Patna Ganga Flood Water City Entry: गंगा, सोन और पुनपुन नदियों के जलस्तर में हो रही लगातार वृद्धि के कारण अब बाढ़ का खतरा केवल ग्रामीण दियारा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि बिहार की राजधानी पटना के शहरी इलाकों में भी नदी का पानी तेजी से प्रवेश करने लगा है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से करीब 2 मीटर ऊपर बह रहा है, जिसके चलते गंगा किनारे बसे तटवर्ती इलाकों और बस्तियों में जलभराव की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।
ताजा ड्रोन वीडियो और जमीनी तस्वीरों में पटना के शहरी घाटों और निचली रिहायशी बस्तियों में पानी भरा हुआ साफ नजर आ रहा है।
भद्र घाट से कंगन घाट तक बैरिकेडिंग, सर्विस लेन बंद
गंगा के जलस्तर में हुई भारी वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं:
आवागमन प्रभावित: गंगा किनारे भद्र घाट से लेकर कंगन घाट तक जाने वाले मुख्य सर्विस लेन को बैरिकेडिंग कर पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे तटीय इलाकों में यातायात और सामान्य आवागमन ठप हो गया है।
घाटों पर जाने पर रोक: प्रशासन की ओर से लाउडस्पीकर व अन्य माध्यमों से अपील जारी कर आम लोगों और श्रद्धालुओं को गंगा घाटों के समीप जाने से बचने की सख्त चेतावनी दी जा रही है।
बिंद टोली पूरी तरह जलमग्न, 5,000 लोग प्रभावित
पटना शहर के बीचों-बीच स्थित बिंद टोली बस्ती में बाढ़ का पानी हर घर के भीतर तक घुस चुका है।
अस्त-व्यस्त हुआ जनजीवन: सरकार द्वारा दलित समाज के परिवारों को पुनर्वास के तहत 3-3 डिसमिल जमीन देकर बिंद टोली में बसाया गया था, जहां 205 रजिस्टर्ड भूखंडों पर 5,000 से अधिक की आबादी रहती है। जलभराव के कारण पूरी बस्ती पानी में डूब गई है।
मरीन ड्राइव पर शरण: अपने घरों को पानी में डूबता देख लोग किसी तरह जुगाड़ से बनी नावों की मदद से घर का जरूरी सामान निकालकर ऊंचे स्थानों यानी मरीन ड्राइव (जेपी गंगा पथ) पर पहुंच रहे हैं। लोग सड़कों के किनारे तिरपाल और टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं।
स्थानीय निवासियों में प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी
बाढ़ से बेघर हुए बिंद टोली के निवासियों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने और बेघर होने के बावजूद प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस मदद नहीं पहुंची है। पीड़ित निवासी, बिंद टोली (पटना) ने कहा, 'हमारे घरों में पानी भर गया है, खाने-पीने के लाले पड़े हैं। सरकार या प्रशासन की ओर से न तो राशन या पीने के पानी की कोई व्यवस्था की गई है और न ही सिर छुपाने के लिए टेंट दिए गए हैं। हम खुद जुगाड़ करके मरीन ड्राइव पर रहने को मजबूर हैं।'
रिपोर्ट: बृज भूषण कुमार
