SEBI CAS BSE-NSE : शेयर बाजार में क्लोजिंग ऑक्शन सेशन(CAS) लागू होने के करीब एक महीने बाद अब SEBI ने डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने की मेथडोलॉजी की समीक्षा का फैसला किया है। बाजार सहभागियों से मिले फीडबैक के बाद नियामक करीब एक हफ्ते में इस मामले पर कंसल्टेशन पेपर जारी कर सकता है।
SEBI ने पिछले महीने 3 अगस्त, 2026 से इक्विटी कैश सेगमेंट में CAS लागू किया था। इसका इस्तेमाल शेयरों का क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए किया जाता है। मौजूदा व्यवस्था के तहत CAS के जरिये तय हुआ क्लोजिंग प्राइस ही एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट प्राइस का आधार भी बनता है।
कारोबार और सेटलमेंट को लेकर उठे सवाल
CAS की शुरुआत से पहले SEBI ने इस फ्रेमवर्क को तैयार करने के लिए बाजार से व्यापक सलाह ली थी। दिसंबर 2024 और अगस्त 2025 में दो राउंड के पब्लिक कंसल्टेशन किए गए थे। इसके अलावा स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकर एसोसिएशन और संस्थागत निवेशकों के साथ इस मामले पर चर्चा हुई थी। लेकिन अब सिस्टम लागू होने के बाद बाजार के अलग-अलग हिस्सों से इसके कामकाज को लेकर फीडबैक मिलने लगा। इस दौरान सबसे अहम चिंता एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव के सेटलमेंट प्राइस को CAS क्लोजिंग प्राइस से तय करने को लेकर सामने आई है।
अब क्या बदल सकता है?
फिलहाल SEBI ने किसी नए फॉर्मुला या मेथडोलॉजी को अंतिम रूप नहीं दिया है। नियामक ने सिर्फ इतना कहा है कि CAS लागू होने के शुरुआती अनुभव और मिले फीडबैक को देखते हुए डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट के सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके में कुछ बदलाव प्रस्तावित किए जा सकते हैं। इन प्रस्तावों की जानकारी कंसल्टेशन पेपर में दी जाएगी। इस तरह SEBI CAS को वापस लेने के बजाय फिलहाल सैटलमेंट के मैकेनिज्म में बदलाव पर बात कर सकता है। हालांकि, इसमें बदलाव होगा भी या नही, यह मौजूदा मैकेनिज्म की समीक्षा के बाद तय होगा। फिलहाल, बाजार हितधारकों को सेबी की तरफ से कंसल्टेशन पेपर जारी किए जाने का इंतजार है।
