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Rupee vs Dollar : 1 महीने में 1.63% मजबूत हुआ रुपया, 5 वजहों से आ रही रिकवरी

डॉलर के मुकाबले रुपया अब लगातार मजबूत हो रहा है। 1 महीने में डॉलर के मुकाबले रुपया 1.63 फीसदी मजबूत हो चुका है। रुपये की मजबूती के पीछे 5 बड़े फैक्टर काम कर रहे हैं।

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डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया

Rupee vs Dollar : जून 2026 का महीना भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए राहत लेकर आता दिख रहा है। खासतौर पर रुपये के लिहाज से जून में अब तक डॉलर के मुकाबले रुपये में 1.63% की रिकवरी देखने को मिली है। बुधवार 17 जून, 2026 को इंटरबैंक करेंसी एक्सचेंज कारोबार में डॉलर और रुपये के स्पॉट प्राइस में रुपये में मजबूती देखने को मिली है। डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 31 पैसे तक मजबूत होकर 94.23 पर आ गया है। वहीं, इससे पहले मंगलवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 94.55 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

पिछले कुछ महीनों से बाजार की सबसे बड़ी चिंता होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया में संभावित आपूर्ति संकट थी। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद तेल सप्लाई को लेकर चिंताएं काफी हद तक कम हुई हैं। महंगा क्रूड भी रुपये पर दबाव की बड़ी वजह रहा है। अब यह दबाव कम हो रहा है, तो रुपये में रिकवरी हो रही है। मोटे तौर पर 5 वजहों रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हो रहा है।

अमेरिका-ईरान समझौते से कच्चे तेल में गिरावट

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा होर्मुज मार्ग से तेल आपूर्ति सामान्य होने के संकेत मिलने से क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए सस्ता तेल रुपये के लिए सकारात्मक माना जाता है।

फेडरल रिजर्व के नरम रुख की उम्मीद

जून 2026 की फेड बैठक में ब्याज दरें स्थिर रहने या भविष्य में कटौती के संकेत मिलने की उम्मीद है। इससे डॉलर इंडेक्स पर दबाव बढ़ा है और उभरते बाजारों की मुद्राओं, खासकर रुपये, को समर्थन मिला है।

विदेशी निवेशकों की वापसी

भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। विदेशी निवेश आने पर डॉलर बिकते हैं और रुपये की मांग बढ़ती है, जिससे भारतीय मुद्रा मजबूत होती है।

RBI की सक्रिय रणनीति

भारतीय रिजर्व बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने और पर्याप्त डॉलर तरलता बनाए रखने के लिए सक्रिय है। RBI के हस्तक्षेप से बाजार में भरोसा बढ़ा है और रुपये को स्थिरता मिली है।

भारत के मजबूत आर्थिक संकेतक

महंगाई नियंत्रण में रहना, मजबूत जीएसटी संग्रह, बेहतर आर्थिक वृद्धि दर और स्थिर बैंकिंग प्रणाली जैसे कारकों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया है। मजबूत आर्थिक बुनियाद विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है और रुपये को सहारा देती है।

    Yateendra Lawaniya
    यतींद्र लवानियाauthor

    प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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