बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana - SSY) एक लोकप्रिय छोटी बचत योजना है। यह योजना खासतौर पर बेटियों की शिक्षा और शादी जैसे बड़े खर्चों के लिए लंबी अवधि में एक बड़ा फंड तैयार करने में मदद करती है। इस स्कीम में निवेश करने पर सुरक्षित रिटर्न के साथ टैक्स बेनिफिट का फायदा भी मिलता है। अगर कोई माता-पिता अपनी बेटी के लिए छोटी-छोटी बचत शुरू करते हैं, तो समय के साथ यह रकम बड़ी हो सकती है। रोजाना केवल 100 बचाकर भी बेटी के नाम पर लाखों रुपये का फंड तैयार किया जा सकता है।
रोजाना 100 बचाने पर कितना बनेगा फंड?
अगर आप हर दिन 100 बचाते हैं तो एक महीने में करीब 3000 रुपये जमा हो जाएंगे। इस हिसाब से सालाना निवेश लगभग 36000 रुपये होगा। क्योंकि इस योजना में निवेश केवल 15 वर्ष तक करना होता है। इसलिए आपके द्वारा निवेश की गई कुल राशि 5,40,000 रुपये होगी। सुकन्या समृद्धि योजना में लंबे समय तक निवेश करने पर कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है। यानी आपके जमा किए गए पैसों पर मिलने वाला ब्याज भी आगे ब्याज कमाता है और समय के साथ निवेश की रकम तेजी से बढ़ती है। इसके साथ, आपकी जमा राशि पर आपको 11,22,619 रुपये का ब्याज मिलेगा। यानी मैच्योरिटी पर यह राशि कुल 16,62,619 रुपये हो जाएगी।
| डिटेल्स | राशि |
|---|---|
| सालाना निवेश | ₹36,000 |
| कुल निवेश | ₹5,40,000 |
| कुल ब्याज | ₹11,22,619 |
| मैच्योरिटी अमाउंट | ₹16,62,619 |
कैसे काम करती है Sukanya Samriddhi Yojana?
सुकन्या समृद्धि योजना में बेटी के नाम पर अकाउंट खोला जाता है। 10 साल से कम उम्र की बेटियों के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक खाता खोल सकते हैं। इस योजना में न्यूनतम सालाना निवेश 250 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये है। खाता खुलने के बाद इसमें 15 साल तक निवेश करना होता है, जबकि योजना की मैच्योरिटी अवधि 21 साल होती है।
टैक्स में भी मिलता है फायदा
सुकन्या समृद्धि योजना की एक बड़ी खासियत इसका टैक्स बेनिफिट है। इसमें निवेश की गई राशि पर आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत छूट मिलती है। इसके अलावा मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि भी टैक्स फ्री होती है। इस वजह से यह योजना उन लोगों के लिए आकर्षक विकल्प बन जाती है, जो बेटी के भविष्य के लिए सुरक्षित और टैक्स सेविंग निवेश करना चाहते हैं।
अच्छी बात ये है कि इस स्कीम में बेटी की पढ़ाई जैसी जरूरतों के लिए निर्धारित शर्तों के तहत आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। यह निकासी बेटी की उम्र 18 वर्ष हो जाने के बाद की जा सकती है।
