Unicorn Startup Explained : भारत में स्टार्टअप की दुनिया तेजी से बदल रही है। अब सिर्फ फिनटेक और सॉफ्टवेयर कंपनियां ही तेजी से आगे नहीं बढ़ रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष और रक्षा जैसे क्षेत्रों में भी नई कंपनियां तेजी से उभर रही हैं। इनमें से कई कंपनियां आने वाले वर्षों में बहुत बड़ी बन सकती हैं। इसी बदलाव को समझने के लिए हुरुन रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट महत्वपूर्ण है। इसमें उन स्टार्टअप की पहचान की गई है, जिनके आने वाले वर्षों में यूनिकॉर्न बनने की संभावना है। इन कंपनियों को ‘चीता’ कैटेगरी में रखा गया है।
सबसे पहले समझें, यूनिकॉर्न क्या होता है?
यूनिकॉर्न एक ऐसा स्टार्टअप होता है, जिसकी वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर या उससे ज्यादा हो जाती है। 1 अरब डॉलर भारतीय रुपये में बहुत बड़ी रकम है। इसकी कीमत भारतीय रुपये में बदलने पर हजारों करोड़ रुपये होती है। जब किसी स्टार्टअप की वैल्यूएशन इस स्तर तक पहुंचती है, तो उसे यूनिकॉर्न कहा जाता है। यहां एक बात समझना जरूरी है। वैल्यूएशन का मतलब कंपनी के बैंक खाते में मौजूद पैसा नहीं है। यह कंपनी की अनुमानित बाजार कीमत होती है। निवेशक कंपनी के कारोबार भविष्य की कमाई और ग्रोथ की क्षमता को देखकर उसकी वैल्यूएशन तय करते हैं।
‘चीता’ और ‘गैजेल’ क्या हैं?
हुरुन ने तेजी से बढ़ने वाले स्टार्टअप को अलग-अलग कैटेगरियों में रखा है। इनमें ‘चीता’ ऐसी कंपनियां हैं, जिनकी वैल्यूएशन करीब 20 करोड़ से 50 करोड़ डॉलर के बीच है। इनके अगले पांच साल में यूनिकॉर्न बनने की संभावना मानी जाती है। इसके बाद ‘गैजेल’ कैटेगरी आती है। इसमें ऐसी कंपनियां होती हैं, जिनके अगले तीन साल में यूनिकॉर्न बनने की उम्मीद होती है। सबसे ऊपर यूनिकॉर्न होते हैं। इनकी वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर या उससे ज्यादा हो चुकी होती है। इस तरह चीता भविष्य का संभावित यूनिकॉर्न है। गैजेल उससे भी ज्यादा तेजी से यूनिकॉर्न बनने की दौड़ में है। वहीं यूनिकॉर्न वह स्टार्टअप है, जो यह मुकाम हासिल कर चुका है।
भारत में कितने ‘चीता’ स्टार्टअप हैं?
एएसके प्राइवेट वेल्थ हुरुन इंडिया ‘चीता’ सूचकांक 2026 में कुल 110 स्टार्टअप शामिल हैं। यह संख्या पांच साल में काफी बढ़ी है। साल 2021 में इस लिस्ट में सिर्फ 54 कंपनियां थीं। यानी पांच साल में इनकी संख्या 104 प्रतिशत बढ़ गई। यह बताता है कि भारत में तेजी से बढ़ने वाले स्टार्टअप की संख्या लगातार बढ़ रही है। इन 110 कंपनियों की कुल वैल्यूएशन 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। इनका औसत मूल्यांकन करीब 2,820 करोड़ रुपये है। ये कंपनियां मिलकर 1.10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देती हैं।
इस साल 43 नई कंपनियां शामिल हुईं
2026 की लिस्ट में 43 नई कंपनियों ने जगह बनाई है। यह कुल चीता कंपनियों की संख्या का एक-तिहाई से ज्यादा है। इन नई कंपनियों में कई अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियां शामिल हैं। स्वच्छ परिवहन क्षेत्र में ब्लू एनर्जी मोटर्स, मैटर, पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी और रिवर मोबिलिटी जैसी कंपनियां शामिल हुईं। एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में सागर डिफेंस इंजीनियरिंग, ध्रुव स्पेस और दिगानतारा जैसी कंपनियां लिस्ट में आईं। AI क्षेत्र में सिंपलीस्मार्ट, रॉकेट, क्यूपीआई-एआई, फ्लैम और फ्रीहैंड जैसी कंपनियां शामिल हैं। सेवा क्षेत्र में स्नैबिट, प्रोंटो और ऑलहोम जैसी कंपनियों ने जगह बनाई है।
भारत में स्टार्टअप का बूम! 110 कंपनियां यूनिकॉर्न बनने की कतार में (तस्वीर-AI)
सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा स्टार्टअप बाजार
कुछ साल पहले भारत के बड़े स्टार्टअप मुख्य रूप से इंटरनेट, ई-कॉमर्स, फिनटेक और सॉफ्टवेयर से जुड़े थे। अब तस्वीर बदल रही है। इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा और AI जैसे क्षेत्रों में भी कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उदाहरण के लिए, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में 2023 में सिर्फ एक चीता कंपनी थी। 2026 में इनकी संख्या बढ़कर पांच हो गई। इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है। यहां चीता कंपनियों की संख्या चार से बढ़कर आठ हो गई। स्वच्छ तकनीक के क्षेत्र में यह संख्या तीन से बढ़कर पांच हो गई। इससे पता चलता है कि भारत में स्टार्टअप का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
कौन सा क्षेत्र सबसे आगे है?
