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पति या पत्नी... तलाक के बाद कौन भरेगा जॉइंट लोन?

पति-पत्नी के बीच तलाक होने पर भी बैंक के नियमों के मुताबिक जॉइंट लोन चुकाने की जिम्मेदारी दोनों की बनी रहती है। जानिए तलाक के बाद लोन ईएमआई (EMI) के कानूनी नियम, रीफाइनेंस और प्रॉपर्टी निपटारे से जुड़े मुख्य विकल्प।

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पति या पत्नी... तलाक के बाद कौन भरेगा जॉइंट लोन?

शादी के बाद मिलकर घर खरीदना और जॉइंट होम लोन (Joint Home Loan) लेना काफी आम बात है। इससे न केवल लोन की पात्रता (Eligibility) बढ़ जाती है, बल्कि दोनों को टैक्स छूट का फायदा भी मिलता है। लेकिन अगर आगे चलकर रिश्ते में कड़वाहट आ जाए और बात तलाक तक पहुंच जाए, तो सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जॉइंट लोन की बकाया ईएमआई (EMI) कौन चुकाएगा? अधिकांश लोगों को लगता है कि तलाक के बाद बैंक से उनका लोन का नाता खत्म हो जाएगा, जबकि असलियत इससे बिल्कुल अलग है।

तलाक के मामले में क्या होगा जॉइंट लोन का?

कानूनी और बैंकिंग नियमों के मुताबिक, बैंक को पति-पत्नी के आपसी विवाद या तलाक से कोई लेना-देना नहीं होता है। बैंक की नजर में दोनों सह-आवेदक (Co-borrowers) समान रूप से लोन चुकाने के लिए जिम्मेदार हैं। इसका मतलब यह है कि अगर तलाक के बाद भी दोनों के नाम पर लोन दर्ज है, तो ईएमआई का भुगतान करने की कानूनी जिम्मेदारी पति और पत्नी दोनों की बनी रहती है। यदि दोनों में से कोई भी एक ईएमआई चुकाने से मना कर देता है, तो बैंक दूसरे सह-आवेदक से पूरी राशि की वसूली कर सकता है। इतना ही नहीं, ईएमआई न भरने की स्थिति में दोनों का सिबिल स्कोर (CIBIL Score) खराब हो जाएगा, जिससे भविष्य में नया लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।

ज्वाइन लोन से कैसे निपटें?

तलाक की स्थिति में जॉइंट होम लोन से निपटने के मुख्य रूप से तीन रास्ते होते हैं। पहला विकल्प यह है कि संपत्ति और लोन को किसी एक पार्टनर के नाम पर ट्रांसफर कर दिया जाए। इसके तहत अगर पत्नी घर अपने पास रखना चाहती है, तो वह पति के हिस्से की रकम या तय सेटलमेंट अमाउंट देकर लोन को पूरी तरह अपने नाम पर रीफाइनेंस (Refinance) करवा सकती है। हालांकि, ऐसा तभी संभव है जब बैंक अकेले पत्नी की वित्तीय आय और रीपेमेंट क्षमता से संतुष्ट हो। इस प्रक्रिया के बाद पति का नाम लोन और प्रॉपर्टी दोनों से हटा दिया जाता है।

दूसरा विकल्प यह है कि दोनों आपसी सहमति से उस संपत्ति को बाजार में बेच दें। संपत्ति बेचने से जो रकम मिलेगी, उससे सबसे पहले बैंक का पूरा बकाया लोन चुकता किया जाएगा। इसके बाद जो पैसा बचेगा, उसे पति और पत्नी आपस में अपनी सहमति या कोर्ट के आदेश के अनुसार बांट सकते हैं। यह तरीका विवाद से बचने और लोन से तुरंत मुक्ति पाने का सबसे आसान रास्ता माना जाता है।

तीसरा रास्ता यह है कि आपसी कोर्ट सेटलमेंट (Alimony Agreement) के तहत यह तय किया जाए कि ईएमआई की पूरी जिम्मेदारी कौन उठाएगा। अगर कोर्ट के आदेश में यह स्पष्ट लिखा है कि लोन की किश्तें पति भरेगा, तो उसे ही भुगतान करना होगा। हालांकि, यदि वह किश्त भरने में फेल होता है, तो बैंक कानूनी रूप से पत्नी को नोटिस भेज सकता है। इसलिए जॉइंट लोन लेते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि इमोशन के बजाय वित्तीय जोखिमों को समझकर ही आगे बढ़ें।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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