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छोटा कारोबार करना है बड़ा, कैसे जुटाएं पैसा? NBFC Vs सरकारी योजना कौन बेहतर?

छोटा कारोबार अगर बड़ा करना है, तो सबसे बड़ी चुनौती पैसा जुटाना है। क्योंकि, आमतौर पर कारोबार को बड़ा करने के लिए बैंकों और सरकारी योजनाओं से फंडिंग हासिल करना मुश्किल होता है। इन मुश्किलों के बीच NBFC आती हैं।

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छोटे कारोबार को NBFC से मिलती है आसान फंडिंग

Business Funding NBFC Vs Govt Schemes : दुकान में नया स्टॉक भरना हो, कारोबार के लिए मशीन खरीदनी हो, दूसरी ब्रांच खोलनी हो या बिजनेस का दायरा बढ़ाना हो। छोटे कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अक्सर पैसे की होती है। बैंक से बड़ा लोन लेने के लिए कई तरह के दस्तावेज और गारंटी की जरूरत पड़ सकती है, वहीं हर कारोबारी के पास प्रॉपर्टी गिरवी रखने का विकल्प भी नहीं होता। ऐसे में छोटे कारोबारियों के लिए पैसा जुटाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

क्यों बड़े बैंक और सरकारी योजनाएं नहीं आती काम

व्यावहारिक तौर पर ज्यादातर छोटे कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस बात की रहती है कि उनके कारोबार को बड़े बैंक और सरकारी योजनाओं के तहत फंडिग नहीं मिल पाती है। बड़े बैंक से लोन लेने में बिजनेस के स्ट्रक्चर से लेकर लोन सिक्योरिटी की वजह से अड़चनें आती हैं। वहीं, दूसरी तरफ सरकारी योजनाओं के लिए शर्तें पूरी करना चुनौतियों भर काम हो जाता है। ऐसे में NBFC की एंट्री होती है। आजकल कई नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां खासतौर पर बिजनेस ग्रोथ जैसे सेक्टर में काम कर रही हैं, जो आसान शर्तों के साथ बिजनेस एक्सपेंशन के लिए फंडिंग देती हैं।

कौन सी सरकारी योजनाओं से मिलती है फंडिंग

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना यानी PMMY छोटे कारोबारियों के लिए सबसे प्रमुख सरकारी क्रेडिट स्कीम में से एक है। इसमें शिशु, किशोर चार श्रेणियां हैं। इसके तहत 50 हजार रुपए से लेकर 20 लाख तक के लोन बिना कॉलेटरल के मिलते हैं। हालांकि, लोन के लिए पात्रता की कई शर्तें होती हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी इसका लाभ नहीं ले पाते हैं। हालांकि, सरकार के आंकड़ों मुताबिक 8 अप्रैल, 2026 तक PMMY के तहत 57 करोड़ से ज्यादा लोन दिए गए हैं। इस योजना के तहत कुल 40.07 लाख करोड़ रुपए की राशि जारी हो चुकी है।

NFBC क्यों आसान विकल्प?

बड़े कमर्शियल बैंक और सरकारी योजनाओं की तुलना में ज्यादातर छोटे कारोबारियों के लिए NBFC से फंडिंग लेना ज्यादा आसान लगता है। भले ही उन्हें यहां ब्याज के तौर पर ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है। लेकिन, जब कारोबार को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अर्जेंट फंडिंग की जरूरत होती है, तो NBFC फिनटेक कंपनियां सबसे आसान तरीके पैसा उपलब्ध कराती हैं।

कैसे NBFC करती हैं मदद?

छोटे कारोबारियों को जब वर्किंग कैपिटल, नए स्टॉक, मशीनरी लगाने या एक्सपेंशन के लिए फंड की जरूरत होती है, तो NBFC काम आती हैं। वैसे तो ज्यादातर कंपनियां NPA, हाई नॉन सिक्योर्ड लोन और लो रिकवरी जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं। वहीं, कुछ NBFC का पूरा बिजनेस मॉडल ही छोटे कारोबारियों की फंडिंग से जुड़ा है। मिसाल के तौर पर MS Fincap जैसी कंपनियां हैं, जिनकी लोन बुक में 91% सिक्योर्ड लोन हैं।

नया मॉडल आ रहा सामने

छोटे कारोबारियों को लोन देने के बाजार में MS Fincap एक नया मॉडल है। CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने दूसरी NBFC की तरह ही अन सिक्योर्ड लोन से से शुरुआत की थी, अब इसके पोर्टफोलियो का 91.6% हिस्सा सिक्योर्ड MSME लेंडिंग से आता है।

इसकी वजह से MS Fincap का AUM मार्च 2024 में 252 करोड़ रुपए था, जो मार्च 2025 में बढ़कर 354 करोड़ रुपए और दिसंबर 2025 तक 512 करोड़ रुपए पहुंच गया। यानी मार्च 2025 से दिसंबर 2025 के बीच AUM में करीब 45% की बढ़ोतरी हुई। हाल में ही कंपनी को “Fastest Growing NBFC of the Year” का सम्मान भी मिला है।

तेजी से बढ़ रहा सिक्योर्ड MSME लैंडिंग कारोबार

CRISIL की रिपोर्ट के मुताबिक NBFC सेक्टर का ओवरऑल AUM FY26 और FY27 में 18-19% की दर से बढ़ने का अनुमान है और मार्च 2027 तक यह 50 लाख करोड़ रुपए के पार जा सकता है। छोटे कारोबारियों के लिए इसका मतलब यह है कि अब लोन लेने के विकल्प पहले से ज्यादा हैं, लेकिन सही विकल्प कारोबार की जरूरत और भुगतान की क्षमता पर निर्भर करेगा कि उन्हें कितनी और किन शर्तों पर फंडिंग मिलेगी।

NBFC से लोन लें तो न करें ये गलती

NBFC आमतौर पर आसान शर्तों पर लोन देती हैं। लेकिन, भुगतान में छोटी चूक आपके लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। ऐसे में अगर आपने अपने बिजनेस की किसी प्रॉपर्टी को कॉलेटरल रखकर लोन लिया है, तो हमेशा समय से भुगतान करें, यहां जरा सी चूक आपके क्रेडिट स्कोर के साथ ही आपकी प्रॉपर्टी के लिए भी रिस्क खड़ी कर सकती है। क्योंकि, NBFC अक्सर बैंकों की तुलना में रिकवरी को लेकर ज्यादा सख्त और सतर्क रहती हैं।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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