2026 की लिस्ट में फिनटेक सबसे आगे है। इस क्षेत्र में कुल 17 चीता कंपनियां हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस यानी SaaS का नंबर आता है। इस क्षेत्र में 16 कंपनियां हैं। ई-कॉमर्स में 12 चीता कंपनियां शामिल हैं। इसका मतलब है कि पुराने और नए दोनों तरह के सेक्टर भारत के स्टार्टअप बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं।
किन शहरों में सबसे ज्यादा चीता कंपनियां हैं?
भारत के कुछ बड़े शहर स्टार्टअप के प्रमुख केंद्र बन गए हैं। बेंगलुरु इस मामले में सबसे आगे है। यहां 36 चीता कंपनियां हैं। इसके बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR का नंबर है। यहां 25 कंपनियां हैं। मुंबई में 16 चीता कंपनियां हैं। इससे साफ है कि बड़े शहरों में निवेश, तकनीक, प्रतिभा और कारोबार का बेहतर माहौल स्टार्टअप को तेजी से बढ़ने में मदद कर रहा है।
एक साल में क्या बदलाव आया?
पिछले एक साल में स्टार्टअप की स्थिति में कई बदलाव देखने को मिले। कुल 43 कंपनियां चीता लिस्ट में शामिल हुईं। 10 कंपनियां गैजेल कैटेगरी में पहुंच गईं। तीन कंपनियां सीधे यूनिकॉर्न बन गईं। इसके अलावा 6 कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध भी हुईं। इसका मतलब है कि इन कंपनियों में से कई सिर्फ वैल्यूएशन बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं। वे कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रही हैं।
भारत के लिए इसका क्या मतलब है?
स्टार्टअप सिर्फ नई कंपनी बनाने का नाम नहीं है। इन कंपनियों से नए रोजगार पैदा होते हैं। नई तकनीक विकसित होती है। निवेश बढ़ता है। नए कारोबार खड़े होते हैं। जब कोई स्टार्टअप बड़ा होता है, तो उसके आसपास भी कई छोटे कारोबार विकसित होते हैं। इससे पूरी अर्थव्यवस्था को फायदा हो सकता है। आज अंतरिक्ष, इलेक्ट्रिक वाहन और AI जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों का बढ़ना खास महत्व रखता है। इन क्षेत्रों में भविष्य में दुनिया भर में बड़ी मांग हो सकती है।
एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक एएसके प्राइवेट वेल्थ के सह-संस्थापक और सीईओ राजेश सलूजा के अनुसार, भारत का स्टार्टअप क्षेत्र बड़े बदलाव से गुजर रहा है। उनका कहना है कि नई पीढ़ी के तेजी से बढ़ने वाले कारोबार अब पारंपरिक टेक्नोलॉजी क्षेत्रों से आगे निकल रहे हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ तकनीक, एयरोस्पेस और AI का महत्व बढ़ रहा है। हुरुन इंडिया के संस्थापक और मुख्य शोधकर्ता अनस रहमान जुनैद ने भी भारत के स्टार्टअप क्षेत्र में बदलाव की बात कही। उनके मुताबिक पांच साल पहले भारत में अंतरिक्ष तकनीक, ऊर्जा बदलाव और AI जैसे क्षेत्रों में ज्यादा कंपनियों की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब इन क्षेत्रों में तेजी से नई कंपनियां बन रही हैं।
संक्षेप में समझें
अगर किसी स्टार्टअप की वैल्यूएशन 1 अरब डॉलर तक पहुंच जाती है, तो वह यूनिकॉर्न कहलाता है। जो कंपनी अभी इससे नीचे है, लेकिन तेजी से बढ़ रही है, वह चीता या गैजेल जैसी श्रेणी में आ सकती है। 2026 की चीता लिस्ट में 110 कंपनियां हैं। इनकी कुल वैल्यूएशन 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। इन कंपनियों में 1.10 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि स्टार्टअप की दुनिया अब सिर्फ ऐप, ऑनलाइन खरीदारी या सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है। AI से लेकर इलेक्ट्रिक वाहन तक और अंतरिक्ष से लेकर रक्षा तक, नए क्षेत्र तेजी से आगे आ रहे हैं। यही बदलाव आने वाले वर्षों में भारत के स्टार्टअप बाजार की दिशा तय कर सकता है।
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल नई कंपनियां खोलने तक सीमित नहीं है। अब ये कंपनियां लंबे समय तक टिकने वाला बिजनेस बना रही हैं, देश के लिए संपत्ति पैदा कर रही हैं और लाखों लोगों को नौकरियां दे रही हैं। चीता से गैजेल और फिर यूनिकॉर्न बनने का यह सफर भारत की आर्थिक ताकत को पूरी दुनिया में मजबूत कर रहा है।
