Reliance Share Crash की वजह से कंपनी के मार्केट कैप से करीब 1 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए हैं। रिलायंस के शेयरों में आई हालिया गिरावट ने निवेशकों को चौंकाया है। रिकॉर्ड हाई से फिसलकर शेयर दो कारोबारी सत्रों में करीब 6.5% टूट गया है। हालांकि, बाजार के जानकार इसे किसी बड़े फंडामेंटल खतरे की बजाय क्लासिक प्रॉफिट बुकिंग और न्यूज-ट्रिगर्ड करेक्शन मान रहे हैं।
गिरावट की वजह क्या ?
Reliance को लेकर एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वह रूसी तेल खरीद रही है। लेकिन, कंपनी ने साफ किया कि उसे पिछले करीब तीन हफ्तों से रूसी कच्चे तेल की कोई डिलीवरी नहीं ली है। इसके अलावा और जनवरी में भी रूसी तेल की खरीद का कोई इरादा नहीं है। कंपनी के इसी सफाई के बाद बाजार में पैनिक सेलिंग देखने को मिली है। इसके साथ ही, वेनेजुएला को लेकर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने भी एनर्जी शेयरों पर दबाव बनाया। चूंकि Reliance दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी चलाती है, इसलिए क्रूड सप्लाई से जुड़ी किसी भी खबर पर शेयर में तेज रिएक्शन दिखना स्वाभाविक है।
क्या है एनालिस्ट की राय?
ET Now Swadesh से बातचीत में AUM Capital Market के रिसर्च हेड राजेश अग्रवाल का कहना है कि यह गिरावट लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए एंट्री का मौका है। उनके मुताबिक, शेयर ₹1,611 के रिकॉर्ड हाई से ₹100 से ज्यादा टूट चुका है, यानी महज दो सत्रों में 7–8% का करेक्शन आया है। यह गिरावट एक मजबूत रैली के बाद आई है, न कि बिजनेस में किसी बुनियादी कमजोरी की वजह से। अग्रवाल के अनुसार, Reliance की रिफाइनिंग क्षमताएं बेहद फ्लेक्सिबल हैं और अलग-अलग तरह के क्रूड को प्रोसेस कर सकती हैं। इसलिए रूसी तेल की अस्थायी अनुपलब्धता से मार्जिन पर बड़ा असर पड़ने की आशंका नहीं है।
फंडामेंटल्स मजबूत
Reliance आज सिर्फ एक ऑयल कंपनी नहीं रह गई है। पिछले AGM में कंपनी ने खुद को डीप-टेक और कंज्यूमर-फोकस्ड जायंट में बदलने की रणनीति साफ की थी। Jio के पास 50 करोड़ से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं और अब फोकस ARPU बढ़ाने पर है। रिटेल और FMCG बिजनेस लगातार विस्तार कर रहा है, जबकि न्यू एनर्जी में भारी निवेश भविष्य की ग्रोथ को सपोर्ट करता है। यही वजह है कि एनालिस्ट मानते हैं कि शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी के बावजूद Reliance का लॉन्ग टर्म ग्रोथ ट्रैक मजबूत बना हुआ है।
टेक्निकल तस्वीर क्या कहती है
तकनीकी नजर से देखें तो शेयर फिलहाल अपने 100-डे और 200-डे मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है, हालांकि शॉर्ट टर्म एवरेज के नीचे है। इसका मतलब साफ है कि लॉन्ग टर्म ट्रेंड अब भी पॉजिटिव है, जबकि शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
निफ्टी से बेहतर रिटर्न
पिछले एक साल में Reliance के शेयर ने करीब 21% का रिटर्न दिया है, जबकि इसी दौरान Nifty 50 की तेजी करीब 9% रही। यह आउटपरफॉर्मेंस दिखाती है कि करेक्शन के बावजूद बाजार का भरोसा कंपनी पर बना हुआ है।
Panic नहीं, Strategy जरूरी
Reliance के शेयरों में आई यह गिरावट किसी स्ट्रक्चरल कमजोरी का संकेत नहीं देती। एनालिस्ट मानते हैं कि मजबूत फंडामेंटल, डाइवर्सिफाइड बिजनेस और लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी के चलते हर बड़ी गिरावट को खरीदारी के मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए संदेश साफ है कि Panic Sell नहीं, Buy on Dips की रणनीति ही इस शेयर में बेहतर काम कर सकती है।
