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19 जून से बदलने जा रहे हैं शेयर बाजार के कई बड़े नियम! निवेशकों के लिए SEBI कर सकता है 5 बड़े ऐलान

शेयर बाजार के निवेशकों और लिस्टेड कंपनियों के लिए 19 जून की तारीख बेहद अहम है। इस दिन होने जा रही सेबी (SEBI) की बड़ी बोर्ड बैठक में इनसाइडर ट्रेडिंग, म्यूचुअल फंड सुरक्षा और बायबैक नियमों समेत 5 बड़े ऐलानों पर मुहर लग सकती है।

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SEBI New Rules

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश करने वाले करोड़ों निवेशकों और लिस्टेड कंपनियों के लिए 19 जून की तारीख बेहद अहम होने जा रही है। देश की मार्केट रेगुलेटर यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) इस दिन अपनी एक बड़ी बोर्ड बैठक करने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बैठक में निवेशकों के हितों की सुरक्षा करने, बाजार के कामकाज को और अधिक पारदर्शी बनाने तथा नियमों को आसान करने के लिए 5 बड़े ऐलानों पर मुहर लग सकती है। शेयर बाजार में लगातार बढ़ते रिटेल निवेशकों के क्रेज को देखते हुए सेबी समय-समय पर अपने नियमों की समीक्षा करता रहता है। माना जा रहा है कि 19 जून को होने वाले ये बदलाव बाजार की दिशा और दशा को बदलने में बड़ी भूमिका निभाएंगे।

क्या क्या होंगे बदलाव?

इस आगामी बैठक में जिस सबसे बड़े बदलाव की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह है 'ओपन मार्केट बायबैक विंडो' (Open Market Buyback Window) को फिर से शुरू करने या इसके नियमों में ढील देने की संभावना। दरअसल, जब कोई कंपनी बाजार से अपने ही शेयरों को वापस खरीदती है, तो उसे बायबैक कहा जाता है। पहले सेबी ने ओपन मार्केट के जरिए होने वाले बायबैक को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला किया था, क्योंकि इसमें इनसाइडर ट्रेडिंग और हेरफेर की आशंकाएं जताई जा रही थीं। लेकिन अब कंपनियों की मांग और बाजार की तरलता (Liquidity) को बनाए रखने के लिए सेबी इस पर दोबारा विचार कर सकता है। अगर यह नियम वापस आता है, तो कंपनियों के पास शेयरधारकों को फायदा पहुंचाने का एक आसान रास्ता फिर से खुल जाएगा।

दूसरा बड़ा बदलाव इनसाइडर ट्रेडिंग (Insider Trading) यानी अंदरूनी सूत्रों के जरिए होने वाली शेयरों की अवैध खरीद-बिक्री को रोकने से जुड़ा है। सेबी इस मामले में 'ट्रेडिंग प्लान' (Trading Plan) के नियमों को और अधिक कड़ा और व्यावहारिक बनाने जा रही है। वर्तमान नियमों के मुताबिक, कंपनी के प्रमोटर्स या बड़े अधिकारियों को अपने शेयर बेचने या खरीदने के लिए महीनों पहले एक ट्रेडिंग प्लान देना होता है, जिसे आसानी से बदला नहीं जा सकता। सेबी अब इस कूलिंग-ऑफ पीरियड को थोड़ा कम करके इसमें लचीलापन ला सकता है, लेकिन साथ ही डिस्क्लोजर (जानकारी सार्वजनिक करने) के नियमों को बेहद सख्त कर देगा, ताकि कोई भी व्यक्ति कंपनी की गुप्त सूचनाओं का गलत फायदा उठाकर अनुचित मुनाफा न कमा सके।

तीसरा महत्वपूर्ण फैसला म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) निवेशकों और खासकर स्मॉलकैप व मिडकैप स्कीम्स की सुरक्षा को लेकर हो सकता है। पिछले कुछ समय से म्यूचुअल फंड्स में रिकॉर्ड तोड़ निवेश आ रहा है। सेबी इस बात को लेकर चिंतित है कि यदि बाजार में अचानक कोई बड़ी गिरावट आती है, तो फंड हाउस निवेशकों का पैसा सुरक्षित तरीके से कैसे वापस करेंगे। इसके लिए सेबी 'स्ट्रेस टेस्ट' (Stress Test) और लिक्विडिटी मैनेजमेंट को लेकर नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। इसके तहत म्यूचुअल फंड कंपनियों को अपने पास पर्याप्त कैश या ऐसी संपत्तियां रखनी होंगी, जिन्हें जरूरत पड़ने पर तुरंत भुनाया जा सके, ताकि छोटे निवेशकों का पैसा कभी न फंसे।

चौथा और पांचवां बदलाव मुख्य रूप से आईपीओ (IPO) मार्केट और कॉरपोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) को लेकर होने की उम्मीद है। आईपीओ लाने वाली कंपनियों के लिए प्रमोटर्स के कंट्रीब्यूशन और 'लॉक-इन पीरियड' के नियमों में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं, जिससे स्टार्टअप्स और नई कंपनियों के लिए बाजार से पूंजी जुटाना थोड़ा आसान हो जाएगा। इसके अलावा, लिस्टेड कंपनियों द्वारा किए जाने वाले खुलासों (Disclosures) की समय-सीमा को और घटाया जा सकता है, ताकि कोई भी अच्छी या बुरी खबर निवेशकों तक तुरंत पहुंच सके। कुल मिलाकर, 19 जून को होने वाले सेबी के ये 5 बड़े ऐलान भारतीय शेयर बाजार को वैश्विक स्तर पर अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होंगे।

Richa Tripathi
रिचा त्रिपाठीauthor

रिचा त्रिपाठी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में बिजनेस डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 7 वर्षों के अनुभव के साथ रिचा, पर्सनल फाइनेंस, स्टॉक मार्केट, टैक्स प्लानिंग और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। अब तक 8,000 से अधिक कंटेंट लिख चुकी रिचा की विशेषता है—जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाना। वह ऐसी स्टोरीज तैयार करती हैं जो न केवल जानकारीपूर्ण होती हैं, बल्कि आम पाठक की वित्तीय समझ को बेहतर बनाने में भी मदद करती हैं।

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