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किरायेदार से कितने महीने की सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग सकता है मकान मालिक? जानें क्या कहता है नियम

अगर आप किराए पर घर लेने जा रहे हैं, तो मकान मालिक आपसे कितने महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग सकता है, यह जानना जरूरी है। कई जगह मकान मालिक 6 महीने तक का किराया एडवांस मांगते हैं। जानिए क्या हैं नियम और आपके अधिकार।

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किरायेदार से कितने महीने की सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग सकता है मकान मालिक?

किराए पर घर लेने के लिए अक्सर मकान मालिक किरायेदार से सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगते हैं। यह रकम घर के किराए से अलग होती है और मकान मालिक के पास जमा रहती है। घर खाली करते समय आमतौर पर यह रकम किरायेदार को वापस कर दी जाती है। लेकिन कई बार मकान मालिक 3 महीने, 6 महीने या उससे भी ज्यादा किराए के बराबर सिक्योरिटी डिपॉजिट मांगते हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर मकान मालिक कितने महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग सकता है और क्या इसकी कोई कानूनी सीमा है?

कितने महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग सकता है मकान मालिक?

केंद्र सरकार ने किराएदारों और मकान मालिकों के बीच विवाद कम करने के लिए मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 बनाया था। इसके तहत रिहायशी मकान के लिए अधिकतम 2 महीने के किराए के बराबर सिक्योरिटी डिपॉजिट लेने का प्रावधान है। वहीं, दुकान या ऑफिस जैसी कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए यह सीमा 6 महीने के किराए तक है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि मॉडल टेनेंसी एक्ट पूरे देश में अपने आप लागू नहीं होता। इसे लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने स्तर पर कानून या नियम बनाने होते हैं। इसलिए सिक्योरिटी डिपॉजिट की वास्तविक सीमा आपके राज्य के कानून और किराया समझौते पर निर्भर कर सकती है।

क्या मकान मालिक 6 महीने का एडवांस मांग सकता है?

कई शहरों में मकान मालिक किराए पर घर देने से पहले कई महीने का किराया सिक्योरिटी के रूप में मांगते हैं। कुछ जगहों पर यह रकम 1 से 2 महीने के किराए के बराबर होती है, जबकि कुछ शहरों में इससे ज्यादा भी हो सकती है। अगर आपके इलाके में मॉडल टेनेंसी एक्ट के प्रावधान लागू हैं, तो रिहायशी मकान के लिए 2 महीने की सीमा का ध्यान रखना होगा। लेकिन जहां यह कानून लागू नहीं है, वहां स्थानीय कानून और किराया समझौते की शर्तें महत्वपूर्ण होंगी। इसलिए घर किराए पर लेने से पहले सिक्योरिटी डिपॉजिट की रकम और उसे वापस करने की शर्तें लिखित में तय करना जरूरी है।

सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस कब मिलता है?

जब किरायेदार घर खाली करके मकान मालिक को चाबी सौंप देता है, तो सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करने की प्रक्रिया शुरू होती है। अगर किराया, बिजली-पानी का बिल या मेंटेनेंस का कोई बकाया है, तो मकान मालिक तय शर्तों के अनुसार रकम काट सकता है। इसी तरह किरायेदार की वजह से घर को कोई गंभीर नुकसान हुआ है, तो उसकी मरम्मत का खर्च भी काटा जा सकता है। हालांकि, सामान्य इस्तेमाल से होने वाली टूट-फूट या पुरानी हो चुकी चीजों के लिए मनमाने तरीके से पैसे काटना उचित नहीं है।

सिक्योरिटी डिपॉजिट देते समय इन बातों का रखें ध्यान

घर किराए पर लेने से पहले रेंट एग्रीमेंट जरूर बनवाएं। इसमें किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट, घर खाली करने की शर्तें और पैसे वापस करने की समय-सीमा साफ लिखी होनी चाहिए। सिक्योरिटी डिपॉजिट का भुगतान बैंक ट्रांसफर या किसी अन्य ऐसे तरीके से करें, जिसका रिकॉर्ड आपके पास रहे। घर में शिफ्ट होने से पहले उसकी फोटो और वीडियो भी बना लें, ताकि बाद में किसी नुकसान को लेकर विवाद न हो।

मकान मालिक पैसे वापस न करे तो क्या करें?

अगर घर खाली करने के बाद मकान मालिक बिना किसी उचित कारण के सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने से मना करता है, तो सबसे पहले उससे लिखित में कारण मांगें। रेंट एग्रीमेंट, भुगतान की रसीद और बातचीत के रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। जरूरत पड़ने पर कानूनी नोटिस भेजा जा सकता है और संबंधित कानूनी मंच पर शिकायत भी की जा सकती है।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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