Employment Generation : विश्व बैंक ग्रुप ने कहा है कि दक्षिण एशिया का कृषि क्षेत्र (agriculture sector) आने वाले समय में रोजगार सृजन का एक बहुत बड़ा स्रोत बन सकता है। इस क्षेत्र में पहले से ही करीब 43 प्रतिशत वर्कफोर्स काम कर रहा है, यानी बड़ी आबादी की आजीविका कृषि पर निर्भर है। विश्व बैंक के अनुसार अगर इस क्षेत्र को आधुनिक और संगठित तरीके से विकसित किया जाए, तो यह लाखों नए रोजगार पैदा कर सकता है और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। यह जानकारी भारत सरकार के Ministry of Food Processing Industries द्वारा जारी बयान में दी गई, जिसमें बताया गया कि दक्षिण एशिया में खाद्य प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए अहम प्रयास किए जा रहे हैं।
खाद्य प्रसंस्करण पर उच्च स्तरीय संवाद
एएनआई के मुताबिक गुजरात के अहमदाबाद में “Unlocking Value: Advancing Food Processing for Employment Generation and Sustainable Growth in South Asia” नामक क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति संवाद का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और World Bank Group के सहयोग से आयोजित हुआ। इस बैठक में दक्षिण एशिया के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में रोजगार, निवेश और विकास के नए अवसरों पर चर्चा की गई। खास बात यह रही कि इसमें कृषि को सिर्फ खेती तक सीमित न रखकर उसे एक व्यापक फूड सिस्टम के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया।
कृषि की मौजूदा स्थिति और चुनौतियां
विश्व बैंक समूह ने बताया कि दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान करीब 16 प्रतिशत है, जबकि इसका कुल मूल्य 700 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। इसका मतलब यह है कि यह क्षेत्र बहुत बड़ा है, लेकिन इसकी पूरी क्षमता का उपयोग अभी नहीं हो पा रहा है। एक बड़ी समस्या यह भी सामने आई कि इस क्षेत्र में हर साल 30 प्रतिशत से अधिक खाद्य उत्पादन बर्बाद हो जाता है या खराब हो जाता है। यह मात्रा इतनी अधिक है कि इससे करीब 300 मिलियन लोगों को भोजन मिल सकता है। यह स्थिति खाद्य सुरक्षा और आर्थिक दोनों दृष्टि से चिंता का विषय है।
खाद्य प्रसंस्करण में रोजगार की नई संभावनाएं
रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि विकास का अगला चरण केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स, मार्केटिंग और वैल्यू एडिशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार होगा। अगर इन क्षेत्रों को मजबूत किया जाए तो न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि बड़े पैमाने पर नए रोजगार भी पैदा होंगे। खासकर ग्रामीण युवाओं के लिए यह क्षेत्र रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है।
भारत में प्रगति और उपलब्धियां
भारत के कृषि उत्पादन में पिछले कई दशकों में बड़ी वृद्धि हुई है। 1950-51 में जहां अनाज उत्पादन करीब 51 मिलियन टन था, वहीं अब यह बढ़कर 330 मिलियन टन से अधिक हो गया है। यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इसके अलावा भारत के प्रोसेस्ड फूड (प्रसंस्कृत खाद्य) निर्यात में भी तेजी से वृद्धि हुई है। पिछले दस वर्षों में यह लगभग 4.9 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 10 अरब डॉलर से अधिक हो गया है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र भारत के विनिर्माण मूल्य में करीब 9 प्रतिशत और देश के कुल निर्यात में करीब 13 प्रतिशत योगदान देता है। इसके बावजूद, अभी भी इस क्षेत्र का रोजगार योगदान अपेक्षाकृत कम माना जाता है।
बुनियादी ढांचे की जरुरत
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत और दक्षिण एशिया में कृषि उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा अभी भी बिना प्रसंस्करण के ही रह जाता है। इसका मुख्य कारण कोल्ड चेन, स्टोरेज, परिवहन और बाजार से जुड़ी कमजोर व्यवस्थाएं हैं। अगर इन बुनियादी ढांचों को मजबूत किया जाए तो किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है और खाद्य नुकसान भी कम किया जा सकता है। इससे पूरी सप्लाई चेन अधिक प्रभावी बन सकती है।
दक्षिण एशिया की वैश्विक भूमिका
विश्व बैंक समूह के अनुसार दक्षिण एशिया आने वाले समय में वैश्विक खाद्य प्रणाली में एक प्रमुख भूमिका निभा सकता है। तेजी से बढ़ती शहरी आबादी, मध्यम वर्ग की वृद्धि, विविध कृषि संसाधन और सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण भोजन की बढ़ती मांग इस क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा कर रही है। इस बदलाव से न केवल निवेश के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि नए उद्योग और स्टार्टअप भी विकसित होंगे जो कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देंगे।
नई पहल: AgriConnect और SAPLING
विश्व बैंक समूह ने बताया कि वह कृषि क्षेत्र के विकास के लिए दो प्रमुख पहलों पर काम कर रहा है। AgriConnect और SAPLING initiative। AgriConnect का उद्देश्य 2030 तक 300 मिलियन किसानों को बाजार से जोड़ना है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में निवेश, नीतिगत सुधार और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। यह पहल भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में पहले से सक्रिय है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि दक्षिण एशिया का कृषि क्षेत्र सिर्फ भोजन उत्पादन का साधन नहीं है, बल्कि यह रोजगार, आर्थिक विकास और गरीबी कम करने का एक बड़ा माध्यम बन सकता है। अगर इस क्षेत्र में प्रसंस्करण, तकनीक और सप्लाई चेन को मजबूत किया जाए, तो यह आने वाले वर्षों में लाखों लोगों के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है।
