Retirement Income Plan: रिटायरमेंट (Retirement) के बाद सबसे बड़ी चिंता अक्सर नियमित कमाई को लेकर ही होती है। नौकरी के दौरान हर महीने सैलरी आती है, लेकिन रिटायरमेंट के बाद यह आमदनी बंद हो जाती है। ऐसे में अगर आपके पास रिटायरमेंट फंड के रूप में एक बड़ी रकम जमा है तो उसे सही तरीके से निवेश कर हर महीने इनकम का इंतजाम किया जा सकता है। इसके लिए कई विकल्प मौजूद हैं। इनमें से एक विकल्प FD है।
FD से कमा सकते हैं ब्याज
FD में एकमुश्त रकम जमा कर उस पर ब्याज कमाया जाता है। निवेशक मासिक ब्याज भुगतान का विकल्प चुन सकता है। इसका मतलब है कि FD की मूल रकम बैंक के पास जमा रहती है और उस पर मिलने वाला ब्याज हर महीने आपके सेविंग अकाउंट में भेजा जा सकता है।
FD से मंथली इनकम कैसे मिलती है?
मान लीजिए किसी व्यक्ति के पास रिटायरमेंट के बाद 10 लाख रुपये की रकम है। वह इस रकम को ऐसी FD में निवेश करता है, जिस पर सालाना 7 प्रतिशत ब्याज मिल रहा है। 10 लाख रुपये पर 7 प्रतिशत के हिसाब से एक साल का ब्याज करीब 70,000 रुपये बनेगा। अगर बैंक मासिक ब्याज भुगतान का विकल्प देता है, तो इसे 12 महीनों में बांटने पर करीब 5,833 रुपये प्रति महीने की आय बनती है।
यानी व्यक्ति को हर महीने लगभग 5,833 रुपये ब्याज के रूप में मिल सकते हैं, जबकि FD की मूल रकम यानी 10 लाख रुपये अपनी जगह बनी रहती है।
हालांकि, यह एक उदाहरण है, वास्तविक मासिक भुगतान बैंक की ब्याज गणना और मासिक ब्याज भुगतान की शर्तों के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए FD करवाने से पहले बैंक से मिलने वाली वास्तविक मासिक राशि जरूर पूछनी चाहिए।
ज्यादा रकम निवेश करने पर बढ़ सकती है मंथली इनकम
अब मान लीजिए किसी व्यक्ति के पास रिटायरमेंट के बाद 20 लाख रुपये हैं और वह पूरी रकम को 7 प्रतिशत सालाना ब्याज वाली FD में लगाता है। इस स्थिति में सालाना ब्याज करीब 1.40 लाख रुपये होगा। इसे 12 महीनों में बांटने पर करीब 11,667 रुपये प्रति महीने की ब्याज आय बन सकती है। इसी तरह अगर किसी के पास 30 लाख रुपये हैं तो 7 प्रतिशत की दर पर सालाना ब्याज करीब 2.10 लाख रुपये होगा। यानी औसतन करीब 17,500 रुपये प्रति महीने की ब्याज आय बन सकती है। FD में मिलने वाली मासिक आय मुख्य रूप से निवेश की रकम, ब्याज दर और FD की शर्तों पर निर्भर करती है।
FD की मंथली इनकम पर टैक्स भी लग सकता है
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि FD से मिलने वाला ब्याज आमदनी का हिस्सा होता है। आपकी कुल आय और लागू टैक्स नियमों के आधार पर इस ब्याज पर टैक्स देनदारी बन सकती है। इसलिए केवल बैंक से मिलने वाली मासिक ब्याज राशि को ही अपनी पूरी कमाई न मानें। FD चुनते समय ब्याज दर के साथ-साथ टैक्स, समय से पहले FD तोड़ने के नियम और भुगतान के विकल्पों को भी समझना चाहिए।
