी पड़ रही इनकी चमक, क्या अब पेड़ पर लगने लगे?

कभी हीरों को दौलत की सबसे बड़ी निशानी माना जाता था। लेकिन, हीरों की कीमत जिस तेजी से गिर रही है, वह हैरान करने वाली है। क्योंकि हीरों की कीमत इस सदी के निचले स्तर पर है।

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हीरों की कीमत हुई धड़ाम

Diamonds Price Crash : हीरे को हमेशा से बेशकीमती और दुर्लभ माना गया है। लेकिन अब डायमंड मार्केट में ऐसा बदलाव आया है, जिसने इस चमकदार पत्थर की कहानी ही बदल दी है। एक तरफ जहां प्राकृतिक हीरों (Natural Diamonds) की कीमते इस सदी के सबसे निचले स्तर पर हैं। वहीं, कृत्रिम हीरे (Lab Grown Diamonds) की कीमतें 90% तक घट गई हैं। यही वजह है कि बाजार में सवाल उठने लगा है कि क्या अब हीरे पेड़ पर लगने लगे हैं?

असली हीरे यानी प्राकृतिक हीरों की कीमत 2011 के पीक से करीब 68-70% तक गिर चुकी है। 2021 के मुकाबले भी कई श्रेणियों में दाम 30-40% तक नीचे आ गए हैं। दूसरी तरफ लैब-ग्रोन डायमंड प्राकृतिक हीरों की तुलना में पहले ही करीब 70-85% तक सस्ते मिलते थे। अब इनके कैरेट और कैटेगरी के हिसाब से दाम 90% तक गिर गए हैं।

क्या लैब में बने हीरे नकली?

लैब-ग्रोन डायमंड कोई नकली पत्थर नहीं है। इसे लैब में तकनीक की मदद से तैयार किया जाता है और इसके केमिकल और ऑप्टिकल गुण प्राकृतिक हीरे के समान ही होते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि नैचुरल डायमंड बनने में जहां प्रकृति को लाखों-करोड़ों साल लग सकते हैं, जबकि लैब में यह हीरे कुछ ही दिनों में तैयार हो जाते हैं।

क्यों सस्ते होते जा रहे हीरे?

हीरा सिर्फ आभूषण के तौर पर ही काम नहीं आता है। बल्कि, यह प्रकृति में मौजूद सबसे कठोर चीजों में शामिल है। ऐसे में इसका इस्तेमाल तमाम उद्योग और तकनीकों में होता है। पहले यह सिर्फ कोयले की खदानों से निकलता था और रेयर माना जाता था। लेकिन, अब टेक्नोलॉजी ने इसके डिमांड और सप्लाई मीट्रिक्स को बदल दिया है। चीन में हीरे बनाने वाली तमाम लैब अब प्राकृतिक रूप से मिलने वाले हीरों से ज्यादा हीरे सालाना बना रही हैं। इसकी वजह से हीरों की सप्लाई बढ़ गई है। इसके अलावा समय के साथ तकनीक विकसित हो रही है, जिससे कम समय में बेहतर हीरे बनने की संभावनाएं बढ़ रही है। यही वजह है कि हीरों के दाम लगातार गिर रहे हैं।

ग्राहकों के लिए सस्ता हुआ 'ड्रीम डायमंड'

इस पूरे बदलाव सबसे बड़ा फायदा ग्राहकों को मिला है। अब कम बजट में बड़े और बेहतर क्वालिटी के हीरे आसानी से मिल रहे हैं। लेकिन, डिमांड बढ़ने और लगातार कीमत घटने की वजह से ग्राहकों में भी हीरों को खरीदने का रुझान कमजोर हुआ है। क्योंकि, ग्राहक ज्वेलरी के तौर पर ऐसी वस्तुओं में निवेश करना चाहते हैं, जिनकी कीमत समय के साथ बढ़ती रहे। लेकिन, हीरे के मामले में अब ऐसा नहीं रह गया है।

भारत पर क्या असर हुआ?

दुनिया में हीरों की कीमतों में गिरावट का सीधा असर भारत के डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग (Diamond Cutting and Polishing) कारोबार पर पड़ा है, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा डायमंड प्रॉसेसिंग हब है। खासतौर पर नैचुरल डायमंड की कीमत घटने से भारतीय कारोबारियों के मार्जिन पर भारी दबाव है। खासकर सूरत जैसे प्रमुख डायमंड हब को सस्ते लैब ग्रोन डायमंड की वजह से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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