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रहेजा डेवलपर्स के पिता-पुत्र को राहत! ED मामले में साकेत कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई अंतरिम रोक

रियल एस्टेट कंपनी रहेजा डेवलपर्स के मालिक और उनको पुत्र को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने ईडी के गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट पर अंतरिम रोक लगा दी है।

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रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड के चेयरमैन नवीन एम. रहेजा और उनके बेटे नयन एन. रहेजा

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड के चेयरमैन नवीन एम. रहेजा और उनके बेटे नयन एन. रहेजा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी राहत देते हुए गिरफ्तारी से अंतरिम रोक लगा लगा दी है। अदालत ने दोनों आरोपियों को अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से बचाव दिया है और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है।

साकेत कोर्ट की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान की अदालत ने यह आदेश प्रवर्तन निदेशालय की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया, जिसमें दोनों आरोपियों के खिलाफ ओपन-एंडेड गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई थी।

ईडी को इस मामले में तलाश

ईडी ने अपनी अर्जी में कहा था कि नवीन रहेजा और नयन रहेजा ने जांच में सहयोग नहीं किया और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 50 के तहत जारी समन का पालन नहीं किया। एजेंसी ने बीएनएसएस की धारा 72 और 75 के साथ पीएमएलए की धारा 65 के तहत दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की थी।

मामले में एक अगस्त को विस्तृत सुनवाई हुई थी। आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने अदालत को बताया कि दोनों आरोपी वर्ष 2025 में चार अलग-अलग मौकों पर ईडी के समक्ष पेश हो चुके हैं। इसके अलावा, जांच एजेंसी की ओर से मांगे गए दस्तावेज भी उपलब्ध करा दिए गए हैं।

इस कारण राहत देने की मांग

बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि ईसीआईआर वर्ष 2022 में दर्ज की गई थी, लेकिन लगभग चार साल बाद गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग की गई है। आरोपियों ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और जांच अधिकारी के बुलाने पर पेश होंगे।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि नयन रहेजा की अग्रिम जमानत याचिका लंबित है, जबकि नवीन रहेजा वरिष्ठ नागरिक हैं। ऐसे में दोनों को जांच में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए।

वहीं, ईडी ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि दोनों आरोपी अप्रैल 2026 में जारी समन का पालन करने में विफल रहे और चार मौकों पर जांच में शामिल नहीं हुए। एजेंसी का कहना था कि इस स्तर पर किसी तरह की राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है। अदालत ने यह भी कहा कि गैर-जमानती वारंट जारी करने के गंभीर परिणाम होते हैं और इसका इस्तेमाल बेहद सावधानी के साथ किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसे आदेश यांत्रिक तरीके से पारित नहीं किए जा सकते।

जांच में सहयोग देने का आदेश

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोनों पक्षों की दलीलें अभी पूरी नहीं हुई हैं। साथ ही, दोनों आरोपियों ने जांच में शामिल होने और सहयोग करने की इच्छा जताई है। ऐसे में उन्हें अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया जाना उचित होगा।

अदालत ने दोनों आरोपियों को निर्देश दिया कि वे जांच अधिकारी के बुलाने पर जांच में शामिल हों और पूरा सहयोग करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि नवीन रहेजा की उम्र को देखते हुए ईडी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनकी उपस्थिति से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर विचार कर सकती है। मामले की अगली सुनवाई तीन सितंबर को होगी।

Gaurav Srivastav
गौरव श्रीवास्तवauthor

टीवी न्यूज रिपोर्टिंग में 10 साल पत्रकारिता का अनुभव है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानूनी दांव पेंच से जुड़ी हर खबर आपको इस जगह मिलेगी। साथ ही चुनाव आयोग, विपक्ष के राजनीतिक घटनाक्रम से लेकर हर जनहित मुद्दे पर मेरी नजर रहती है।

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