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Independence Day Special:15 साल में इनकम डबल,जानें क्या था बांबे प्लान,जिसे टाटा-बिड़ला ने आजाद भारत के लिए किया था पेश

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Aug 15, 2023, 08:42 AM IST

Independence Day Special And What Is Bombay Plan: साल 1944 में भारत के प्रमुख उद्योगपतियों ने मिलकर बांबे प्लान तैयार किया था। जिसके जरिए अगले 15 साल में भारत के विकास के पथ पर लाना था। इस प्लान को जे.आर.डी टाटा, घनश्याम दास बिड़ला, टेक्नोक्रैट सर आरदेशीर दलाल, डीएसएम के लाला श्रीराम, आरबीआई के डायरेक्टर कस्तूरभाई लालभाई, डी श्रॉफ, जॉन मथाई, पुरूषोत्तम दास ठाकुरदास को मिलकर बनाया था।

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भारत को विकास पथ का था रोडमैप

Independence Day Special And What Is Bombay Plan:अंग्रेजों ने जब भारत छोड़ा, तो वह एक ऐसा भारत छोड़ कर गए थे, जो लूटा गया था। जिसके उद्योग धंधों और हुनर को चौपट कर दिया गया था। और वह देश जो कभी दुनिया की जीडीपी में 25-30 फीसदी हिस्सेदारी रखता था, वह गिरकर केवल 3 फीसदी (2.7 लाख करोड़ रुपये) पर आ गया था। असल में अंग्रेजों ने भारत को प्रोडक्शन हब की जगह कच्चे माल के सप्लायर के रूप में तब्दील कर दिया था। यानी कपड़े के लिए कपास तो भारत में पैदा होगा लेकिन कपड़ा बनकर इंग्लैंड से आएगा। इसी तरह सड़कों, रेल आदि का विकास केवल ब्रिटेन की इंडस्ट्री को देखकर किया जाता था। यही कारण था कि भारत पिछड़ता गया और एक गरीब देश के रूप में उसकी पहचान गई। लोग बमुश्किल 250 रुपये सालाना कमाते थे। जब आजादी करीब थी, उस समय कई भारतीय बिजनेसमैन और टेक्नोक्रैट ने मिलकर भारत के विकास के लिए, एक प्लान तैयार किया था। जिसके तहत अगले 15 साल में देश की इकोनॉमी को विकास की पटरी पर लाना था। इस प्लान को ही बांबे प्लान कहा जाता है।

क्या था बांबे प्लान

साल 1944 में भारत के प्रमुख उद्योगपतियों ने मिलकर बांबे प्लान तैयार किया था। जिसके जरिए अगले 15 साल में भारत के विकास के पथ पर लाना था। इस प्लान को जे.आर.डी टाटा, घनश्याम दास बिड़ला, टेक्नोक्रैट सर आरदेशीर दलाल, डीएसएम के लाला श्रीराम, आरबीआई के डायरेक्टर कस्तूरभाई लालभाई, डी श्रॉफ, जॉन मथाई, पुरूषोत्तम दास ठाकुरदास को मिलकर बनाया था।

15 साल में इनकम डबल

बॉम्बे योजना के प्रमुख फोकस अगले 15 साल के लिए रोडमैप बनाना था। इसके तहत कृषि क्षेत्र में खाद्यान्न उत्पादन को दोगुना करना और औद्योगिक क्षेत्र में पांच गुना विकास करना था। इसके लिए 100 अरब रुपये का निवेश करने की योजना तैयार करना था। इसके तहत मिक्सड इकोनॉमी मॉडल पर फोकस किया गया था। यानी सरकार और प्राइवेट सेक्टर मिलकर काम करेंगे। जिसमें सरकार की अहम भूमिका थीऔर इसके जरिए 15 साल में लोगों की इनकम की डबल करना था। हालांकि इस प्लान को सरकार द्वारा पूरी तरह से कभी स्वीकार नहीं किया गया। और भारत तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में पंचवर्षीय मॉडल को अपनाकर आगे बढ़ा

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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