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Salary Hike: 2025 में 10 फीसदी बढ़ेगी सैलरी, जानें किन सेक्टर के कर्मचारियों को होगा फायदा

Salary Hike: इंजीनियरिंग, विनिर्माण एवं खुदरा उद्योगों में 10 प्रतिशत वेतनवृद्धि होने का अनुमान है। इसके बाद वित्तीय संस्थानों में 9.9 प्रतिशत की वेतन वृद्धि हो सकती है। इस साल औसतन 16.9 प्रतिशत कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ी जबकि 2023 में यह अनुपात 18.7 प्रतिशत और 2022 में 21.4 प्रतिशत था।

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कितनी बढ़ेगी सैलरी

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Salary Hike:अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक कारोबारी आउटलुक के बीच भारत में अगले कैलेंडर वर्ष में 9.5 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी होने का अनुमान है। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है।वैश्विक पेशेवर सेवा फर्म एऑन पीएलसी के ‘30वें वार्षिक वेतन वृद्धि और कारोबार सर्वेक्षण’ के मुताबिक, वर्ष 2025 में कर्मचारियों के कुल वेतन में औसतन 9.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने का अनुमान है जबकि मौजूदा कैलेंडर साल 2024 में वेतन में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि होगी।

इन सेक्टर के कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा

सर्वेक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, इंजीनियरिंग, विनिर्माण एवं खुदरा उद्योगों में 10 प्रतिशत वेतनवृद्धि होने का अनुमान है। इसके बाद वित्तीय संस्थानों में 9.9 प्रतिशत की वेतन वृद्धि हो सकती है।हालांकि, साल 2024 की शुरुआत प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए सतर्कता के साथ हुई थी लेकिन वैश्विक क्षमता केंद्रों और प्रौद्योगिकी उत्पादों एवं मंचों के कर्मचारियों को क्रमशः 9.9 प्रतिशत और 9.3 प्रतिशत की वेतन वृद्धि होने की उम्मीद है।प्रौद्योगिकी परामर्श एवं सेवा क्षेत्र में वेतन वृद्धि 8.1 प्रतिशत के निचले स्तर पर रह सकती है।

एऑन में पार्टनर रूपांक चौधरी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद हमारा अध्ययन भारत में कई क्षेत्रों में सकारात्मक कारोबारी परिदृश्य को दर्शाता है। यह धारणा स्थानीय बाजार के दम पर आगे बढ़ने वाले कई क्षेत्रों में जारी है और यह विनिर्माण, जीवन विज्ञान एवं खुदरा उद्योगों में अनुमानित वेतन वृद्धि से साफ होती है।

नौकरी छोड़ने पर क्या कहते हैं आंकड़े

सर्वेक्षण के मुताबिक, प्रतिस्पर्धी नौकरी बाजार में प्रतिभावान कर्मचारियों को अपने साथ रखने के लिए संगठनों को बदलते बाजार के आंकड़ों से अवगत रहना चाहिए और तेजी से विकसित हो रहे वेतन रुझानों को समझना चाहिए।रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल औसतन 16.9 प्रतिशत कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ी जबकि 2023 में यह अनुपात 18.7 प्रतिशत और 2022 में 21.4 प्रतिशत था।

एऑन के सह निदेशक (प्रतिभा समाधान) तरुण शर्मा ने कहा कि नौकरी छोड़ने की दर में आई नरमी कंपनियों को आंतरिक विकास, क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने का एक अनूठा अवसर मुहैया कराती है। आंतरिक स्तर पर प्रतिभा को विकसित कर फर्म नई नियुक्तियों से जुड़ी उच्च लागत में कमी ला सकती है। एऑन का यह सर्वेक्षण 40 उद्योगों में 1,176 से अधिक नियोक्ता संगठनों से मिली सूचनाओं पर आधारित था।

Prashant Srivastav
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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