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समुद्र के बीच यह देश बना रहा दुनिया का पहला Energy Island! 8 फुटबॉल मैदान जितना बड़ा, जानें क्यों खास?

दुनियाभर में एनर्जी की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए दुनियाभर के देश अपने—अपने तरीके से काम कर रहे हैं। इसी कड़ी में बेल्जियम समुद्र में एनर्जी आइलैंड बना रहा है।

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एनर्जी आइलैंड

समुद्र के बीच एक ऐसा आइलैंड तैयार किया जा रहा है, जो जमीन पर नहीं बल्कि पानी के ऊपर ऊर्जा का नया हब बनेगा। बेल्जियम नॉर्थ सी में दुनिया का पहला आर्टिफिशियल Energy Island बना रहा है। करीब 8 फुटबॉल मैदान जितना बड़ा यह प्रोजेक्ट समुद्र में बनने वाली विंड पावर को बिजली के बड़े नेटवर्क से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा। आखिर यह Energy Island कैसे काम करेगा और इसे बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? आइए समझते हैं।

23 विशाल कंक्रीट ब्लॉक से बन रहा आइलैंड

बता दें कि बेल्जियम के तट से 45 किलोमीटर दूर, नॉर्थ सी के बीचों-बीच बन रहा यह एनर्जी आइलैंड है, जो आठ फुटबॉल मैदानों जितना बड़ा है। इसे 23 विशाल कंक्रीट के 'कैसन' (बड़े खोखले ब्लॉक) से बनाया जा रहा है, जिनमें से हर एक का वजन लगभग 22,000 टन है। इस एनर्जी आइलैंड से विंड फार्म से बनने वाली सारी बिजली इकट्ठा कर उसे सबमरीन केबल के जरिए मुख्य जमीन तक पहुंचाने के लिए बनाया जा रहा है। 'प्रिंसेस इसाबेल आइलैंड' नाम के इस प्रोजेक्ट को बेल्जियम की बिजली सिस्टम ऑपरेटर कंपनी 'एलिया' (Elia) प्रमोट कर रही है। इसे बेल्जियम की इंजीनियरिंग कंपनियों 'डेमे' (DEME) और 'जान डी नुल' (Jan De Nul) के बनाए 'टीएम एडिसन' (TM Edison) कंसोर्टियम द्वारा बनाया जा रहा है।

समुद्र में कैसे तैयार हो रहा?

इस Energy Island को तैयार करने का काम करीब दो साल तक चलेगा। सर्दियों में समुद्र में तूफानों के खतरे को देखते हुए काम रोक दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए बनाए गए हर कंक्रीट ब्लॉक यानी कैसन (Caisson) की लंबाई करीब 58 मीटर, चौड़ाई 28 मीटर और ऊंचाई 23 से 32 मीटर है। इसकी ऊंचाई तूफान से बचाने वाली दीवारों के डिजाइन के हिसाब से अलग-अलग है। इन कैसन्स को नीदरलैंड के व्लिसिंगेन बंदरगाह में तैयार किया गया। यहां पांच अलग-अलग स्टेशन वाली प्रोडक्शन लाइन बनाई गई थी, ताकि एक साथ कई ब्लॉकों पर काम किया जा सके।

पानी में कैसे डुबोए जाएंगे ये विशाल ब्लॉक?

इन कंक्रीट ब्लॉकों को सीधे समुद्र में गिराया नहीं जाएगा। इन्हें आंशिक रूप से पानी में डूबी अवस्था में खींचकर तय जगह तक ले जाया जाएगा। वहां पहुंचने के बाद इनमें रेत भरी जाएगी। रेत के वजन से कैसन धीरे-धीरे समुद्र में डूबेगा और तैयार किए गए फाउंडेशन पर मजबूती से टिक जाएगा।

कितनी आएगी लागत

इस प्रोजेक्ट का पैमाना इसकी लागत से भी समझा जा सकता है। अक्टूबर 2024 में European Investment Bank (EIB) ने प्रोजेक्ट के पहले चरण के लिए €650 मिलियन की फंडिंग मंजूर की थी। उस समय पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 1.105 अरब यूरो था। हालांकि, बाद में इसकी लागत में काफी बढ़ोतरी हुई। शुरुआती अनुमान करीब 650 मिलियन यूरो था, जो अब बढ़कर लगभग 7 अरब यूरो तक पहुंच गया है। बिजली से जुड़े उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। लागत बढ़ने से प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता को लेकर सवाल भी उठे हैं।

2030 के आसपास शुरू हो सकता है ऑपरेशन

जानकारी, ज्यादातर सिविल इंजीनियरिंग का काम 2026 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद 2026 से 2030 के बीच बिजली से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर लगाया जाएगा। Energy Island के करीब 2030 तक चालू होने की उम्मीद है।

समुद्री जीवों और पक्षियों का भी रखा गया ध्यान

प्रोजेक्ट का डिजाइन केवल कंक्रीट और बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित नहीं है। इसे Nature-Inclusive Design के तहत विकसित किया जा रहा है, ताकि समुद्री जीवों और पक्षियों के लिए भी जगह बनाई जा सके।

Alok Kumar
आलोक कुमार author

आलोक कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव रखने वाले आलोक ने अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रमुख कॉर्पोरेट इवेंट्स और चर्चित स्टोरीज कवर की हैं। वह बिजनेस, बैंकिंग, शेयर मार्केट और पर्सनल फाइनेंस पर गहरी समझ रखते हैं और जटिल वित्तीय जानकारियों को सरल, स्पष्ट और पाठक-केंद्रित तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। अब तक आलोक ने लगभग 18,000 स्टोरीज लिखी हैं। उनकी लेखन शैली भरोसेमंद, विश्लेषणात्मक और व्यावहारिक जानकारी देने वाली होती है।

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