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इन निवेशकों के लिए SIP नहीं है बेस्ट! बैंक FD या आरडी में करना चाहिए निवेश

अगर आप म्यूचुअल फंड में सिप शुरू करने की तैयारी में हैं तो यह खबर आपके लिए है। सिप शुरू करने से पहले इस स्टोरी को जरूर पढ़ लें। आपको फैसले लेने में आसानी होगी।

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सिप के जरिये निवेश

भारतीय शेयर बाजार में गिरावट थम नहीं रही है। बुधवार को चालू वित्त वर्ष में मजबूत GDP अनुमान के बावजूद आज बाजार टूट रहा है। निफ्टी एक बार फिर लुढ़कर 26000 के करीब पहुंच गया है। 2025 में भी शेयर बाजार का प्रदर्शन खाफी खराब रहा था। जहां एक ओर सोने और चांदी ने निवेशकों को मालामाल किया, वहीं निफ्टी और सेंसेक्स ने मामूली 10% से भी कम रिटर्न दिया। शेयर बाजार में सुस्ती का असर म्यूचुअल फंड रिटर्न पर पड़ा। बहुत सारे म्यूचुअल फंड स्कीम ने निवेशकों को निगेटिव रिटर्न दिया। इससे निवेशक परेशान हैं। इस साल भी बाजार की शुरुआत अच्छी नहीं है। अमेरिका के साथ ट्रेड डील का मामला उलझता जा रहा है। इससे बाजार में और करेक्शन की आशंका है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट का कहना है कि यह SIP निवेशकों के लिए एक सीख की तरह है। आइए जानते हैं कि एक्सपर्ट क्या सलाह दे रहे है।

1 से 3 साल के निवेशक दूर रहें

फाइनेंशियल एक्सपर्ट का कहना है कि वैसे निवेशकों को SIP शुरू नहीं करना चाहिए जिनका वित्तीय लक्ष्य 1 से 3 साल तक निवेश करने का है। SIP हमेशा लंबी अवधि में निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने का काम करता है। शॉर्ट टर्म में रिटर्न की गारंटी नहीं होती है। बीते कुछ सालों के ट्रेंड देखकर निवेशक इसे समझ सकते हैं। अगर निवेशक का लक्ष्य 7 साल या उससे अधिक है तो ही SIP के जरिये म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए।

FD या आरडी क्यों है बेस्ट?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट का कहना है कि जो निवेशक शॉर्ट टर्म के लिए पैसा लगाना चाहते हैं वो बैंक एफडी या आरडी का चुनाव करें। ये दोनों विकल्प उनके लिए बेस्ट है। ऐसा इसलिए कि बैंक 7 दिन से लेकर 10 साल तक निवेश करने का विकल्प देते हैं। आरडी में 6 महीने का विकल्प मिलता है। इसके साथ ही इन दोनों निवेश माध्यम में रिटर्न की गारंटी होती है। यानी नुकसान होने का चांस बिल्कुल नहीं होता है। साथ ही आपको पहले से पता होता है कि मैच्योरिटी पर कितना रिटर्न मिलेगा। इसलिए शॉर्ट टर्म के लिए ये बेस्ट विकल्प है।

Alok Kumr
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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