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Trader Trump : चर्चा में अमेरिकी राष्ट्रपति का ट्रेडिंग कारोबार, 2026 की पहली तिमाही में किए 4000 ट्रेड

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रियल एस्टेट कारोबारी रहे हैं। लेकिन, अब पूरी दुनिया में ट्रेडर के तौर पर मशहूर हो रहे हैं। यह पहली बार है, जब सिटिंग प्रेसिडेंट खुलकर ट्रेडिंग कर रहा है।

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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रेडिंग को लेकर सुर्खियों में हैं

Trader Trump Controversy :अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार सुर्खियों में है। इस बार राष्ट्रपति के तौर पर उनकी ट्रेडिंग जर्नी की चर्चा है। दुनियाभर में ट्रंप हितों के टकराव (Conflict of Interest) की बहस के केंद्र में हैं। वजह, उनके निवेश खातों और ट्रस्ट के जरिये किए गए हजारों ट्रेड हैं। ट्रंप ने राष्ट्रपति के रहते हुए तमाम ऐसे शेयरों में ट्रेडिंग की है, जबकि उनके फैसले पूरे शेयर बाजार, कंपनियों और उद्योगों को प्रभावित कर सकते हैं।

हाल के खुलासों के अनुसार, ट्रंप से जुड़े ट्रस्ट ने 2026 की पहली तिमाही में लगभग 4,000 शेयर और सिक्योरिटी ट्रेड किए। इनमें टेक्नोलॉजी, एआई, रक्षा और औद्योगिक क्षेत्र की बड़ी कंपनियां शामिल थीं। निवेश गतिविधि का यह स्तर किसी सक्रिय फंड मैनेजर जैसा माना जा रहा है, न कि परंपरागत राष्ट्रपति ट्रस्ट जैसा।

विवाद की जड़ क्या है?

समस्या सिर्फ शेयर खरीदने-बेचने की नहीं है। सवाल यह है कि क्या कोई राष्ट्रपति ऐसी कंपनियों में निवेश रख सकता है, जिन पर उसके सरकारी फैसलों का सीधा असर पड़ता हो। मिसाल के तौर पर अगर राष्ट्रपति टैरिफ, रक्षा खर्च, एआई नीति, ऊर्जा नीति या किसी उद्योग को राहत देने का फैसला लेते हैं, तो संबंधित कंपनियों के शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव आ सकता है। ऐसे में आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति के निजी निवेश और सार्वजनिक नीति के बीच स्पष्ट दूरी होनी चाहिए।

आलोचकों की चिंता

नैतिकता विशेषज्ञों और कुछ सांसदों का कहना है कि ट्रंप ने उन परंपराओं को तोड़ा है जिन्हें दशकों से अमेरिकी राष्ट्रपति मानते रहे हैं। कई पूर्व राष्ट्रपति अपनी संपत्ति को "ब्लाइंड ट्रस्ट" में डाल देते थे, ताकि उन्हें यह पता न हो कि उनका पैसा किन संपत्तियों में निवेशित है। इससे नीति निर्माण और निजी लाभ के बीच दीवार बनी रहती थी। इसके अलावा, कुछ मामलों में ट्रंप के सार्वजनिक बयानों और नीतिगत घोषणाओं के बाद बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। इसी वजह से कुछ विपक्षी नेताओं ने बाजार में संभावित प्रभाव और जानकारी के दुरुपयोग की जांच की मांग भी की है।

ट्रंप और उनके समर्थकों का पक्ष

ट्रंप समर्थकों का तर्क है कि सभी लेनदेन सार्वजनिक प्रकटीकरण नियमों के तहत दर्ज किए गए हैं और कोई सबूत नहीं है कि राष्ट्रपति ने गैर-सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल कर निजी लाभ कमाया। वे कहते हैं कि ट्रंप की संपत्तियां एक ट्रस्ट द्वारा प्रबंधित की जाती हैं और कानून के तहत आवश्यक खुलासे किए जाते हैं।

बाजार के लिए इसका क्या मतलब है?

यह मामला सिर्फ ट्रंप तक सीमित नहीं है। इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका में राष्ट्रपति, सांसदों और शीर्ष अधिकारियों के लिए शेयर कारोबार पर और सख्त नियम होने चाहिए। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि जब सार्वजनिक पद और निजी निवेश एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं, तो निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है और बाजार की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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